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इंडिगो के सीईओ बोले: सरकार को 21 फीसदी अप्रत्यक्ष टैक्स देने के कारण नागरिक उड्डयन उद्योग की बुरी हालत
Wed, 19 Jan 2022 08:58 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 19 Jan 2022 08:58 PM IST
सार
रोनोजॉय दत्ता ने लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए वित्त मंत्रालय से तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
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Indigo Airlines
- फोटो : social media
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विस्तार
इंडिगो के सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने कहा कि नागरिक उड्डयन उद्योग को अपने राजस्व का 21 प्रतिशत अप्रत्यक्ष करों के रूप में देना पड़ता है और इसके कारण लंबे समय से यह एक बीमार सेक्टर है। दत्ता ने वित्त मंत्रालय से ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क को 11 से घटाकर 5 प्रतिशत करने और विमान की मरम्मत के पुर्जों पर सीमा शुल्क समाप्त करने का अनुरोध किया।
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उन्होंने एक बयान में कहा कि नागरिक उड्डयन कुशल बुनियादी ढांचा प्रदान करता है, जो हमारे देश में आर्थिक विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण है। फिर भी नागरिक उड्डयन सरकार को अपने राजस्व का 21 प्रतिशत अप्रत्यक्ष करों के रूप में देता है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन के सीईओ ने कहा कि यह उम्मीद करना एक बेमानी है कि उद्योग को सिर्फ सरकार को टैक्स का भुगतान करने के लिए 21 प्रतिशत मार्जिन कमाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि इस अनुचित परिस्थिति के कारण उद्योग लंबे समय से बीमार है और कारोबार व रोजगार को बढ़ावा देने की अपनी वास्तविक क्षमता को पूरा करने में असमर्थ है। 17 जनवरी को रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने एक रिपोर्ट में कहा कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण 2021-22 में उसे लगभग 20,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होने की संभावना है।
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दत्ता ने लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए वित्त मंत्रालय से तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया। दत्ता ने कहा, ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क 11 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जाना चाहिए, एटीएफ (एविएशन टरबाइन फ्यूल) को जीएसटी के तहत लाया जाना चाहिए, मरम्मत के पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी खत्म की जानी चाहिए।