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बैंकों में खाता खोलने के लिए देश भर में शिविर
शिशिर चौरसिया/ नई दिल्ली
Updated Tue, 29 Nov 2016 10:42 PM IST
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- फोटो : dig vishal
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नरेंद्र मोदी सरकार 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने के बाद अब समाज के हर तबके के लोगों को बैंक खाता खुलवाने के लिए सक्रिय हो गई है। इसके तहत देश के हर जिले में अब वाणिज्यिक बैंक शिविर लगा कर वैसे लोगों का खाता खोलगी, जिनका अभी तक बचत खाता नहीं खुल पाया है। इस कार्य के लिए हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनायी गयी है जिसमें उसके जिले के लीड बैंक के प्रभारी और श्रम विभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है।
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय में बैंकिंग डिविजन के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार की योजना सभी लोगों को अधिक से अधिक प्लास्टिक मनी या कैशलेस ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए बैंक खाता बेहद जरूरी है। विभिन्न अनुभवों से पता चला है कि अभी भी देश के करोड़ों लोगों के पास बैंक खाता नहीं है। इसलिए राज्य सरकारों के सहयोग से अब पूरे देश में बैंक खाता खोलने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इस बारे में सचिव की तरफ से संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हर जिले के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जो कमेटी बनायी गई है, वही तय करेगी कि जिले के किस इलाके में कौन सा बैंक शिविर लगाएगा। चूंकि जिलाधिकारी को इस बात की जानकारी है कि किस इलाके में बैंक खाता धारी लोगों की क्या संख्या है, इसलिए वह बेहतर निर्णय ले सकेंगे। इस समिति की शुरूआती बैठक हो चुकी है और कई जगह बैंक खाता खोलने के लिए शिविर लगाना शुरू किया जा चुका है।
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एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि उन्हें बचत खाता खोलने के लिए सरकार की तरफ से निर्देश मिल चुका है। उन्होने बताया कि इस बारे में जोनल और सर्किल कार्यालयों में जरूरी निर्देश भेजे जा चुके हैं। मंगलवार से इस कार्यक्रम के तहत शिविरों का संचालन शुरू कर दिया गया है।
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केन्द्रीय वित्त मंत्रालय में बैंकिंग डिविजन के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार की योजना सभी लोगों को अधिक से अधिक प्लास्टिक मनी या कैशलेस ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए बैंक खाता बेहद जरूरी है। विभिन्न अनुभवों से पता चला है कि अभी भी देश के करोड़ों लोगों के पास बैंक खाता नहीं है। इसलिए राज्य सरकारों के सहयोग से अब पूरे देश में बैंक खाता खोलने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इस बारे में सचिव की तरफ से संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है।
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उन्होंने बताया कि हर जिले के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जो कमेटी बनायी गई है, वही तय करेगी कि जिले के किस इलाके में कौन सा बैंक शिविर लगाएगा। चूंकि जिलाधिकारी को इस बात की जानकारी है कि किस इलाके में बैंक खाता धारी लोगों की क्या संख्या है, इसलिए वह बेहतर निर्णय ले सकेंगे। इस समिति की शुरूआती बैठक हो चुकी है और कई जगह बैंक खाता खोलने के लिए शिविर लगाना शुरू किया जा चुका है।
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एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि उन्हें बचत खाता खोलने के लिए सरकार की तरफ से निर्देश मिल चुका है। उन्होने बताया कि इस बारे में जोनल और सर्किल कार्यालयों में जरूरी निर्देश भेजे जा चुके हैं। मंगलवार से इस कार्यक्रम के तहत शिविरों का संचालन शुरू कर दिया गया है।
नोटबंदी के बाद जन धन योजना में खुले 17 लाख खाते
