अवैध हथियारों का यूपी कनेक्शन, जहां चाहो जैसे चाहो वहां ले लो डिलीवरी
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बिहार में इन दिनों अवैध हथियारों का जखीरा बरामद किया जा रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश में भी खासकर पश्चिमी यूपी में अवैध हथियारों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। हत्या, लूट, जानलेवा हमला, समेत अन्य वारदातों में अपराधी इनका इस्तेमाल जमकर कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि चुनावी राज्यों में भी अवैध हथियारों की खपत तेजी से की रही है।
हालांकि अन्तरराष्ट्रीय बाजार में यूपी के हथियारों का दबदबा बढ़ा है। कई आपराधिक वारदातों में ऐसे हथियार इस्तेमाल किए गए हैं जो उत्तर प्रदेश में बनाए गये थे। आंकड़े बताते हैं कि देश में सालाना 25 हजार करोड़ रुपये के इस अवैध कारोबार को रोकने में पुलिस भी नाकामयाब रही है।
देशी हथियारों के साथ-साथ विदेशी अवैध हथियारों की आमद और खरीद फरोख्त में भी पश्चिमी यूपी काफी आगे है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एके 47 की मांग बड़े माफिया, हिस्ट्रीशीटर और बड़े गैंगों में बढ़ी है। हम आपको दे रहे हैं अवैध हथियारों के काले कारोबार से जुड़ी एक खास रिपोर्ट ।
करोड़ों का है अवैध हथियारों का कारोबार
अवैध हथियारों के काले कारोबार का सालाना टर्न ओवर करोड़ों में है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मुंबई व पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध हथियारों की खेप भेजी जा रही है। बताया जा रहा है कि भारत में नेपाल के रास्तों से विदेशी हथियारों की भी सप्लाई की जा रही है। खास बता तो यह है कि यूपी में बने अवैध हथियारों को देश की राजधानी दिल्ली में सबसे महंगे दामों में बेचा जाता है।
चुनावी राज्यों में खपाए जा सकते हैं अवैध हथियार
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के कुछ ऐसे ही गांवों का दौरा किया गया है और पाया गया है कि यहां गोपनीय तरीके से एक ऐसा कारोबार चलाया जा रहा है जिसमें कट्टा निर्माताओं, दलालों और आपूर्तिकर्ताओं का एक सुगठित तंत्र काम कर रहा है।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में आगामी कुछ समय में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावों के मद्देनजर इन राज्यों में पुलिस तंत्र को यूपी के अवैध हथियारों का जखीरा यहां खपने की आशंका है।
तीन स्टेप में होता है अवैध असलहे का कारोबार
जानकारों के मुताबिक अवैध असलहे के कारोबार के तीन अंग होते हैं। इनमें निर्माण, कोरियर और मांग शामिल है। इनमें कोरियर सबसे महत्वपूर्ण अंग है। अवैध असलहे की डिमांड और निर्माण आसानी से किया जाता है लेकिन इसकी डिलीवरी सबसे कठिन कार्य है। एनकाउंटर में मारे गए कई बदमाशों के पास भी कार्बाइन व विदेशी पिस्टल जैसी असलहे बरामद होते रहे हैं।
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड तक हो रही सप्लाई
दिल्ली, एनसीआर और पंजाब के पिस्टल सौदागरों को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिलों में करीब 18 स्थान ऐसे बताए गए हैं, जहां से मौत का सामान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड तक सप्लाई होता है।
इन राज्यों के ज्यादातर बड़े गैंग या उनके दलाल इन सप्लायरों के संपर्क में रहते हैं। जो ऑन डिमांड तमंचे और पिस्टल बनवाते हैं। हथियारों की मंडी के नाम से मेरठ और मुजफ्फरनगर देहात के कई गांव पहले से बदनाम रहे हैं।
लाइसेंसी बंदूक रखने में यूपी सबसे आगे
यही नहीं देश में लाइसेंसी बंदूक रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। सबसे ज्यादा लाइसेंसी हथियारों के मामले में पूरे देश में उत्तर प्रदेश अव्वल है। 22 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में 13 लाख से ज्यादा लोगों के पास हथियार के लाइसेंस हैं। प्रदेश में ज्यादातर हथियार अपनी सुरक्षा को लेकर प्रशासन से मांगे जाते हैं। शायद यहां की जनता को सरकार और पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए हथियार रखने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।
पांच सौ रुपए में कट्टा, पांच हजार में राइफल ले लो
बताते हैं कि इन दिनों बिहार के पटना में अवैध हथियार खरीदना बहुत ही आसान है। यहां मात्र 500 रुपए में कट्टा और 5000 रुपए में राइफल जैसे हथियारों की डिलेवरी जहां चाहेंगे वहां मिल जाएगी। इस बात का खुलासा एक मीडिया संस्थान के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ है।
अवैध हथियार बेचने वाले का स्टिंग करना बहुत रिस्की था लेकिन रिपोर्टर ने जान जोखिम में डालकर उस तस्कर के बारे में जानकारी जुटाई और फिर उससे बात की। तस्कर ने बड़ी ही आसानी से कहा कि आप जहां कहेंगे वहां हथियार पहुंचा देंगे। आप को जिस तरह का हथियार और गोली चाहिए बस इतना बता दीजिए। हां लेकिन बस टोकन मनी पहले देनी होगी इसके बाद ही सामान डिलेवर किया जाएगा। यही नहीं उसने मॉडीफाइ राइफल तक को बेचने की भी बात स्वीकार की।