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कॉल सेंटर घोटाला और भारतीय कनेक्शन: कैसे विदेशी नागरिकों को बनाया जाता है ठगी का शिकार?

Sat, 21 Jul 2018 06:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 21 Jul 2018 06:51 PM IST
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US call centre scam and indian connection
प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिका के बहुचर्चित कॉल सेंटर घोटाले में भारतीय मूल के कुल 21 लोगों को सजा सुनाई गई है। यह लोग भारत में बैठकर खुद को आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) और ‘अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा’ का अधिकारी बता कर अमेरिकियों को ठगी का शिकार बनाते थे। डाटा बेचने वाले दलालों और अन्य सूत्रों के माध्यम से यह लोग नंबर निकाल कर उन्हें कॉल करते थे और कथित तौर पर सरकार का बकाया पैसा न वापस करने पर गिरफ्तारी, जेल भिजवाने और जुर्माना लगाने की धमकी देते थे। 

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भारत में ऐसे सैकड़ों फर्जी कॉल सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो विदेशी नागरिकों खासतौर पर अमेरिकियों को अपना शिकार बनाते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो मुंबई, पुणे, गुरुग्राम समेत देश के कई हिस्सों में ऐसे सैकड़ों कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़ और कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जो अमेरिकी नागरिकों, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नागरिकों को ठगी का शिकार बनाते थे। 
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लोगों को कैसे बनाया जाता है शिकार

फर्जी कॉल सेंटरों में काम करने वाले कर्मचारी कई तरह की लुभावनी योजनाओं के जरिए लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। 

इसी साल जनवरी महीने में गुरुग्राम से गिरफ्तार हुए एक फर्जी कॉल सेंटर कर्मचारी ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वो ग्राहकों को फोन कॉल के जरिए उनसे लोन की जरूरतों के बारे में पूछते हैं। अगर ग्राहक लोन लेने में रूचि दिखाता है, फिर वहां से उनकी ठगी का असली खेल शुरू होता है। कर्मचारी ग्राहक से बहुत तरह के दस्तावेज जमा करने को बोलते हैं। यह तरीका बस ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए किया जाता है। दस्तावेजों की सारी प्रक्रियाएं पूरी होने का नाटक करते हुए कर्मचारी ग्राहकों से लोन मंजूर करने के एवज में 50 से 100 डॉलर प्रोसेसिंग शुल्क के तौर पर मांगते हैं। आम तौर पर भोले-भाले ग्राहक उनके इस लोकलुभावने जाल में फंस ही जाते हैं और अपना पैसा सदा के लिए गंवा देते हैं। 
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ये भी पढ़ें- अमेरिका: कॉल सेंटर घोटाले में भारतीय मूल के 21 लोगों को 20-20 साल की सजा

ठीक इसी तरह प्राइज मनी और सरकार का बकाया पैसा जमा करने के नाम पर भी कॉल सेंटर कर्मचारी विदेशी नागरिकों को ठगते हैं। उनका तरीका काफी आसान होता है। इसके लिए उन्हें आईआरएस स्क्रिप्ट की जरूरत होती है जिसे पाना बेहद ही आसान होता है। इसके बाद वो डाटा बेचने वाले दलालों से संपर्क करते हैं और अन्य सूत्रों के माध्यम से भी यह लोग नंबर निकाल कर लोगों को कॉल करते हैं और उन्हें डरा-धमकाकर उनसे पैसे वसूल करते हैं।

कॉल सेंटर: सस्ते में ज्यादा का मुनाफा 

कोई भी फर्जी कॉल सेंटर खोलने का मतलब है 'सस्ते में ज्यादा का मुनाफा'। इसके लिए किराये पर एक अपार्टमेंट, कुछ कंप्यूटर और कुछ भरोसेमंद लोगों की जरूरत होती है जो इस फर्जी काम को बस अपने तक सीमित रख सकें। कुछ दिनों पहले पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए एक कॉल सेंटर संचालक ने बताया कि किसी भी कॉल सेंटर के संचालन में 2 लाख रुपये से भी कम खर्च आता है और लोगों को बेवकूफ बनाकर इससे कम से कम हर महीने दस लाख रुपये का मुनाफा कमाया जा सकता है। 

5 भारतीय कॉल सेंटरों ने अमेरिकियों को लगाया 20 हजार करोड़ का चूना 

अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग के आंकड़ों की मानें तो 2016 में पांच ऐसे भारतीय कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ हुआ था, जिसने हजारों अमेरिकियों से 20 हजार करोड़ से अधिक रुपये ठग लिए थे। कर प्रशासन के खजाना महानिरीक्षक (टीआईजीटीए) के इंस्पेक्टर जनरल रसेल जॉर्ज ने बताया था कि टीआईजीटीए के पास 18 लाख से अधिक लोगों ने फर्जी कॉल की शिकायत दर्ज कराई थी। इनमें से 9,600 से अधिक लोगों ने शिकायत की थी कि उन्होंने तीन हजार करोड़ से अधिक की राशि ठगों को दे दी। 

इसी साल फरवरी महीने में पुणे में एक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया गया था, जो टैक्स स्कीम के नाम पर कई अमेरिकियों को अपनी ठगी का शिकार बना चुका था। यह कॉल सेंटर करीब 11,000 अमेरिकी नागरिकों को टारगेट कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही इसका भंडाफोड़ हो गया।  

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