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मानसून सत्र: लोकसभा में गतिरोध कायम, नहीं पास हुए दो विधेयक

Fri, 06 Aug 2021 06:50 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 06 Aug 2021 06:50 AM IST
सार

भोजनावकाश के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान में केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पेश किया। आरपीआई के एनके प्रेम चंद्रन ने कहा, हंगामे के बीच विधेयक पारित करना संसदीय परंपराओं का अपमान है। इसके बाद हंगामे के बीच ही विधेयक पेश किया गया।
 

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uproar continues in Lok Sabha two bills not passed
लोकसभा - फोटो : lok sabha tv

विस्तार

लद्दाख में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने के प्रावधान वाला केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश हुआ। हालांकि, हंगामे के चलते बिल को पारित नहीं कराया जा सका।

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पेगासस जासूसी मामले में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। इस बीच सदन की कार्यवाही कई बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे के बीच कराधान विधि संशोधन विधेयक भी पेश किया गया।
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बिरला फिर हुए नाराज, बोले-देश मुझसे जवाब मांग रहा है
प्रश्नकाल के दौरान स्पीकर ने विपक्ष के व्यवहार की आलोचना की। स्पीकर ने कहा, सत्र की शुरुआत में ही सरकार ने सभी मुद्दों पर चर्चा करने पर हामी भरी थी। इसके बाद भी कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल रही। बिरला ने कहा, देश भर से मुझे कार्यवाही न चलने के मामले में सवाल पूछे जा रहे हैं। यह स्थिति देश और लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
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आयुध फैक्टरी के कर्मचारी अब नहीं कर सकेंगे हड़ताल
रक्षा क्षेत्र की अनिवार्य सेवाओं खासतौर से आयुध निर्माणी के कर्मचारियों को हड़ताल से रोकने वाले बिल पर संसद की मोहर लग गई। देश में गोला बारूद की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी। राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक 2021 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी है।

बिल पर हुई संछिप्त चर्चा का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। इसका मकसद यह है कि हथियारों एवं गोला-बारूद की आपूर्ति में बाधा नहीं आए।

आयुध कारखानों के नियोक्ताओं एवं मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों से अच्छी चर्चा के बाद सरकार ने इसे पेश किया है। सिंह ने कहा, किसी भी कर्मचारी और अधिकारी के हितों को प्रभावित करने वाला कोई प्रावधान इस विधेयक में नहीं है। 

अब एनसीआर की हवा दूषित करने वालों पर लगेगा जुर्माना

दिल्ली व आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदारी तय करने और हवा को दूषित करने वालों पर जुर्माना निर्धारित करने की व्यवस्था पर बृहस्पतिवार को संसद की मुहर लग गई।

लोकसभा के एक दिन बाद राज्यसभा ने भी भारी हंगामे के बीच राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व आसपास वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग विधेयक, 2021 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह बिल अब 28 अक्तूबर 2020 को लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा।

बिल पेश करते हुए पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, इस बिल के जरिये दिल्ली व आसपास के इलाकों की आबोहवा दूषित होने पर हम सीधे संसद के समक्ष जिम्मेदार होंगे। वायु प्रदूषण से निपटना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। अभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कोई भी स्थायी, प्रासंगिक एवं समर्पित तंत्र नहीं है। केंद्र, राज्य और न ही स्थानीय निकायों के पास प्रदूषण के कारणों का पता लगाने और दोषियों पर कार्रवाई तय करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

राष्ट्रीय महिला कोष की प्रासंगिकता खत्म, अब बंद होगा कोष : ईरानी
केंद्र सरकार ने क्रेडिट सुविधा देने वाली एजेंसी राष्ट्रीय महिला कोष-आरएमके को बंद करने का फैसला किया है। केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में बताया कि विभिन्न सरकारी उपक्रमों के माध्यम से महिलाओं को पर्याप्त वैकल्पिक ऋण प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होने के कारण वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता और उपयोगिता हो समाप्त हो गई है।

ईरानी ने कहा, राष्ट्रीय महिला कोष (आरएमके) 1993 में स्थापित किया गया था। यह महिलाओं के सामाजिक आर्थिक और सशक्तिकरण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन है। वर्तमान में आरएमके एक सुविधा एजेंसी के तौर पर काम कर रही है, जिसमें आरएमके एनजीओ को सहायता प्रदान करता है।

ईरानी ने कहा, नवंबर में जारी सरकारी निकायों के युक्तिकरण पर भारत सरकार के प्रधान आर्थिक सलाहकार की रिपोर्ट में आरएमके को बंद करने की सिफारिश की थी। इसके स्थान पर मौजूदा समय में महिलाओं को तमाम वैकल्पिक सुविधाओं के साथ उपयोगिता वाली सरकारी पहलों का लाभ मिल रहा है। ब्यूरो

फिलहाल किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने का इरादा नहीं
केंद्र सरकार का किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया को जवाबदेह बनाने और उपयोकर्ताओं की सुरक्षा के लिए लगातार परामर्श जारी किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। कुछ उपयोगकर्ता नफरत और घृणा फैलाने के लिए इसका दुरुपयोग करते भी हैं, लेकिन कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य कोई माध्यम भारतीय लोकतंत्र को नष्ट नहीं कर सकता। 

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