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जानिए गूगल का डूडल क्यों है खास, आंकड़ों के जादूगर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती आज

Fri, 29 Jun 2018 09:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 29 Jun 2018 09:48 AM IST
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today Statistics Day  Indian scientist P. C. Mahalanobis applied statistician
prasanta chandra mahalanobis

गूगल ने महान वैज्ञानिक और प्रसिद्ध सांख्यिकीविद प्रशांत चंद्र महालनोबिस के 125वें जन्मदिन पर बेहद खास डूडल बनाकर उन्हें याद किया है। वैज्ञानिक महालनोबिस को प्रसिद्ध सिद्धांत महालनोबिस डिसटेंस के लिए भी जाना जाता है। जहां एक तरफ गूगल ने डूडल बनाकर वैज्ञानिक महालनोबिस को याद किया है वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार भी इस महान वैज्ञानिक की जयंती को कुछ खास अंदाज में मना रही है।

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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इस साल सांख्यिकी दिवस की थीम ‘आधिकारिक सांख्यिकी में गुणवत्ता विश्वास‘ रखी है। केंद्र सरकार ने 2007 में हर साल 29 जून को सांख्यिकी दिवस के रूप में मानने का ऐलान किया था।
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दरअसल महान वैज्ञानिक महालनोबिस की जयंती को सांख्यिकी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और इस मौके पर आज उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू 125 रुपए का सिक्का जारी करेंगे। इसके साथ ही 5 रुपए का भी नया सिक्का जारी किया जाएगा।

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महान वैज्ञानिक महालनोबिस सांख्यिकीविद तो थे ही, साथ ही वह स्वतंत्र भारत के पहले प्लानिंग कमीशन के सदस्य भी थे। सांख्यिकी दिवस मनाने का मकसद लोगों को सामाजिक-आर्थिक योजनाओं और नीति निर्माण में सांख्यिकी के महत्व के बारे में जागरूक करना है।


 

ऐसा था महालनोबिस का परिवार

वैज्ञानिक महालनोबिस का जन्म 29 जून 1893 को कोलकाता में बंगाली परिवार में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ब्राम्हो बॉयज स्कूल कोलकाता में की थी जबकि आगे की पढ़ाई उन्होंने युनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पूरी की थी। महालनोबिस सुधारवादी और बुद्धिजीवियों के परिवार में जन्में थे। उनके दादा गुरुचरण एक दवाइयों की दुकान चलाते थे और उनके पिता प्रबोध चंद्र महालनोबिस ब्रह्मों समाज से ताल्लुक रखते थे। उनकी माता निरोदबसिनी भी बंगाल के एक पढ़े-लिखे कुल से संबंध रखती थीं।


महालनोबिस ने ही रखी थी भारत में सांख्यिकी संस्थान की नींव
भारत में साल 17 दिसम्बर 1931 को भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना हुई और 28 अप्रैल 1932 को औपचारिक तौर पर पंजीकरण कराया गया था। उन्होंने भारत में सांख्यिकी संस्थान की स्थापना प्रमाथ नाथ बनर्जी, निखिल रंजन सेन और सर आर एन मुखर्जी के साथ की थी। कोलकाता के बाद इसकी कई शाखाएं देश के अलग-अलग राज्यों में शुरू की गईं। भारतीय सांख्यिकी संस्थान की शाखाएं दिल्ली, बैंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कोयंबटूर, चेन्नई, गिरिडीह सहित भारत के दस स्थानों में हैं। हालांकि मुख्य रूप से कोलकाता में ही सांख्यिकी की पढ़ाई होती है।

पेश की थी पायलट सर्वेक्षण की अवधारणा
प्रशांत महालनोबिस को उनके सर्वेक्षण आयोजित करने में दिए गए योगदान के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने ही पायलट सर्वेक्षण की अवधारणा पेश की थी। इतना ही नहीं उन्होंने सर्वे से पहले सैंपल लेने की व्यवस्था से भी लोगों को परिचित किया। इसके आधार पर आज के युग में बड़ी-बड़ी नीतियां और योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने सांख्यिकीय नमूनाकरण का उपयोग करके फसल पैदावार के आकलन के लिए एक विधि भी पेश की है। योजना आयोग के सदस्य के तौर पर उन्होंने दूसरी पंचवर्षीय योजना में औद्योगिकीकरण के लिए भारत की रणनीति तैयार की थी।

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