पहल : देश में कुपोषण का मर्ज मिटाने की ‘दवा’ फोर्टिफाइड चावल, यहां जानें इसके बारे में सबकुछ
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल लाल किले से इसका एलान किया था। यहां जानिए फोर्टिफाइड चावल की अहमियत, इसके बनने-बंटने से जुड़े सारे पहलू और यह कैसे दूर करेगा कुपोषण...।
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कुपोषण शरीर ही नहीं, देश के विकास में भी बड़ी बाधा है। इसे दूर करने के लिए समय-समय पर सरकारों ने गरीबों को पोषक तत्व युक्त भोजन मुहैया कराने की कई पहल की हैं। इसी दिशा में मौजूदा सरकार ने राशन दुकानों, मिड-डे मील समेत 2024 तक आने वाली विभिन्न योजनाओं के तहत देश में कुपोषण रोकथाम के लिए फोर्टिफाइड चावल बांटने का कदम उठाया है।
पहला चरण इसी महीने
अतिरिक्त पोषण युक्त चावल वितरण का पहला चरण इसी महीने से कुछ राज्यों में शुरू किया जाएगा। सरकार एफसीआई और राज्यों की एजेंसियों से अतिरिक्त पोषण वाला 88.65 लाख टन चावल खरीद चुकी है।
ऐसे तैयार होता है फोर्टिफाइड चावल
भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) कहता है, सामान्य चावल में पेोषक तत्व डाले जाने से चावल फोर्टिफाइड हो जाता है। यह सूक्ष्म पोषक तत्व लोगों की आहार जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मिलाए जाते हैं।
इसलिए पड़ी एफआरके की जरूरत
भारत में महिला-बच्चों में कुपोषण का स्तर बहुत अधिक है। इसकी वजह से हर दूसरी भारतीय महिला रक्त की कमी (एनिमिया) से पीड़ित है और हर तीसरा बच्चा बौना है। वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) में भारत 107 देशों में 94वें पायदान पर है। ऐसे में भोजन में पोषक तत्व मिलाकर कुपोषितों तक पोषण पहुंचाना बहुत जरूरी है। यह कुपोषण से लड़ने का एक उपयुक्त तरीका है।
इन सात देशों में पहले से अनिवार्य
अमेरिका, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, पापुआ न्यू गिनीआ, फिलीपींस और सोलोमन आइलैंड ने फोर्टिफाइड चावल अनिवार्य कर रखा है।
इसकी क्या है तकनीक, कैसे करती है काम
- दुनियाभर में विभिन्न तकनीक प्रचलित हैं। जैसे कोटिंग और डस्टिंग। भारत में फोर्टिफिकेशन के लिए एक्सट्रूजन (बहिर्वेधन) सबसे बेहतर तकनीक है।
- सबसे पहले सूखे चावल के आटे को सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण में डाला जाता है और फिर पानी मिला देते हैं। इससे बने मिश्रण को मशीनों में गर्म कर चावल जैसे आकार के दाने (एफआरके - फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स) तैयार किए जाते हैं।
- इसके बाद दानों को ठंडाकर सुखाया जाता है और फिर इस्तेमाल के लिए पैक कर दिया जाता है। इन एफआरके की उपभोग अवधि पैकिंग से 12 महीने तक होती है।
60 पैसे प्रति किलो खर्च
मंत्रालय का अनुमान है कि आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 युक्त एफआरके तैयार करने का खर्च 60 पैसे प्रति किलो आएगा, जिसे केंद्र व राज्य दोनों वहन करेंगे।
एक किलो फोर्टिफाइड चावल में इतना पोषण
एक किलो फोर्टिफाइड चावल में आयरन (28-42.5 मिलीग्राम), फोलिक एसिड (75-125 माइक्रोग्राम), विटामिन बी-12 (0.75-1.25 माइक्रोग्राम) होता है। जिंक (10-15 मिलीग्राम), विटामिन ए (500-750 माइक्रोग्राम आरई), विटामिन बी-1 (1-1.5 मिलीग्राम), विटामिन बी-2 (1.25-1.75 मिलीग्राम), विटामिन बी-3 (12.5-20 मिलीग्राम) और विटामिन बी -6 (1.5-2.5 मिलीग्राम) मिलाकर भी उसे फोर्टिफाइड किया जा सकता है।
15 राज्यों में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
2019-20 में ‘चावल का फोर्टिफिकेशन और वितरण’ की केंद्र पोषित योजना तीन साल के लिए शुरू की गई थी। यह 15 राज्यों के 15 जिलों में चला। महाराष्ट्र और गुजरात समेत छह राज्यों ने इस प्रोजेक्ट के तहत एफआरके का वितरण शुरू कर दिया है। जून 2021 तक 2.03 लाख टन फोर्टिफाइड चावल वितरित किया जा चुका है।
ऐसे पहचानें एफआरके
फोर्टिफाइड चावल की पैकिंग जूट (पटसन) के थैलों में की जाएगी, जिस पर +एफ का निशान बना होगा, जिसे देखकर लोग इसकी आसानी से पहचान कर पाएंगे।