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ट्रेन हादसाः कुछ इंच दूर तड़पती रही बेटी, सिसकता रहा बाप, नहीं बचा सका जान

Wed, 23 Nov 2016 01:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 Nov 2016 01:17 PM IST
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Tragic story of kanpur train accident
- फोटो : amar ujala

कानपुर के पुखरायां में हुए ट्रेन हादसे के बाद एक से एक दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं, कुछ ऐसी जो दिलों को झकझोर दें तो कुछ ऐसी जिन्हें पढ़ते पढ़ते आंखे नम हो जाएं। बेबसी और दर्द की ऐसी ही कहानी है भोपाल निवासी सत्येंद्र सिंह की। बेटी और पत्नी के साथ हंसते ‌खेलते सत्येंद्र बिहार के हाजीपुर में में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए निकले थे।

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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार पत्नी की मौत हादसे में हो गई और बेटी उनसे कुछ इंच दूर उनकी आंखों के सामने दम तोड़ गई लेकिन बेबस पिता कुछ नहीं कर पाया। 55 साल के सत्येंद्र बताते हैं कि उनकी बेटी रागिनी चिल्ला रही थी "...पापा बचाओ... कोई है? प्लीज... बचाओ"।
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आंखों में आए आंसुओं को पोंछते हुए सत्येंद्र उस मनहूस हादसे के बारे में बताते हैं जब कुछ पलों में ही उनकी दुनिया उनकी आंखों के सामने उजड़ गई। दिल्‍ली में काम करने वाले सत्येन्द्र के बेटे अजय ने बताया कि उनके माता पिता और बहन बिहार के हाजीपुर में एक शादी में शिरकत करने के लिए निकले थे।

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सीटों के बीच में फंसकर दम तोड़ गई पत्नी और बेटी

Tragic story of kanpur train accident

वे इंदौर पटना एक्सप्रेस ट्रेन के B3 कोच में सवार थे। ऊपर वाली बर्थ पर सत्येंद्र सोए हुए थे, बीच वाली पर उनकी पत्नी गीता और सबसे नीचे वाली सीट पर उनकी बेटी रागिनी। अजय बताते हैं जब हादसा हुआ तब पापा सोए हुए थे, कुछ ही सेकेंडों में सबकुछ तहस नहस हो गया। हादसे के तुरंत बाद दो सीटों के बीच में फंसकर मां ने तुरंत दम तोड़ दिया।

अजय बताते हैं कि पापा को कुछ देर बाद ही रागिनी दीदी के कराहने की आवाज सुनाई दी वह चिल्ला रही थी "पापा... बचाओ हेल्प।" लेकिन उनसे कुछ इंच दूर होने के बाद भी वो बेबस थे। सीटों के बीच में फंसे होने तक न वह दीदी तक पहुंच सकते थे न उनकी कुछ मदद करने में सक्षम थे।

कुछ देर बाद ही दीदी ने भी दम तोड़ दिया। अजय के अनुसार उन्हें अगले दिन सुबह इस घटना के बारे में पता चला। उसने पिता को फोन किया। अजय के अनुसार पिता ने उसे बताया कि फोन की घंटी की आवाज उन्हें सुनाई दे रही ‌थी लेकिन उनकी उंगलियां हिलने डुलने की स्थिति में नहीं थीं।

मृतक पत्नी की मांग में भरा सिंदूर, बेटी के सर पर हाथ रखकर दिया अंतिम आशीर्वाद

Tragic story of kanpur train accident
अजय ने बताया कि उनके पिता को पता था कि दीदी और मां यहां फंसे हुए हैं लेकिन वह कुछ भी नहीं कर सकते थे। सही बात तो ये है कि उन्हें भी पता नहीं था कि उस डिब्बे में वह अकेले हैं जो जिंदा बचे हैं। इसी बीच दीदी के चीखने की आवाज भी आनी बंदी हो गई।

हालांकि मौके पर पहुंचे बचाव दल ने उनकी जान बचा ली, इसके बाद उन्हें एंबुलेंस के द्वारा कानपुर से भोपाल लाया गया। हां अपने घर के बाहर गली में स्ट्रेचर पर पड़े सत्येंद्र के बरबर में ही उनकी बेटी और
पत्नी के शव पड़े थे।

वह नजारा बड़ा दर्दनाक था जब सत्येंद्र ने अपने हाथों से अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाया जो इस बात की निशानी था कि वो सुहागन मरी हैं। इसके बाद वह बाएं मुड़े और बेटी के शव पर अंतिम आशीर्वाद के रूप में अपना हाथ रखा। इसके बाद सैकडों लोगों की भीड़ के बीच दोनों शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया और सत्येंद्र को इलाज के लिए वापस अस्पताल। जहां उनकी टूटी टांग की सर्जरी की जानी है।
 
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