राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पेश होते ही हंगामा शुरू, कल तक के लिए स्थगित
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-संसद के बाहर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह सिर्फ साढ़े तीन क्लॉज का बिल है लेकिन कांग्रेस पार्टी इसे लटकाना चाहती है। लोकसभा में हमारा बहुमत था और वहां रोक नहीं सकती थी इसलिए मजबूरी में समर्थन किया और राज्यसभा में हम अल्पमत में हैं तो वो इसे लटकाना चाहती है।
- प्रसाद ने कहा- आज देश ने कांग्रेस का वो चेहरा देख लिया जो महिलाओं के विरोध में है।
- इससे पूर्व वित्तमंत्री जेटली ने बताया कि क्यों इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी को नहीं भेजा जा सकता, उनके अनुसार तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है, और कोर्ट के दो जजों ने छह महीने के लिए तीन तलाक पर रोक लगाई थी और वो अवधि 22 फरवरी को पूरी हो रही है।
-उस दौरान जज ने कहा था कि हम इसे छह महीने के लिए निलंबित कर रहे हैं और सभी दलों से अनुरोध करते हैं कि इस अवधि में एक पर्याप्त कानून इसके लिए बनाया जाए। इसी वजह से सरकार को यह बिल लाना पड़ा, जेटली ने कहा कि हम सदस्यों से अनुरोध करते हैं कि इस मुद्दे पर जिम्मेदारी भरा रुख दिखाएं।
-वहीं अरुण जेटली की बात पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि वह बिल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे रहे हैं लेकिन मैं उनके रिकार्ड में सुधार करना चाहता हूं जो उन्होंने अल्पसंख्यकों के मामले में आए निर्णय पर कहा है। क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से मैं इस मुद्दे पर वकालत कर रहा हूं।
- आनंद शर्मा के प्रस्ताव पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि बिना किसी सूचना के बिल पर प्रस्ताव रख दिया गया, जबकि इसके लिए 24 घंटे पहले पूर्व नोटिस देना जरूरी होता है।
-जेटली ने कहा ये पूरा देश देख रहा है कि सदन के एक हिस्से में कांग्रेस ने कैसे इस बिल का समर्थन किया और दूसरे सदन में आते ही इसका विरोध शुरू कर दिया।
-रविशंकर प्रसाद ने कहा कि लोकसभा में यह बिल पास करने के बाद भी मुरादाबाद में एक महिला को तीन तलाक देकर बेघर कर दिया गया, इसलिए आज यह बिल वक्त की जरूरत बन चुका है।
-वहीं कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि तीन तलाक बिल को एक स्लैक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। शर्मा ने कमेटी के सदस्यों के नाम भी सुझाए।
- भारी हंगामे के बाद राज्यसभा को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
- बिल पेश करते ही कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया।
- कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल राज्यसभा में पेश किया।
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लोकसभा में बिना किसी बाधा के पास हो गया था तीन तलाक विरोधी बिल
इसके बाद से ही सभी की निगाहें राज्यसभा पर लगी हुई थीं जहां सत्तारूढ़ भाजपा अभी भी अल्पमत में है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस, भाकपा, माकपा, द्रमुक, सपा, बीजद, अन्नाद्रमुक आदि ने विधेयक को लेकर अपनी भावनाओं से राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को पहले ही अवगत करा दिया था।