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यूजीसी की सख्त टिप्पणी- इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति में नेतृत्व क्षमता का अभाव
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Fri, 25 May 2018 08:58 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरएल हांगलू में नेतृत्व क्षमता का अभाव है। यह गंभीर टिप्पणी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की पांच सदस्यीय कमेटी ने की है, जिसे पिछले साल नवंबर में परफॉर्मेंस ऑडिट के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भेजा गया था।
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कमेटी ने वित्त अधिकारी के पद पर प्रो. एनके शुक्ला को नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक प्रोफेसर को सौंप देना किसी भी दशा में उचित नहीं है।
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कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुलपति निश्चित रूप से एक मुखर व्यक्ति हैं, लेकिन उनमें नेतृत्व क्षमता का अभाव है। उन्होंने खुद को एक खराब प्रबंधक साबित किया है। वह रोजमर्रा होने वाली समस्याओं में ही उलझे रह गए। कमेटी ने जो देखा, उसके अनुसार ‘विश्वविद्यालय को कुलपति और उनकी एक छोटी सी मंडली चला रही है।
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कुलपति ने सारी शक्ति अपने पास रखी हैं या इस मंडली को सौंप दी हैं। छात्रों और आम अध्यापकों के साथ उनका कोई संपर्क नहीं रह गया है। बाकी विश्वविद्यालयों में भी प्रबंधन को कम महत्व दिया जाता है, लेकिन इविवि में तो प्रबंधन नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है।
पांच कुलपतियों के कार्यकाल पर सवाल
कमेटी ने इविवि को वर्ष 2005 में केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद तीन स्थायी और दो कार्यवाहक कुलपतियों के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तीन स्थायी कुलपतियों में प्रो. हांगलू के साथ प्रो. हर्षे और प्रो. एके सिंह के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में प्रो. हर्षे और प्रो. एके सिंह का नाम भी लिया गया गया है और कहा गया है कि जिस क्षमता के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय को चलाया जाना चाहिए था, उस हिसाब से अन्य दो स्थायी कुलपति भी सफल नहीं हो सके।
20 दिनों में जवाब मांगा
पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन से 20 दिनों में जवाब मांगा है। कमेटी ने पिछले साल 13 से 15 नवंबर तक इविवि में परफॉर्मेंस ऑडिट किया था। कमेटी के संयोजक बंगलूरू के प्रो. केपी पांडियन थे। इसके अलावा अन्य सदस्यों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, बंगलूरू के प्रो. गौतम देसी राजू, मणिपुर विश्वविद्यालय के प्रो. साईबाम इतोम्बी, कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रो. पिनाक चक्रवर्ती, आईआईएम संभलपुर, उड़ीसा के निदेशक टीम प्रो. महादेव जायसवाल एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली की प्रो. अमिता सिंह शामिल थीं।