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अब एमफिल व पीएचडी छात्रों को देना होगा शपथपत्र, 60 फीसदी साहित्यिक चोरी पर होगी डिग्री रद्द
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Aug 2018 05:16 AM IST
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यूजीसी
देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी प्रोग्राम में साहित्यिक चोरी विनियम 2018 लागू हो गया है। अब एमफिल और पीएचडी छात्रों को थीसिस के साथ एक शपथ पत्र देना होगा। इस शपथपत्र में स्कॉलर्स को बताना पड़ेगा कि शोध पत्र, शोध निबंध या समान दस्तावेज उसके द्वारा तैयार किए गए हैं।
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यह दस्तावेज उसका मौलिक लेखन कार्य है और किसी भी प्रकार की साहित्यिक चोरी से मुक्त है। वहीं, सुपरवाइजर या गाइड को प्रमाण पत्र में बताना होगा कि उसके छात्र ने अपने शोध में साहित्यिक चोरी नहीं की है।
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केंद्र सरकार ने साहित्यिक चोरी रोकने के मकसद से साहित्यिक चोरी विनियम 2018 तैयार करवाया है, जोकि तत्काल प्रभाव से उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू हो गया है।
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स्कॉलर्स जब अपनी थीसिस जमा करेगा तो उक्त विभाग या विश्वविद्यालय प्रबंधन उसकी साहित्यिक चोरी रोकने वाले सॉफ्टवेयर से जांच करवाएगा। संस्थान को डिग्री देने के एक महीने के भीतर उक्त शोध को शोध गंगा ई-रिपोजिटरी के तहत अपलोड होगी।
60 फीसदी चोरी पर डिग्री रद्द
नए विनियम के तहत अब साहित्यिक चोरी का स्तर भी विभाजित है। दस फीसदी साहित्यिक चोर पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। दस से 40 फीसदी साहित्यिक चोरी पर उक्त शोधार्थी को छह महीने के अंदर दोबारा अपना शोधपत्र तैयार करना होगा। जबकि 40 से 60 फीसदी साहित्यिक चोरी पर एक साल के छात्र को डीबार कर दिया जाएगा। जबकि 60 फीसदी पर उसका रजिस्ट्रेशन तक रद्द होगा।