ये हैं पहले चरण की वो सीटें, जहां दिग्गजों के साथ पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर
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यूपी के पहले चरण में 15 जिलों की 73 सीटों के लिए आज मतदान जारी है। यूपी के साथ साथ पूरे देश की निगाहें इन चुनावों पर टिकी हैं खासकर पहले चरण के चुनावों में जिनमें कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। काफी हद तक पहले चरण का चुनाव ही राज्य की राजनीति की दशा और दिशा तय करेगा। खासकर भाजपा और बसपा के लिए पहले चरण का काफी महत्व है। पिछली विधानसभा में इन दोनों दलों का ही प्रदेश के इस हिस्से में प्रभुत्व रहा था, ऐसे में इस बार भी दोनों दलों के नेताओं की प्रतिष्ठा इन चुनावों से जुड़ी है। आइए निगाह डालते हैं पहले चरण की कुछ ऐसी ही सीटों पर।
नोएडा
वेस्ट यूपी की नोएडा सीट सबसे ज्यादा हॉट बनी हुई है। उसकी वजह है केंद्रीय गृहमंत्री और मोदी सरकार में नंबर दो माने जाने वाले राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक विमला बाथम का टिकट काटकर प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह को यहां से टिकट दिया है।
उनका मुकाबला सपा के सुनील चौधरी से है जो पंकज को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इस सीट को लेकर भाजपा की बेचनी इसी बात से समझी जा सकती है कि केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने पंकज को जीत दिलाने के लिए यहां डेरा डाल रखा है।
मेरठ सदर
वेस्ट यूपी के प्रमुख शहर मेरठ सीट पर भाजपा के दिग्गज और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी लगातार आठवीं बार चुनावी मैदान में हैं। यहां से चार बार विधायक रह चुके वाजपेयी इस बार कड़े मुकाबले में हैं। सपा के रफीक अंसारी और बसपा के पंकज जौली उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पिछले चुनावों में भी ख्य मुकाबला रफीक अंसारी और वाजपेयी के बीच हुआ था, जिसमें वाजपेयी को जीत मिली थी। 2007 के चुनावों में वाजपेयी यहां नजदीकी मुकाबले में हाजी याकूब कुरैशी से हार गए थे ऐसे में इस सीट पर भाजपा खासतौर से नजरे गड़ाए हुए है।
सरधना
मेरठ जिले की ही सरधना विधानसभा सीट इन चुनावों में हॉट सीट के तौर पर सामने आई है। उसकी वजह है भाजपा के फायर ब्रांड नेता और मौजूदा विधायक संगीत सोम और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी अतुल प्रधान के बीच यहां कड़ी टक्कर चल रही है। मुजफ्फरनगर दंगों में भड़काऊ बयान देकर चर्चा में आए संगीत सोम ने इसके बाद से खुद को लगातार भाजपा के फायर ब्रांड नेता के तौर पर स्थापित किया है तो उनके सामने लड़ रहे अतुल प्रधान की छवि जन नेता की मानी जाती है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भी उन्हें वरदहस्त प्राप्त है।
कैराना
शामली जिले की कैराना सीट पर भी इस बार सबकी निगाहें टिकी हैं। कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाकर भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने इस सीट को खास बना दिया है। भाजपा ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को इस सीट से टिकट देकर इस मुद्दे को और हवा देने का ही काम किया है। यहां से सात बार के विधायक रहे हुकुम सिंह ने बेटी को टिकट दिलाकर अपने साथ साथ इस सीट को भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। खास बात ये है कि बेटी के सामने उनके ही परिवार के अनिल चौहान मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। अनिल ने पिछला चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था। सपा ने यहां से मौजूद विधायक नावेद हसन पर ही दूसरी बार विश्वास जताया है।
मथुरा
मथुरा जिले को यूं तो रालोद का गढ़ माना जाता है लेकिन बीते लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में भाजपा की हेमा मालिनी ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद से ही भाजपा इस जिले में अपनी बढ़त बनाने में जुटी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मथुरा सदर सीट से भाजपा ने राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा को टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधायक दल के प्रमुख प्रदीप माथुर से है। मथुरा का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक चुनावी रैली के दौरान इस बात की घोषणा कर दी थी कि यहां से ही पार्टी के कई मंत्री और मुख्यमंत्री बनेंगे।
सिकंदराबाद
अतरौली
अलीगढ़ जिले की अतरौली सीट को शुरू से ही पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गढ़ माना जाता है। अतरौली से लगातार दस चुनाव जीतने वाले कल्याण सिंह का भाजपा से नाता टूटा तो इस सीट पर भी उनकी पकड़ छूटती चली गई। पिछले चुनावों में उनकी बहू को भी इस सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा। इस बार भाजपा ने कल्याण के पौते संदीप सिंह को इस सीट से टिकट दिया है। इंग्लैंड से पढ़कर लौटे संदीप के सामने दादा की विरासत को संभालने की चुनौती है तो भाजपा के साथ साथ कल्याण सिंह के लिए भी संदीप को जीत दिलाना प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। उनका मुकाबला सपा के वीरेश यादव से है जिन्होंने पिछले चुनावों में उनकी मां को मात दी थी।