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Top Bureaucrats Extension: ये चार नौकरशाह हैं केंद्र के संकटमोचक! सरकार दे रही इन्हें बार-बार सेवा विस्तार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 22 Nov 2022 10:04 AM IST
सार

Top Bureaucrats Extension: राजीव गौबा को लगातार दूसरी बार 2023 तक सेवा विस्तार मिला है। अजय कुमार भल्ला को नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन अब उन्हें तीसरा सेवा विस्तार मिला है। रॉ प्रमुख सामंत गोयल को पहले 2021 में एक वर्ष का एक्सटेंशन दिया गया। उसके बाद उनका कार्यकाल एक साल यानी 30 जून 2023 तक बढ़ा दिया गया...

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Top Bureaucrats Extension These 4 Top Central Government Favorite Bureaucrats Are Getting Govt Services
Top Bureaucrats Extension: सामंत गोयल, अजय भल्ला, राजीव गौबा और संजय मिश्रा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्र सरकार में चार टॉप नौकरशाह ऐसे हैं, जिन्हें बार-बार सेवा विस्तार मिल रहा है। मुसीबत के समय इन्हें सरकार का संकटमोचक माना जाता है। इनमें कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, रॉ चीफ सामंत गोयल और ईडी निदेशक संजय मिश्रा शामिल है। गौबा को लगातार दूसरी बार एक वर्ष यानी 2023 तक सेवा विस्तार मिला है। अजय कुमार भल्ला को नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन अब उन्हें तीसरा सेवा विस्तार मिला है। वे 2023 तक केंद्रीय गृह सचिव बने रहेंगे। रॉ प्रमुख सामंत गोयल को पहले 2021 में एक वर्ष का एक्सटेंशन दिया गया। उसके बाद 2022 में भी कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनका कार्यकाल एक साल यानी 30 जून 2023 तक बढ़ा दिया है। इसके बाद नंबर आता है ईडी निदेशक संजय मिश्रा का। इन्हें नवंबर 2018 में दो वर्ष की अवधि के लिए जांच एजेंसी का प्रमुख बनाया गया था। अब इन्हें जो सेवा विस्तार मिला है, उसके तहत वे अगले वर्ष तक ईडी निदेशक बने रहेंगे।

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राजीव गौबा, कैबिनेट सचिव

झारखंड कैडर के 1982 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा को 2019 में दो साल के लिए देश का शीर्ष नौकरशाह यानी कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया था। उसके बाद 2021 में राजीव गौबा को केंद्र सरकार ने एक साल का सेवा विस्तार दे दिया। अगस्त 2022 में उन्हें दोबारा से एक साल का सेवा विस्तार प्रदान किया गया है। केंद्र सरकार के कई फैसलों में गौबा की अहम भूमिका बताई जाती है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम का मसौदा तैयार करने में कैबिनेट सचिव गौबा का प्रमुख रोल रहा था। इसी मसौदे के आधार पर केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जेएंडके और लद्दाख में विभाजित किया गया। उन्हें केंद्रीय सचिवालय, पीएमओ और विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में खासी महारत हासिल है। केंद्र सरकार में ज्वाइन करने से पहले उन्होंने, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

अजय कुमार भल्ला, केंद्रीय गृह सचिव

1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के असम-मेघालय कैडर के आईएएस अधिकारी अजय कुमार भल्ला को अगस्त 2019 में केंद्रीय गृह सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर भल्ला को नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2020 में उन्हें एक साल का सेवा विस्तार देकर उनका कार्यकाल 22 अगस्त 2021 तक बढ़ा दिया। इस साल अगस्त में उन्हें तीसरा सेवा विस्तार मिला। वे अगस्त 2023 तक केंद्रीय गृह सचिव के पद पर काम करते रहेंगे। भल्ला के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व के कई मामलों में केंद्र सरकार को ट्रैक से नहीं उतरने दिया। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद की स्थिति, आतंकवाद से निपटना, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की प्रभावी तैनाती और उत्तर पूर्व में सक्रिय रहे विभिन्न उग्रवादी समूहों से हथियार डलवा कर शांति समझौते कराना, उनके कार्यकाल की खास उपलब्धियां रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों का राज्य सरकारों के साथ टकराव, इस तरह के मामले सुलझाने में भी अजय भल्ला ने खासी तेजी दिखाई।

सामंत गोयल, चीफ 'रिसर्च एंड एनालिसिस' विंग

1984 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी सामंत गोयल को 2019 में 'रॉ' चीफ बनाया गया था। दो साल पूरे होने से पहले ही सामंत गोयल का कार्यकाल, एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बाद 2022 में भी कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने सामंत गोयल का कार्यकाल एक साल यानी 30 जून 2023 तक बढ़ा दिया है। गोयल को खुफिया मामलों का खास जानकार बताया जाता है। लंबे समय बाद रॉ में किसी चीफ को चार साल तक सेवा करने का अवसर मिला है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विश्वस्त माना जाता है। गोयल ने पिछले दशक में कई अहम जिम्मेदारियों का निवर्हन किया था। रॉ के लंदन स्टेशन पर काम करना या पाकिस्तान के आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई, इनमें गोयल को खासी महारत हासिल रही है। एक बार लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद, भारतीय खुफिया एजेंसी के बहुत करीब से बच निकला था। हालांकि वह एक खुफिया मिशन था, इसलिए उसकी किसी ने पुष्टि नहीं की। पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जो एयरस्ट्राइक की थी, उसकी पूरी प्लानिंग भी सामंत गोयल ने ही की थी। उन्होंने पीएमओ, एनएसए और एनटीआरओ के साथ मिलकर आपरेशन का खाका तैयार किया था।

