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उड़ी हमला: सीढ़ी लगाकर आतंकियों ने की थी घुसपैठ

Sun, 16 Oct 2016 08:05 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली 
एजेंसी/ नई दिल्ली  Updated Sun, 16 Oct 2016 08:05 PM IST
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Uri Attack: staircase with a cross-border terrorist entered
Indian Army - फोटो : Amar Ujala

पिछले महीने उड़ी में सैन्य शिविर पर जिन चार पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमला किया था उन्होंने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर करंट वाली बाड़ सीढ़ी की सहायता से पार की थी। उड़ी हमले में 19 सैनिक शहीद हो गए थे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना ने चारों पाकिस्तानी आतंकवादियों के घुसपैठ के रास्ते की पहचान के लिए जांच की और वह इस निष्कर्ष पर पहुंची कि सलामाबाद नाले के पास सीढ़ियों का इस्तेमाल कर आतंकी भारतीय क्षेत्र में घुसे थे।

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सैन्य अधिकारियों ने बताया कि इन चारों आतंकवादियों में से एक सलामाबाद नाले के पास बाड़ के बीच बची थोड़ी सी खाली जगह का इस्तेमाल कर इस पार आ गया और उसने इस तरफ से बाड़ पर एक सीढ़ी लगा दी। दूसरी तरफ से उसके तीनों साथियों ने दूसरी सीढ़ी लगा दी।
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आतंकवादियों ने दोनों सीढ़ियों को पैदल यात्रियों के लिए बनाए जाने वाले पुल की तरह जोड़ दिया और फिर सीमा पार से तीन अन्य आतंकी भी विद्युतीकृत बाड़ पार कर भारतीय क्षेत्र में आ पहुंचे। इन्हीं आतंकियों ने श्रीनगर से करीब 102 किलोमीटर दूर उड़ी में सैन्य शिविर पर हमला किया था।

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पहले आतंकी द्वारा लाई गई सीढ़ी

Uri Attack: staircase with a cross-border terrorist entered
Indian Army - फोटो : Amar Ujala

सूत्रों के अनुसार बाड़ में जिस थोड़ी सी खुली जगह से पहला आतंकवादी इस तरफ आया था, उससे अन्य तीन आतंकियों के लिए घुसपैठ करना मुश्किल था, क्योंकि उन तीनों के पास भारी मात्रा में गोला बारूद, हथियार एवं खाने-पीने की चीजों वाले बडे़-बड़े बैग थे।

उन्हें इस तरह बाड़ पार करने में काफी वक्त लगता। साथ ही ऐसा करने में उनकी जान को बड़ा जोखिम भी था, क्योंकि इलाके में नियमित रूप से गश्त करने वाली सैन्य टीमें कभी भी वहां पहुंच सकती थीं और उन्हें देख सकती थीं। ​सूत्रों के अनुसार सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचने के बाद आतंकियों ने पहले आतंकी द्वारा लाई गई सीढ़ी को दो गाइडों मोहम्मद कबीर अवान और बशारत को सौंप दी।

ये दोनों एलओसी तक आतंकियों के साथ आए थे। आतंकियों ने सीढ़ी इसलिए वापस भेजा था कि वहां घुसपैठ का कोई निशान न रह जाए। सेना गोहलान और उससे लगे गांव जबलाह में भी छानबीन की, क्योंकि उसे शक था कि आतंकियों ने यहां एक दिन पनाह ली थी। इसके बाद 18 सितंबर को उन्होंने उड़ी में हमला किया था। 

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