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छत्तीसगढ़ में नान घोटाले के आरोपी दो पुलिस अधिकारी निलंबित, कई बड़े नाम आ सकते हैं सामने

Sun, 10 Feb 2019 02:33 PM IST
अजय सिंह भाषा, रायपुर
भाषा, रायपुर Published by: अजय सिंह Updated Sun, 10 Feb 2019 02:33 PM IST
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Two officials accused in NAN scam suspended in Chhattisgarh, could reveal many big names
डीजीपी मुकेश कुमार और एसपी रजनेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
छत्तीसगढ़ में चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम में हुए कथित घोटाले की जांच के दौरान अवैधानिक रूप से फोन टेपिंग और दस्तावेजों से छेड़छाड़ के मामले के आरोपी विशेष पुलिस महानिदेशक समेत भारतीय पुलिस सेवा के दो अधिकारियों को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। शनिवार को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विशेष पुलिस महानिदेशक मुकेश गुप्ता और नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निलंबन की जानकारी दी गई।
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गृह विभाग से जारी आदेश के अनुसार आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में दर्ज अपराध की आफिस फाइल और शिकायत रजिस्टर में गड़बड़ी पाई गई है। मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह का यह कृत्य अखिल भारतीय सेवा नियम का उल्लंघन है। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि निलंबन अवधि में अधिकारियों का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय रायपुर रहेगा।
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राज्य में कथित नान घोटाले की जांच के दौरान एसआईटी के अधिकारी अनिल बक्शी ने गुप्ता और सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो थाने में दर्ज शिकायत में बक्शी ने कहा है कि जब वह घोटाला मामले की जांच कर रहे थे तब उन्होंने पाया कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई है। मामले की छानबीन करने पर गुप्ता और सिंह का नाम सामने आया। बक्शी का दावा है कि दोनों अधिकारियों ने दबावपूर्वक अपने मातहत अधिकारियों से  यह कार्य करवाया था जिससे विधि विरूद्ध फोन टेपिंग की कार्यवाई को वैध किया जा सके।
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इस मामले के सामने आने के बाद विशेष पुलिस महानिदेशक मुकेश गुप्ता ने अपने खिलाफ आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी टेलीफोन टैपिंग गृह विभाग से अनुमति ले कर वैधानिक तरीके से किये गये हैं। राज्य के सत्ताधारी दल कांग्रेस के मुताबिक यह लगभग 36 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है जिसमें कई बड़े लोगों का नाम सामने आ सकता है।

गौरतलब है की छत्तीसगढ़ में नान घोटाले का यह मामला तब सामने आया था जब वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने नागरिक आपूर्ति निगम के दफ्तरों में छापे मारे थे। इस दौरान ब्यूरो ने भारी मात्रा में नगद और एक डायरी बरामद की थी। डायरी में कुछ रसूखदार लोगों के नाम थे। बाद में इस मामले में ब्यूरो ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा समेत 18 लोगों को आरोपी बताया था।


राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक नई सरकार के गठन के बाद आरोपी अधिकारी अनिल टुटेजा ने राज्य सरकार से इस मामले में जांच की मांग की थी। उनकी मांगों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से राय मांगी थी, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने इस मामले की एसआईटी से जांच कराने का फैसला किया और बस्तर के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एसआरपी कल्लूरी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया।
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