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भारत के रुख से बिलबिलाया चीन: दो चीनी वाणिज्यिक समूहों ने सरकार से किया आग्रह, बंद की जाएं अनियमित जांच, उत्पादन पर पड़ रहा असर 

Mon, 27 Dec 2021 04:20 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 27 Dec 2021 04:20 AM IST
सार

चाइनीज चैंबर ऑफ कॉमर्स और इंडिया चाइना मोबाइल फोन एंटरप्राइज एसोसिएशन की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, भारत में चीनी मोबाइल फोन कंपनियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
 

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Two Chinese chambers urged Indian govt to change its irregular tax probe practice
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

भारत में चीनी कंपनियों के खिलाफ बन रहे माहौल और सरकार के कड़े रुख का असर अब दिखाई देने लगा है। हाल ही में चीनी वाणिज्यिक समूहों का बयान सामने आया है, जिसमें कंपनियों ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह चीनी कंपनियों के खिलाफ अनियमित जांचों को बंद करे और एक समान व्यापारिक व्यवहार अपनाए। कंपनियों का कहना है कि उन्होंने भारत में तीन अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है और पांच लाख से ज्यादा नौकरियों का सृजन किया है। इसके बावजूद उनके साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। 

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उत्पादन व काम पर पड़ रहा असर
चाइनीज चैंबर ऑफ कॉमर्स और इंडिया चाइना मोबाइल फोन एंटरप्राइज एसोसिएशन की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, भारत में चीनी मोबाइल फोन कंपनियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। भारत सरकार उन पर कई तरह के जुर्माने लगा रही है, साथ ही विभिन्न तरह की जांच भी कर रही है, जिससे उत्पादन पर असर पर पड़ा है।
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कई मोबाइल कंपनियों के खिलाफ हो रही है कार्रवाई
चीनी वाणिज्यिक समूहों का यह बयान तब सामने आया है, जब आयकर विभाग की ओर से ओप्पो, शिओमी, वनप्लस जैसी चीनी मोबाइल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। वाणिज्यिक समूहों द्वारा दिए गए बयान में कहा गया कि भारत में व्यापार आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उन्हें अब यहां के अधिकारियों पर भरोसा नहीं रहा है। इसके साथ ही आर्थिक और व्यापार सहयोग पर भारत की पहल उनके अनुकूल नहीं है। 
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आंकड़ों के मुताबिक, चीनी वित्त पोषित मोबाइल कंपनियां भारत में 2015 से निवेश कर रही हैं। भारत में अब तक 200 से ज्यादा निर्माता व 500 से अधिक चीनी व्यापारिक कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं। इनका कुल निवेश तीन बिलियन डॉलर से अधिक है।

चीन के पांच उत्पादों पर पांच साल तक लगेगा एंटीडंपिंग शुल्क
सरकार ने चीन से आयात होने वाले पांच उत्पादों पर एंटीडंपिग शुल्क लगाने का फैसला किया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने रविवार को बताया कि एल्युमीनियम व रासायनिक उत्पादों पर पांच साल तक एंटीडंपिंग शुल्क वसूला जाएगा।

सीबीआईसी ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि एल्युमीनियम के कुछ उत्पादों, डाई उद्योग में इस्तेमाल होने वाले सोडियम हाइड्रोसल्फाइट, सोलर प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन सीलेंट और रेफ्रिजरेटर में काम आने वाले हाइड्रोफ्लूरोकार्बन (एचएफसी) कंपोनेंट आर-32 व हाइड्रोफ्लूरोकार्बन मिश्रण के आयात पर एंटीडंपिंग शुल्क लगाया है।


इससे जुड़े उद्योग पड़ोसी देश से सस्ती कीमत पर इन रासायनों और उत्पादों का आयात करते थे, जिससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ता है। विदेश व्यापार निदेशालय (डीजीएफटी) की अपील पर वाणिज्य मंत्रालय ने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए आयात पर ज्यादा शुल्क लगा दिया है। 

-सीबीआईसी ने ट्रेलर में इस्तेमाल होने वाले एक्सेल के आयात पर भी एंटीडंपिंग शुल्क लगाया है।
-कैल्क्लाइंड जिप्सम पाउडर के ईरान, ओमान, सऊदी अरब, यूएई से आयात पर पांच साल तक एंटीडंपिंग शुल्क वसूला जाएगा।

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