अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा से यह बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा भारत!
- किसी बिग टिकट या बिग डील के नजरिए से देखना होगा छोटी बात
- जिओ पॉलिटिक्स के लिहाज से अहम है राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की केमिस्ट्री
- रणनीतिक साझेदारी देगी नए मुकाम, बड़े रक्षा सौदों का होगा रास्ता साफ
- अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता की बनेगी राह
- आतंकवाद पर अमेरिका का विश्वास बढ़ाएगा भारत का हौसला
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुत छोटी और केवल दो दिन की भारत यात्रा से आखिर क्या हासिल होगा? वह भी सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर? बड़ा सवाल है। इस सवाल का भारतीय कूटनीति और राजनयिक गलियारे के जानकार शालीनता से अर्थ समझाते हैं।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मानते हैं कि राष्ट्रपति की यात्रा को किसी बिग डील या बिग टिकट से जोड़कर मत देखिए। राष्ट्रपति ट्रंप पहली बार भारत आ रहे हैं। 20 साल में भारत आने वाले वह तीसरे राष्ट्रपति हैं और यह 20 साल में अमेरिकी राष्ट्रपति का पांचवा भारत दौरा है।
होगा बड़ी डील का रास्ता साफ
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राबर्ट ओ ब्रायन, ट्रेजरी सेक्रेटरी, अमेरिका के ट्रेड रिप्रजेंटेटिव रॉबर्ट लाइथिजर समेत अन्य आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप भले बड़ी डील से इनकार कर रहे हों, लेकिन भारत बड़ी डील का रास्ता साफ होने के प्रति आश्वस्त है।
भारतीय नौसेना अमेरिका से 24 एमएच-60 अटैकिंग हेलीकाप्टर लेने की इच्छुक है। थल सेना के लिए पहले से ही ओसामा बिन लादेन को मार गिराने में इस्तेमाल हुए अपाचे हेलीकाप्टर को लेने की प्रक्रिया चल रही है। भारत वाशिंगटन को अभेद्य सुरक्षा देने वाली नासाम्स एंटी मिसाइल प्रणाली भी लेने का इच्छुक है।
अमेरिका ने इसका प्रस्ताव दिया था और इस सौदे के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिल चुकी है। विदेश और रक्षा मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि यह प्रक्रिया आखिरी चरण में पहुंच रही है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अमेरिका से हमला करने में सक्षम मानव रहित विमान (ड्रोन) चाहती हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के दौरान इस दिशा में भी बात आगे बढ़ेगी। दोनों देश रक्षा और सामरिक साझेदारी को नया मुकाम देंगे।
अन्य क्षेत्र में भी जारी है चर्चा
अमेरिका के ट्रेड रिप्रजेंटेटिव रॉबर्ट लाइथिजर भारतीय समकक्ष वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल के साथ लगातार चर्चा कर रहे हैं। यह चर्चा भारत, अमेरिका के बीच में मुख्य व्यापार समझौते के लिए हो रही है। अमेरिकी कंपनियों, खासकर हार्ले डेविसन जैसी का कहना है कि भारत में टैरिफ दरें काफी अधिक हैं।
बताते हैं भारत ने जापान और कोरिया के टैरिफ से तुलना करते हुए अपनी दलील दी है। दोनों देशों में सकारात्मक बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि जल्द किसी मुकाम पर पहुंचेगी। भारत और अमेरिका इसके साथ-साथ तेल और गैस की आपूर्ति को आगे बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अव्वल है। भारत ऊर्जा के उपभोग में अव्वल है। इसके अलावा विज्ञान एवं तकनीकी, डेयरी, पोल्ट्री, पीपुल-टू पीपुल रिलेशन, छात्रों के अमेरिका में काम करने की स्थितियों, शोध और अनुसंधान समेत अन्य क्षेत्र में प्रगति चल रही है।
ट्रंप-मोदी की केमिस्ट्री बदलेगी समीकरण
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते की केमिस्ट्री का संदेश देगी। भारत भी इसे यही व्यापक रूप देने के पक्ष में है। इस यात्रा से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय (दक्षिण एशिया, एशिया) और अंतरराष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर प्रभाव डालेगी। इसका असर पाकिस्तान से सीमापार के आतंकवाद, पाकिस्तान से रिश्ते, अफगानिस्तान में तालिबान के साथ अमेरिकी पहल और वहां शांति की स्थापना समेत तमाम पहलुओं पर पड़ेगी।
दक्षिण चीन सागर में भारत स्वतंत्र नौवहन और स्वतंत्र वायुक्षेत्र के इस्तेमाल का पक्षधर है। अमेरिका भी इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मानता है। इसके अलावा चीन पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के सहयोग से अपना हित साधने की कोशिश में है। भारत इसका विरोध कर रहा है। असर चीन की इस मुहिम पर भी पड़ेगा।
इसके अलावा भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सदस्यता समेत अन्य अंतराष्ट्रीय मंचों पर उपस्थिति पर असर पड़ेगा। वैसे भी राष्ट्रपति ट्रंप भारत आ रहे हैं और दौरा पूरा करके अमेरिका जा रहे हैं। अभी तक राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की कोई यात्रा नहीं की है।
अमेरिका विश्वसनीय सामरिक साझीदार
एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने कहा थोड़ा व्यापकता में देखिए। अमेरिका अब भारत का केवल रक्षा क्षेत्र में ही सहयोगी नहीं है, बल्कि वह विश्वसनीय सामरिक साझीदार देश बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच में रक्षा सौदों पर ही सहमति नहीं बन रही है, बल्कि संवेदनशील रक्षा उपकरणों, हथियारों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत और अमेरिका की सेनाएं बहुत बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही हैं। अमेरिका रक्षा उपकरणों, तकनीकी क्षेत्र में संयुक्त प्रयास से विनिर्माणन, तकनीकी के आदान-प्रदान के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने परमाणु करार किया है और अमेरिका चाहे पुलवामा की आतंकी घटना हो या अन्य, हर कठिन समय में भारत का विश्वसनीय सहयोग कर रहा है।
उनका आना छोटी घटना नहीं
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका में हाउडी मोदी कार्यक्रम में जाते हैं। उनके साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जाते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में न केवल शरीक होते हैं, बल्कि सभी प्रोटोकॉल तोड़कर रिश्ते को बड़ी ऊंचाई देते हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति अब प्रधानमंत्री के बुलावे पर भारत आ रहे हैं।
वह अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में हाउडी मोदी कार्यक्रम की तर्ज पर होने वाले समारोह में हिस्सा लेंगे। इस अनौपचारिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके निजी संबंध की झलक मिलेगी।
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अफसर के अनुसार यह कोई छोटी घटना नहीं है। सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी तरह की केमिस्ट्री चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बनाई है। कूटनीति की फाइलों में यह बड़ी कामयाबी मानी जाती है।