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घने कोहरे में भी ट्रेनों की रफ्तार को दुरुस्त रखेगा 'त्रिनेत्र'

Fri, 16 Dec 2016 01:24 AM IST
नवनीत शरण/ अमर उजाला, नई दिल्ली
नवनीत शरण/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Dec 2016 01:24 AM IST
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'Trinetra'  will fix the speed of the trains in dense fog

घने कोहरे के लिए रेल यातायात और ट्रेनों की रफ्तार को दुरुस्त रखने के लिए रेलवे को त्रिनेत्र यंत्र के सफल परीक्षण का इंतजार है। दावा किया जा रहा है कि इसकी सफलता से घने कोहरे में ट्रेन 30 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेगी। यह यंत्र हाई रेजोल्यूशन ऑप्टिकल वीडियो कैमरा, हाई सेंसेटिव इंफ्रारेड वीडियो कैमरा से निर्मित है।

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इसकी खासियत यह है कि रडार आधारित मैपिंग सिस्टम प्रणाली से लैस है जो घने कोहरे में भी ट्रेन के ड्राइवरों को बेहतर दृश्यता उपलब्ध कराएगी। हालांकि इसके दो परीक्षण सफल होने के बाद तीसरा परीक्षण साथ नहीं दे रहा है, जिसके कारण ट्रायल के दौरान लोको पायलटों को सामने पड़ी वस्तुओं की दूरी भांपने में मुश्किल हो रही है।
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रेलवे ने दावा किया है कि घने कोहरे में भी त्रिनेत्र डिवाइस बेहतर दृश्यता प्रदान करेगी। इसके तीनों संघटक चालक के तीन नेत्रों की तरह काम करेंगे। कैद तस्वीरों के संयोजन से खराब मौसम में भी चालकों को कंप्यूटर मॉनीटर के डिस्प्ले से रास्ते की जानकारी होगी। 

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त्रिनेत्र से घने कोहरे में भी ट्रेन 30 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलेगी

'Trinetra'  will fix the speed of the trains in dense fog

कोहरे, भारी बारिश, अंधेरी रात के दौरान भी लोकोमोटिव पायलटों को ट्रैक पर फंसे वाहनों, पेड़ों, बोल्डरों की जानकारी देगा। चालक को यह सूचना भी मिलेगी कि स्टेशन या सिग्नल के पास ट्रेन पहुंच रही है। इस डिवाइस से घने कोहरे में भी ट्रेन 30 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलेगी। अभी घने कोहरे में ट्रेन 8-10 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से रेंगती है।
 
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को इस डिवाइस का फाइनल ट्रायल रन होना है। एक करोड़ की लागत वाले इस यंत्र में सिर्फ एक कमी महसूस की गई है। दृश्यता तो साफ है, लेकिन लोको पायलट सामने पड़ी वस्तु या सिग्नल कितनी दूरी पर है, इसका अंदाजा नहीं लगा पा रहा है। जिस तरह से कार में बैठा व्यक्ति रियर व्यू मिरर से पीछे आने वाले वाहनों की दूरी भांप लेता है। इसी की कमी महसूस की जा रही है। 

उन्होंने बताया कि अगले ट्रायल में इसे भी ठीक कर लिया जाएगा। इसके बाद पांच हजार ट्रेनों में इसे लगा दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया है कि इसी मौसम में इसे सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाएगा। यह विश्व का इकलौता डिवाइस होगा जो भारत में निर्मित किया जा रहा है। 

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