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राज्यसभा में तीन तलाक बिल की राह नहीं आसान
Thu, 25 Jul 2019 09:49 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 25 Jul 2019 09:49 PM IST
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राज्यसभा में बहुमत के नजदीक पहुंच रहे एनडीए के लिए अभी भी तीन तलाक बिल का रास्ता बहुत आसान नहीं दिख रहा। लोकसभा में तीसरी कोशिश में बृहस्पतिवार को तीन तलाक बिल पास कराने की सफलता के बाद सरकार को राज्यसभा के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
उच्च सदन में भाजपा के पास 78 सीट है और एनडीए के घटक दल मिलाकर यह आंकड़ा 116 पहुंचता है। 48 सीटों वाली कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष के पास कुल 107 सीटें हैं। सरकार के लिए मुश्किल है कि अबतक एनडीए की घटक जदयू तीन तलाक के आपराधिक प्रावधान पर बिल का विरोध कर रही है। जदयू बिल के पक्ष में वोट नहीं करेगी। जदयू की अबतक की योजना है कि वह वोटिंग से समय सदन में अनुपस्थित रहने का विकल्प चुनेगी। ऐसे में एनडीए की ताकत घटकर 110 रह जाएगी।
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इस स्थिति में टीआरएस, बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस जैसे तटस्थ माने जाने वाले दलों का रोल काफी अहम हो जाएगा। इन तीनों दलों के पास 13 सीटें हैं। हालांकि यह तीनों दल भी आपराधिक प्रावधान को लेकर बिल के विरोध में हैं। लेकिन इन्होंने अबतक वोटिंग के संबंध में पत्ते नहीं खोले हैं। उधर 13 सीटों वाली एआईएडीएमके ने भी वोटिंग से दौरान अनुपस्थित रहने का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि सरकार राज्यसभा में तीन तलाक को लेकर समीकरण दुरुस्त करने में जोर शोर से लगी है।
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उच्च सदन में भाजपा के पास 78 सीट है और एनडीए के घटक दल मिलाकर यह आंकड़ा 116 पहुंचता है। 48 सीटों वाली कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष के पास कुल 107 सीटें हैं। सरकार के लिए मुश्किल है कि अबतक एनडीए की घटक जदयू तीन तलाक के आपराधिक प्रावधान पर बिल का विरोध कर रही है। जदयू बिल के पक्ष में वोट नहीं करेगी। जदयू की अबतक की योजना है कि वह वोटिंग से समय सदन में अनुपस्थित रहने का विकल्प चुनेगी। ऐसे में एनडीए की ताकत घटकर 110 रह जाएगी।
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इस स्थिति में टीआरएस, बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस जैसे तटस्थ माने जाने वाले दलों का रोल काफी अहम हो जाएगा। इन तीनों दलों के पास 13 सीटें हैं। हालांकि यह तीनों दल भी आपराधिक प्रावधान को लेकर बिल के विरोध में हैं। लेकिन इन्होंने अबतक वोटिंग के संबंध में पत्ते नहीं खोले हैं। उधर 13 सीटों वाली एआईएडीएमके ने भी वोटिंग से दौरान अनुपस्थित रहने का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि सरकार राज्यसभा में तीन तलाक को लेकर समीकरण दुरुस्त करने में जोर शोर से लगी है।