गडकरी ने की नेहरू की प्रशंसा, बोले - सहिष्णुता देश की सबसे बड़ी पूंजी
- अपने भाषण में विवेकानंद, नेहरु और वाजपेयी को किया याद
- कहा- किसी समस्या का हल नहीं दे सकते तो हमें समस्या का हिस्सा भी नहीं बनना चाहिए
- 2014 के बाद से अटके हुए 403 प्रोजेक्टों को दी हरी झंडी
- कहा- आप विद्वान हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि लोग आपको वोट दें।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हमेशा से ही अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं। इन दिनों भी वह अपने काम के अलावा बयानों को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। दो दिन पहले ही सूचना प्रसारण के सालाना लेक्चर में उन्होंने कहा था अगर मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं और मेरे सांसद-विधायक अच्छा काम नहीं कर रहे हैं तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? मैं।
खुफिया विभाग (IB) अधिकारियों को संबोधित करते हुए गडकरी ने नेहरु को याद करते हुए कहा कि सहिष्णुता भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा नेहरु ने कहा था कि भारत एक देश नहीं बल्कि आबादी है। अगर हम किसी समस्या का हल नहीं दे सकते तो हमें समस्या का हिस्सा भी नहीं बनना चाहिए।
#WATCH Nitin Gadkari: JL Nehru kehte the, "India is not a nation, it is a population. Iss desh ka har vyakti desh ke liye prashn hai, samasya hai." Unke yeh bhashn mujhe bahut pasand hain. Toh main itna toh kar sakta hun ki main desh ke saamne samasya nahi rahunga. (24.12) pic.twitter.com/i3QzoqwrLk
— ANI (@ANI) December 25, 2018
सड़क, ट्रांसपोर्ट और हाईवे मंत्री गडकरी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सहिष्णुता हमारे सिस्टम कि सबसे बड़ी पूंजी है और यह मानसिकता ठीक नहीं कि किसी ने ऐसा किया तो मैं भी ऐसा ही करूंगा।
बता दें कि पिछले सप्ताह अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी सहिष्णुता को लेकर बयान दिया था जिसके बाद एक नया विवाद छिड़ गया था। उन्होंने कहा था कि मैं अपने बच्चों को लेकर चिंतित हूं, वह किसी धर्म विशेष के नहीं हैं। कल को अगर कोई भीड़ उन्हें घेरकर पूछेगी कि तुम हिंदू हो या मुस्लिम, उनके पास कोई जवाब नहीं होगा।
तकरीबन एक घंटे तक बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्वामी विवेकानंद को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता भारत कि विशेषता है। उन्होंने कहा कि आप सबसे विनम्रता से बात करते है, अच्छा बोलते हैं। यह लोगों को आकर्षित करेगा मगर इससे आप चुनाव नहीं जीत सकते। आप विद्वान हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि लोग आपको वोट दें। जिन्हें लगता है कि वह सबकुछ जानते हैं, उनकी सोच गलत है। आत्मविश्वास और अहंकार में अंतर है। आपको आत्मविश्वासी होना चाहिए, लेकिन अहंकार से बचना चाहिए।
सरकारे आएंगी, जाएंगी पर देश रहेगा
जहाजरानी और गंगा मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे गडकरी ने कहा कि चुनाव जीतना अच्छा है मगर चुनाव जीतकर अगर आओ लोगों के जीवन स्तर में बदलाव नहीं ला सकते तो हमारे सत्ता में आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जब मैंने 2014 में अपने मंत्रालय का कार्यभार संभाला था तो 3.85 लाख करोड़ के 403 प्रोजेक्ट अटके थे। हमनें कैबिनेट में 22 फैसले लिए और 95 फीसदी प्रोजेक्ट जो पर्यावरण, सुरक्षा या भूमि अधिग्रहण के क्लीयरेंस के बिना रुके थे उन्हें हरी झंडी मिल गई।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारे आएंगी, जाएंगी पर देश रहेगा। यह देश किसी पार्टी का नही बल्कि 130 करोड़ भारतीयों का है।