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UP Elections 2022: मैराथन कोशिशों से जागा भाजपा का भरोसा, अब दूसरे और तीसरे चरण पर नजर

Fri, 11 Feb 2022 03:18 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 11 Feb 2022 03:18 PM IST
सार

भाजपा के रणनीतिकार कह रहे हैं कि उन्होंने हिजाब विवाद को लेकर विपक्ष की एक बड़ी साजिश विफल कर दी। अब 14 फरवरी को होने वाले दूसरे चरण के मैदान में बहुत कुछ भाजपा के पक्ष में दिखाई देगा।
 

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UP Elections 2022: BJPs confidence boost by marathon efforts, now eyes on second and third phase
Cm yogi, Priyanka, akhilesh - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी चुनाव के तहत गुरुवार को हुए पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा का भरोसा जागा है। पार्टी के रणनीतिकारों को लगने लगा है कि उन्होंने पिछले एक महीने में मैराथन प्रयासों से उ.प्र. में चुनावी माहौल को काफी बदल लिया है। अब तो पार्टी जीत को आगे बढ़ा रही है। 

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11 जनवरी 2022 को उ.प्र. के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने पद से इस्तीफा दे दिया था। जब उनका इस्तीफा मंजूरी के लिए राजभवन जा रहा था, उस समय दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेता राज्य के नेताओं के साथ चुनाव की रणनीति, टिकट बंटवारा आदि पर मंथन कर रहे थे। इसके अगले दिन से भाजपा को झटके लगना शुरू हो गए और 48 घंटे के भीतर उ.प्र. विधानसभा चुनाव जातिगत मुद्दे पर जाता दिखाई देने लगा था। 
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इसके बाद केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार की कमान थाम ली। भाजपा के रणनीतिकार बताते हैं कि पार्टी में सभी को संभलकर बोलने और अनावश्यक बयान न देने के लिए कहा गया। इसके पहले पार्टी ने साक्षी महाराज जैसे उ.प्र. के कई नेताओं और सांसदों को जुबान बंद रखने के लिए कह दिया। 22 जनवरी को केंद्रीय गृहमंत्री ने कैराना में घर-घर दस्तक देनी शुरू की। 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो मोर्चे को बखूबी संभाला। वे मुजफ्फरनगर के 2013 के दंगे और इसके केंद्र में रहे गौरव और सचिन की हत्या को याद करना नहीं भूले। उन्होंने क्षेत्र में संकेतों में संदेश दिया कि चुनाव के बाद क्षेत्र को शिमला बना देंगे। आखिरी संदेश मुख्यमंत्री ने प्रथम चरण के मतदान के ऐन वक्त पर दिया। उन्होंने जनता को संदेश देते हुए ट्वीट कर कहा कि उनका निर्णय उ.प्र. जम्मू-कश्मीर, प. बंगाल और केरल बनने से बचा सकता है। रही सही कसर कर्नाटक में छात्रा के साथ तेजी से खड़े हुए हिजाब विवाद ने पूरी कर दी। भाजपा के रणनीतिकार कह रहे हैं कि उन्होंने हिजाब विवाद को लेकर विपक्ष की एक बड़ी साजिश विफल कर दी। अब 14 फरवरी को होने वाले दूसरे चरण के मैदान में बहुत कुछ भाजपा के पक्ष में दिखाई देगा।

सहारनपुर आए, बिजनौर नहीं गए पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सहारनपुर में जनसभा को संबोधित किया। जबकि 7 फरवरी को उन्हें उ.प्र. के बिजनौर में अधिसूचना जारी होने के बाद पहली जनसभा को संबोधित करना था। प्रधानमंत्री वहां नहीं गए। उसी दिन उन्होंने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण प्रस्ताव पर चर्चा का अपने अंदाज में जवाब दिया। 