वित्त मत्रालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद से 23 नवंबर तक देश भर में प्रधानमंत्री जन धन खाता योजना के तहत 17 लाख नए खाते खुल चुके हैं। जिस दिन देश में नोटबंदी लागू की गई थी, उस दिन देश भर में इस योजना के तहत 25.51 करोड़ खाते खुले थे जो कि 23 नवंबर 2016 को बढ़ कर 25.68 करोड़ हो गया। इनमें से अधिकतर खाते शहरी इलाके में खोले गए।
जन धन योजना में 73 हजार करोड़ रुपये
नोटबंदी का असर जन धन खातों पर कुछ ज्यादा ही दिखा है। इस साल नौ नवंबर तक जन धन खातों मं 45636.61 करोड़ रुपये ही जमा हुए थे जो कि 23 नवंबर को बढ़ कर 62834.72 करोड़ रुपये हो गया। मतलब सिर्फ 13 दिनों में 27198.11 करोड़ रुपये जन धन खातों में ही जमा हो गए। हालांकि वित्त मंत्रालय ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि इस राशि में से कितनी राशि शहरी इलाकों में और कितनी राशि ग्रामीण इलाकों में जमा हुई है।
बैंक अधिकारियों ने किया सीआरआर बढ़ाने का विरोध
नोटबंदी के आलोक में बैंकों में जमा हो रही भारी राशि पर रिजर्व बैंक द्वारा नकद आरक्षित अनुपात -सीआरआर- बढ़ा कर शत प्रतिशत करने का बैंक अधिकाररियों ने विरोध किया है। बैंक के अधिकारियों का सबसे बड़ा संगठन, ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कंफेडरेशन -एआईबीओसी- ने इस बारे में रिजर्व बैंक के गवर्नर को एक पत्र लिख कर विरोध दर्ज कराया है।
एआईबीओसी के महासचिव हरविंदर सिंह का कहना है कि रिजर्व बैंक ने सीआरआर बढ़ा कर जिस रोग का इलाज करना चाहा है, उस कदम से बैंकों पर कुछ और दुष्परिणाम दिखेंगे। उनके मुताबिक बैंकों में जो भी राशि जमा हुई है, उस पर कम से कम चार फीसदी का ब्याज देय होगा। लेकिन रिजर्व बैंक ने सीआरआर की सीमा बढ़ा कर जो राशि ले ली है, उसके बदले बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। संगठन का कहना है कि नोटबंदी के बाद जो बैंकों में भारी मात्रा में रकम जमा हो रही है, वह रिजर्व बैंक के इस कदम के बाद बैंकों के लिए खतरनाक साबित हो गया है क्योंकि इस वजह से बैंकों को कम से कम हर साल 9.5 से 10 फीसदी का नुकसान होगा। यही नहीं, उनके मुताबिक बैंकों के करेंसी चेस्ट पुराने नोटों से भरे पड़े हैं। इसका भी अभी तक समाधान नहीं आया है।
जन धन योजना में 73 हजार करोड़ रुपये
नोटबंदी का असर जन धन खातों पर कुछ ज्यादा ही दिखा है। इस साल नौ नवंबर तक जन धन खातों मं 45636.61 करोड़ रुपये ही जमा हुए थे जो कि 23 नवंबर को बढ़ कर 62834.72 करोड़ रुपये हो गया। मतलब सिर्फ 13 दिनों में 27198.11 करोड़ रुपये जन धन खातों में ही जमा हो गए। हालांकि वित्त मंत्रालय ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि इस राशि में से कितनी राशि शहरी इलाकों में और कितनी राशि ग्रामीण इलाकों में जमा हुई है।
बैंक अधिकारियों ने किया सीआरआर बढ़ाने का विरोध
नोटबंदी के आलोक में बैंकों में जमा हो रही भारी राशि पर रिजर्व बैंक द्वारा नकद आरक्षित अनुपात -सीआरआर- बढ़ा कर शत प्रतिशत करने का बैंक अधिकाररियों ने विरोध किया है। बैंक के अधिकारियों का सबसे बड़ा संगठन, ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कंफेडरेशन -एआईबीओसी- ने इस बारे में रिजर्व बैंक के गवर्नर को एक पत्र लिख कर विरोध दर्ज कराया है।
एआईबीओसी के महासचिव हरविंदर सिंह का कहना है कि रिजर्व बैंक ने सीआरआर बढ़ा कर जिस रोग का इलाज करना चाहा है, उस कदम से बैंकों पर कुछ और दुष्परिणाम दिखेंगे। उनके मुताबिक बैंकों में जो भी राशि जमा हुई है, उस पर कम से कम चार फीसदी का ब्याज देय होगा। लेकिन रिजर्व बैंक ने सीआरआर की सीमा बढ़ा कर जो राशि ले ली है, उसके बदले बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। संगठन का कहना है कि नोटबंदी के बाद जो बैंकों में भारी मात्रा में रकम जमा हो रही है, वह रिजर्व बैंक के इस कदम के बाद बैंकों के लिए खतरनाक साबित हो गया है क्योंकि इस वजह से बैंकों को कम से कम हर साल 9.5 से 10 फीसदी का नुकसान होगा। यही नहीं, उनके मुताबिक बैंकों के करेंसी चेस्ट पुराने नोटों से भरे पड़े हैं। इसका भी अभी तक समाधान नहीं आया है।