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संजय मिश्रा: निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जिसके नाम से अब देश का सामान्य नागरिक भी परिचित है। विपक्षी दलों की ओर से जहां पहले सीबीआई का नाम लेकर केंद्र सरकार को घेरा जाता था, अब वह जगह काफी हद तक ईडी ने ले ली है। अब आए दिन विपक्षी नेताओं की जुबान पर ईडी का नाम रहता है। पिछले दिनों सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेता ईडी के सामने पेश हुए थे। अन्य विपक्षी दलों के कई नेता, ईडी के मामले में सलाखों के पीछे जा चुके हैं। मौजूदा ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा, आयकर कैडर के 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा 'आईआरएस' के अधिकारी हैं, को नवंबर 2018 में दो वर्ष की अवधि के लिए जांच एजेंसी का प्रमुख बनाया गया था। नवंबर 2020 में उन्हें एक साल का सेवा विस्तार मिल गया। भारत सरकार ने उनके नियुक्ति पत्र में संशोधन कर ईडी निदेशक के दो साल के कार्यकाल को बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया।

संजय मिश्रा को 2021 में मिला था दूसरा सेवा विस्तार

2021 में दोबारा से उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दिया गया। हालांकि गत वर्ष केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए ईडी और सीबीआई के निदेशकों का कार्यकाल दो साल की अनिवार्य अवधि के बाद तीन वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान कर दिया। पिछले दिनों संजय मिश्रा का कार्यकाल तीसरी बार एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया। यानी अब वे नवंबर 2023 तक ईडी निदेशक के पद पर बने रहेंगे। बतौर ईडी निदेशक, संजय मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जा चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख का कार्यकाल, सार्वजनिक हित में कई संवेदनशील मामलों में जांच की निरंतरता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दो साल से बढ़ाकर पांच साल तक करने का प्रावधान किया गया है।

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क्या इतना लंबा सेवा विस्तार देना सही है

कैबिनेट सचिवालय से सेक्रेटरी 'सिक्योरिटी' के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद कहते हैं, नियमों के मुताबिक एक्सटेंशन नहीं दिया जाना चाहिए। देश में ऐसा कौन सा आपातकाल है कि जिसके चलते सरकार को ट्रांसफर पोस्टिंग करने का समय नहीं मिला। रिटायरमेंट पर बैठे किसी नौकरशाह को सेवा विस्तार देते हैं, तो उसकी जगह आने का इंतजार कर रहे व्यक्ति के हित प्रभावित होते हैं। ऐसे में कई लोगों की वरिष्ठता खत्म हो जाती है। ऐसे नौकरशाह, सरकार की ओर से मुआवजे के हकदार हैं। इनसे पहले रॉ चीफ रहे अनिल धस्माना और आईबी प्रमुख राजीव जैन को भी छह-छह माह का सेवा विस्तार दिया गया था। उसके बाद दोनों प्रमुखों को एक साथ ही एक-एक साल का एक्सटेंशन मिला था। बतौर आजाद, सरकार सेवा विस्तार किस लिए देती है। क्या उस नौकरशाह के जैसा कोई दूसरा अफसर देश में नहीं है। देश में ऐसी क्या स्थिति बनी है कि जिसमें सरकार के पास इस तरह की अहम पोस्टिंग करने के लिए समय ही नहीं है। कोई गंभीर खतरा है, लड़ाई चल रही है या कोई दूसरी विषम परिस्थिति है। ऐसा तो कुछ नहीं है। जब ऐसी कोई स्थिति नहीं है तो एक्सटेंशन देने का औचित्य भी नहीं बनता।

किसी के हित प्रभावित होंगे, यह लाजिमी है

बतौर यशोवर्धन आजाद, जब किसी एक नौकरशाह को सेवा विस्तार मिलता है, तो उसकी वजह से किसी के हित तो प्रभावित होंगे ही, यह लाजिमी है। क्या राजनीतिक स्वार्थों के चलते एक्सटेंशन मिल रहा है। नौकरशाह का अपना कोई हित है। ऐसा कोई तो कारण अवश्य है। प्रजातंत्र में लोगों को यह जानने का अधिकार है कि किसी व्यक्ति को एक्सटेंशन मिला है, तो उसके पीछे क्या कारण हैं। उस व्यक्ति में कोई खास प्रतिभा है। वह राज लोगों के सामने आना चाहिए। सरकार छिपाती क्यों है। देश के लोगों को संबंधित नौकरशाह की प्रतिभा जानने का हक है। खासतौर से उस देश में, जिसे सूचना प्रणाली के मामले में एक गढ़ माना गया है। 2005 में बने आरटीआई एक्ट को विश्व का सशक्त कानून कहा जाता है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए। लोगों को एक्सटेंशन का राज पता होना चाहिए। नौकरशाहों को लोगों के टैक्स से वेतन मिलता है, इसलिए उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि किस अधिकारी को सरकार क्यों सेवा विस्तार दे रही है। इसमें तो कुछ गलत भी नहीं है।

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