सपा की चुटकी, बिजनौर में लोग नहीं आए थे
अधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री के जनसभा में न जाने का कारण खराब मौसम बताया गया। जबकि बिजनौर के समाजवादी नेताओं ने कहा कि जनसभा स्थल पर लोग नहीं आए थे। सपा के संजय लाठर ने चुटकी लेते हुए कहा कि भीड़ नहीं आने के कारण ही पीएम का दौरा निरस्त किया गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस पर तंज किया। उन्होंने 8 फरवरी को कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता से आ सकती हैं, लेकिन प्रधानमंत्री दिल्ली से नहीं आ सके। 

भाजपा के मेरठ के एक नेता भी मानते हैं कि एक सप्ताह पहले तक भाजपा के नेताओं की जनसभा में भीड़ कम हो रही थी। यहां तक कि तमाम विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशियों को घुसने से रोका जा रहा था। लोग हंगामा कर रहे थे। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री की छवि को ध्यान में रखकर भाजपा के चुनाव प्रचार को लेकर रणनीतिकार कोई खराब संदेश नहीं देना चाह रहे थे। प्रधानमंत्री की जनसभा में कम भीड़ से अन्य चुनावी राज्यों में भी गलत संदेश जाता। सपा के नेता कहते हैं कि इसीलिए भाजपा ने घर-घर प्रचार की रणनीति अपनाई। बड़ी जनसभा से परहेज किया। उ.प्र. के चुनाव का आकलन करने में जुटे अखिलेन्द्र का कहना है कि अक्तूबर के बाद से अखिलेश यादव की  जनसभाओं में उमड़ी भीड़ ने ही उन्हें काफी ऑक्सीजन दी थी।

भाजपा के उत्साह का कारण बुढ़ाना-खतौली में उमड़ी भीड़ भी
मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना विधानसभा सीट के अंतर्गत सिसौली गांव आता है। सिसौली किसानों की राजधानी और किसान नेता स्व. महेन्द्र सिंह टिकैत की जन्मस्थली है। भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत और राकेश टिकैत का यह क्षेत्र है। दूसरी विधानसभा सीट खतौली है। दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा हिट रही। भीड़ भी उमड़ी। इसके बाद बताते हैं कि भाजपा के रणनीतिकारों में काफी उत्साह आया। उन्हें लग रहा है कि दूसरे चरण में जिस राजनीतिक नुकसान की आशंका थी, वह नहीं होगा। विधानसभावार सीटों के आकलन में लगे एक भाजपा नेता तो यहां तक कह रहे हैं कि प्रथम चरण के मतदान में बड़े नुकसान की आशंका थी। प्रथम चरण के मतदान में 26 विधानसभा सीटें शहरी क्षेत्र की हैं। 32 ग्रामीण क्षेत्र की, लेकिन मतदान का रुझान देखकर सबकुछ काफी ठीक होने की पूरी संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में चुनाव जातिवाद के दायरे से बाहर निकलने का संकेत दिया है।


दूसरे चरण के मतदान से पहले पूरा जोर लगाएगी भाजपा
भाजपा के रणनीतिकार अब दूसरे चरण के प्रचार के अंतिम दो दिनों में पूरा जोर देने की रणनीति बना रहे हैं। 14 फरवरी को 55 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। इसके बाद पश्चिमी उ.प्र. में जाट, गुर्जर, किसान क्षेत्र से जुड़ी 33 सीटें रह जाएंगी, जिनमें अगले चरण में मतदान होगा। पार्टी के नेताओं का कहना है कि अब आगे चिंता की बात नहीं है। चुनाव अब जातिगत दायरे से बाहर आ गया है। अब यह प्रदेश के विकास, कानून व्यवस्था, राष्ट्रीयता, राष्ट्रवाद के मुद्दे पर होगा। राज्य की जनता को बताने की जरूरत नहीं है कि अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है। देश को नया संसद भवन मिलेगा। उ.प्र. से लेकर पूरे देश में एक्सप्रेस-वे, शिक्षण संस्थाओं, अस्पताल का जाल बिछ रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से बनारस की आभा लौटी है। गाजियाबाद से गोरखपुर तक विकास की गंगा बह रही है। 

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