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यूपी को मिला चौथा उत्तराखंडी मुख्यमंत्री
अनूप वाजपेयी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 19 Mar 2017 04:34 AM IST
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योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह बिष्ट उत्तर प्रदेश के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जो मूलरूप से उत्तराखंड से हैं। आदित्यनाथ गढ़वाल के पौड़ी जिले के पंचुर गांव के मूल निवासी हैं। हालांकि लंबे समय से वह गोरखनाथ पीठ से जुड़े होने के कारण गोरखपुर में रह रहे हैं।
यूपी की राजनीति में उत्तराखंड के राजनेताओं का प्रभाव शुरुआती समय से देखने को मिला है। गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा ने बतौर मुख्यमंत्री अपनी अच्छे प्रशासक की छाप छोड़ी है। वहीं उत्तराखंड के नारायण दत्त तिवारी ने मुख्यमंत्री के तौर पर तीन बार यूपी का प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि ये तीनों मुख्यमंत्री उस समय रहे जब उत्तराखंड यूपी से अलग नहीं हुआ था।
आदित्यनाथ का बचपन उत्तराखंड में बीता है और शिक्षा भी वहीं हुई हैं। आदित्यनाथ ने एक समय छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ा था। हालांकि महासचिव पद पर उनकी जीत नहीं हुई थी। दरअसल आदित्यनाथ गोरखनाथ धाम के महंत अवैद्यनाथ के भांजे हैं। मामा ने आदित्यनाथ को धर्म की राह से जोड़ा है। महंत अवैद्यनाथ भी कांडीगांव से ताल्लुक रखते थे।
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बताते हैं कि अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को उनके माता-पिता से गोद ले लिया और अपने साथ गोरखपुर ले गए। महंत अवैद्यनाथ के निधन के बाद आदित्यनाथ को महंत की गद्दी मिली। महंत अवैद्यनाथ की तरह ही आदित्यनाथ भी धर्मगुरु की छवि के साथ राजनीति से भी जुड़ गए।
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यूपी की राजनीति में उत्तराखंड के राजनेताओं का प्रभाव शुरुआती समय से देखने को मिला है। गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा ने बतौर मुख्यमंत्री अपनी अच्छे प्रशासक की छाप छोड़ी है। वहीं उत्तराखंड के नारायण दत्त तिवारी ने मुख्यमंत्री के तौर पर तीन बार यूपी का प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि ये तीनों मुख्यमंत्री उस समय रहे जब उत्तराखंड यूपी से अलग नहीं हुआ था।
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आदित्यनाथ का बचपन उत्तराखंड में बीता है और शिक्षा भी वहीं हुई हैं। आदित्यनाथ ने एक समय छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ा था। हालांकि महासचिव पद पर उनकी जीत नहीं हुई थी। दरअसल आदित्यनाथ गोरखनाथ धाम के महंत अवैद्यनाथ के भांजे हैं। मामा ने आदित्यनाथ को धर्म की राह से जोड़ा है। महंत अवैद्यनाथ भी कांडीगांव से ताल्लुक रखते थे।
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बताते हैं कि अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को उनके माता-पिता से गोद ले लिया और अपने साथ गोरखपुर ले गए। महंत अवैद्यनाथ के निधन के बाद आदित्यनाथ को महंत की गद्दी मिली। महंत अवैद्यनाथ की तरह ही आदित्यनाथ भी धर्मगुरु की छवि के साथ राजनीति से भी जुड़ गए।