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दिल्ली सीरियल ब्लास्ट: जानिए धमाकों के पीछे का पूरा सच

Mon, 20 Feb 2017 05:19 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Feb 2017 05:19 PM IST
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Unraveling the truth behind delhi blasts 2005
blast
दिल्ली में साल 2005 में हुए सीरियल बम बलास्ट में पटियाला हाउस कोर्ट ने आज 12 साल बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन में से दो आरोपियों को बरी कर दिया, वहीं एक आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई। ब्लास्ट में 60 लोग मारे गए थे और 100 लोग घायल हुए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितेश सिंह ने यह फैसला सुनाया।
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इस मामले में तारिक अहमद दार, मोहम्मद हुसैन फैजिली और मोहम्मद रफिक शाह ट्रायल पर थे। कोर्ट ने 2008 में हमलों के मास्टरमाइंड दार और अन्य दो पर भारतीय दंड संहिता के तहत देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने,  हथियार जुटाने, साजिश रचने, हत्या तथा हत्या के प्रयास में आरोप दाखिल थे। 
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दिल्ली पुलिस ने दार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। उसकी कॉल डिटेल से पुलिस को पता चला था कि वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हुक्मरानों के संपर्क में था। 
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बता दें कि 2005 में लश्कर ने दिवाली से एक दिन पहले दिल्ली में तीन सिलसिलेवार बम ब्लास्ट को अंजाम दिया था। ब्लास्ट के बाद तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थी।

 

धमाकों ने दिल्ली को इस तरह दहलाया

Unraveling the truth behind delhi blasts 2005

तीन सिलसलेवार बम धमाको ने दिल्ली को दहला दिया था। पहला धमाका शाम 5:38 बजे पटपड़गंज में हुआ जिसमें 9 लोगों की मौत हुई, वहीं 60 घायल हुए।

दूसरा धमाका गोविंदपुरी में डीटीसी की एक बस में हुआ, दिवाली से पहले 29 अक्तूबर 2005 को एक नौजवान ने बाहरी मुद्रिका बस में अपना बैग सीट के नीचे रखकर धमाके को अंजाम दिया था, जिसमें चार लोग घायल हुए थे।

तीसरा ब्लास्ट दिल्ली की मशहूर सरोजनी नगर मार्केट में शाम 6:05 बजे हुआ जिसमें 50 लोगों की मौत और 127 लोग घायल हुए थे।

जानिए क्यों किया गया था हमला

Unraveling the truth behind delhi blasts 2005
दिल्ली के लाल किले में 22 दिसंबर 2000 को हमला किया गया था। हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरु और अन्य आरोपियों की सजा पर 29 अक्तूबर 2005 को कड़कड़डूमा स्थित एडिशनल सेशन जज ओ पी सैनी की अदालत में फैसला होना था। जिसके बाद 29 अक्तूबर की सुबह आरोपियों को अदालत में पेश किया गया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद पुलिस स्टेशन में अंजान व्यक्ति ने फोन कर कहा कि अगर हमारे साथियों को सजा पर फैसला सुनाया गया तो हम कोर्ट परिसर में बम धमाका कर देंगे। जिसके बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा तुरंत बढ़ा दिया गया। कोर्ट में तकनीकी खराबी के कारण बिजली न होने की वजह से उस दिन कोई फैसला नहीं सुनाया गया। लेकिन उसी शाम दिल्ली में तीन सिलसलेवार बम धमाकों ने दहला दिया।

बदला लेने के लिए किया गया हमला
हमले के बाद पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में कहा गया कि हमलों के पीछे आतंकियों का मकसद बदला लेना था। साथ ही लाल किला हमले में पकड़े गए उनके साथियों के फैसले को टालना था। 
 
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