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Tripura: माणिक साहा ने ली त्रिपुरा के सीएम पद की शपथ, समारोह में पीएम मोदी और अमित शाह मौजूद

Wed, 08 Mar 2023 01:58 PM IST
देव कश्यप एएनआई, अगरतला (त्रिपुरा)
एएनआई, अगरतला (त्रिपुरा) Published by: देव कश्यप Updated Wed, 08 Mar 2023 01:58 PM IST
सार

माणिक साहा ने सोमवार शाम राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य से मुलाकात कर त्रिपुरा में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। शपथ ग्रहण कार्यक्रम अगरतला के स्वामी विवेकानंद मैदान में आयोजित किया गया।

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Tripura Manik Saha take oath as CM Today, PM Modi and Amit Shah attend ceremony know all Live updates
Tripura Cabinet - फोटो : PTI

विस्तार

हाल ही में हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद माणिक साहा को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल मिल गया है। भाजपा विधायक दल की सोमवार को हुई बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी थी। साहा ने बुधवार को दूसरी बार पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

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साहा की नई कैबिनेट में भाजपा के आठ और आईपीएफटी के सदस्य को शपथ दिलाई गई। राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने रतनलाल नाथ, प्राणजीत सिंघा रॉय, सांतना चकमा, टिंकू रॉय और बिकाश देबबर्मा सहित आठ मंत्रियों को भी शपथ दिलाई। इनमें से पांच नए चेहरे हैं, जबकि पहले के मंत्रिमंडल में शामिल रहे चार मंत्रियों को भी नए मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
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त्रिपुरा में नई कैबिनेट के मंत्री
  • रतन लाल नाथ
  • प्राणजीत सिंघा रॉय
  • सांतना चकमा
  • सुशांत चौधरी
  • बिकास देबबर्मा
  • सुधांग्शु दास
  • सुक्ला चरण नोआतिया

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। साहा ने सोमवार शाम राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य से मुलाकात कर त्रिपुरा में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। शपथ ग्रहण कार्यक्रम अगरतला के स्वामी विवेकानंद मैदान में आयोजित किया गया।
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छह मार्च को विधायक दल का नेता चुना गया
इससे पहले सोमवार को भाजपा के सभी नवनिर्वाचित विधायकों की एक बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से विधायक दल के नेता के लिए माणिक साहा का नाम प्रस्तावित किया गया। बैठक के बाद साहा ने ट्वीट किया, विधायक दल के नेता के रूप में मुझे चुनने के लिए मैं सभी का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं। पीएम नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में, हम 'उन्नत त्रिपुरा, श्रेष्ठ त्रिपुरा' बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे और सभी वर्गों के लोगों का कल्याण सुनिश्चित करेंगे।

तीन मार्च को सौंपा था इस्तीफा
माणिक साहा ने शुक्रवार को अगरतला में राजभवन में राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को अपना इस्तीफा सौंपा था। राज्यपाल ने उन्हें नई सरकार के शपथ लेने तक सीएम पद पर बने रहने को कहा था। मीडिया से बात करते हुए साहा ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आठ मार्च को कार्यक्रम में शामिल होंगे।

साहा ने संवाददाताओं से कहा, पिछली बार शपथ ग्रहण समारोह असम राइफल्स ग्राउंड में हुआ था और इस बार यह स्वामी विवेकानंद मैदान में होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह में मौजूद रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी राज्य का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पार्टी के कई अन्य नेताओं के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

बहुमत के साथ सत्ता में लौटी भाजपा
भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर राज्य की सत्ता में वापसी की है। भारत के चुनाव आयोग के अनुसार, त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लगभग 39 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 32 सीटें जीतीं। टिपरा मोथा पार्टी 13 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को 11 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को तीन सीटें मिलीं। इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने एक सीट जीतकर अपना खाता खोलने में कामयाबी हासिल की।


कांग्रेस-वाम दलों ने मिलकर लड़ा था चुनाव
भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए इस बार पूर्वोत्तर में सीपीआई (एम) और कांग्रेस, जो केरल में कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं, एक साथ आए। सीपीआई (एम) और कांग्रेस का संयुक्त वोट शेयर लगभग 33 प्रतिशत रहा। निवर्तमान मुख्यमंत्री साहा ने टाउन बोरडोवली सीट से कांग्रेस के आशीष कुमार साहा को 1,257 मतों के अंतर से हराया। 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में बहुमत के लिए 31 सीटें जरूरी है।

भाजपा ने 2018 से पहले त्रिपुरा में एक भी सीट नहीं जीती थी
भाजपा ने 2018 से पहले त्रिपुरा में एक भी सीट नहीं जीती थी। पिछले चुनाव में आईपीएफटी के साथ गठबंधन में सत्ता में आई थी और 1978 से 35 वर्षों तक सीमावर्ती राज्य में सत्ता में रहे वाम मोर्चे को बेदखल कर दिया था। भाजपा ने 55 सीटों पर और उसकी सहयोगी आईपीएफटी ने छह सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन दोनों सहयोगियों ने गोमती जिले के अम्पीनगर निर्वाचन क्षेत्र में अपने उम्मीदवार उतारे थे।

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