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PM Modi Podcast: 'झूठी धारणा बना छवि खराब करने की कोशिश की गई', गोधरा कांड से लेकर गुजरात दंगों तक बोले पीएम

Sun, 16 Mar 2025 08:02 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 16 Mar 2025 08:02 PM IST
सार

PM Modi Podcast: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोधरा कांड को 'कल्पना से परे एक त्रासदी' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि 2002 के बाद गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ, क्योंकि उनकी सरकार ने विकास और शांति पर ध्यान केंद्रित किया।

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"Tragedy of unimaginable magnitude": PM Modi on Godhra train burning
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : एक्स/लेक्स फ्रिडमैन

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने रविवार को अमेरिका के प्रसिद्ध पॉडकास्ट होस्ट लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में 2002 के गोधरा कांड पर अपनी राय रखी। प्रधानमंत्री ने इसे 'कल्पना से परे एक त्रासदी' बताया और कहा कि यह घटना तब हुई थी, जब वह बजट सत्र के दौरान गुजरात विधानसभा में बैठे हुए थे। गोधरा में ट्रेन में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। 

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'हर कोई शांति से रहना चाहता है...'
उन्होंने कहा, 'मैं 24 फरवरी को पहली बार विधायक (एमएलए) बना था। एक चुनाव हुआ और मैं जन प्रतिनिधि बना और मैंने पहली बार गुजरात विधानसभा में कदम रखा। 27 फरवरी 2002 को विधानसभा में बजट सत्र था..हम सदन में बैठे हुए थे..उसी दिन, यानी मुझे एमएलए बने अभी तीन दिन हुए थे, गोधरा की घटना हो गई। भयंकर घटना थी। लोगों को जिंदा जला दिया गया था। आप कल्पना कर सकते हैं कि कंधार का विमान अपहरण कहो या संसद पर हमला कहो, 9/11 हमला कहो ..ये सारी घटनाएं बैकग्राउंड में चल रही थी और उसी इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मर जाना..जिंदा जला देना... आप कल्पना कर सकते हैं कि स्थिति कैसी रही होगी। कुछ भी नहीं होना चाहिए। हम भी चाहते हैं। हर कोई यही चाहेगा। शांति रहनी चाहिए।'

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'सबसे बड़े नहीं थे 2002 के गुजरात दंगे'
प्रधानमंत्री ने गुजरात में पहले हुई हिंसा के इतिहास के बारे में बात करते हुए काह कि 2002 के दंगे सबसे बड़े नहीं थे, क्योंकि गुजरात में इससे पहले भी कई छोटी-छोटी घटनाओं के कारण सांप्रदायिक हिंसा होती थी। उन्होंने कहा, गुजरात में 1969 के दंगों में छह महीने तक हिंसा हुई थी और इससे पहले ढआई सौ से अधिक बड़े दंगे हुए थे।उन्होंने कहा, यह कहना कि ये अब तक के सबसे बड़े दंगे थे, गलत सूचना है। अगर आप 2002 से पहले के आंकड़ों की समीक्षा करेंगे, तो आप देखेंगे कि गुजरात में लगातार दंगे हुए। कहीं न कहीं लगातार कर्फ्यू लगाया जा रहा था। पतंगबाजी प्रतियोगिता या साइकिल से मामूली टक्कर जैसी मामूली घठनाओं पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती थी। 2002 से पहले गुजरात में ढाई सौ से अधिक बड़े दंगे हुए। 1969 में दंगे करीब छह महीने तक चले। इसलिए, मेरे पिक्चर में आने से बहुत पहले से एक लंबा इतिहास है। 


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'न्यायपालिका ने दोषियों को जिम्मेदार ठहराया'
गोधरा ट्रेन अग्निकांड ने कुछ लोगों को हिंसा की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तब केंद्र में बैठे उनके विरोधियों ने उनकी सरकार पर आरोप लगाने की कोशिश की। हालांकि, उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने स्थिति का विश्लेषण करने के बाद उन्हें निर्दोष पाया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, 2002 में हुई दुखद घटना ने लोगों को हिंसा की ओर धकेल दिया। फिर न्यायपालिका ने मामले की गहन जांच की। उस समय हमारे राजनीति विरोधी सत्ता में थे और स्वाभाविक रूप से वे चाहते थे कि हमारे खिलाफ सभी आरोप सही साबित हों। उनके अथक प्रयासों के बावजूद न्यायपालिका ने दो बार स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया और आखिरकार हमें पूरी तरह से निर्दोष पाया। जो लोग वास्तव में जिम्मेदार थे, उन्होंने अदालतों ने जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 2002 के बाद गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका गृह राज्य पूरी तरह से शांतिपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि उनकी सरकार मंत्री सबका विकास पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात ने अब तुष्टिकरण की राजनीति को छोड़कर विकास की राजनीति को अपनाया है, जिससे आज राज्य एक विकसित भारत बनाने में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।

गोधरा ट्रेन अग्निकांड में हुई थी 59 लोगों की मौत
गोधरा ट्रेन जलाने की घटना 27 फरवरी, 2002 को हुई थी, जब साबरमती एक्सप्रेस को एक भीड़ ने आग लगा दी थी, जिससे 59 लोग मारे गए थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद राज्य में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। 2011 में विशेष अदालत ने गोधरा ट्रेन अग्निकांड से जुड़े 31 लोगों को दोषी ठहराया था और 2014 में गुजरात उच्च न्यायालय ने 11 दोषियों की सजा को बरकरार रखते हुए 20 लोगों को बरी कर दिया। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को मंजूरी दी।

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