फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   TN Seshan journey from Village Development Secretary to Chief Election Commissioner

स्मृति शेषः टीएन शेषन का ग्राम विकास सचिव से मुख्य चुनाव आयुक्त तक का सफर

Mon, 11 Nov 2019 02:13 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 11 Nov 2019 02:13 AM IST
विज्ञापन
TN Seshan journey from Village Development Secretary to Chief Election Commissioner
टीएन शेषन - फोटो : Doordarshan

टीएन शेषन के करियर की शुरुआत ग्राम विकास सचिव सरीखे छोटे से पद से हुई थी। वहां से डिंडिगुल के सब कलेक्टर, फिर मद्रास के परिवहन निदेशक से देश की नौकरशाही के सर्वोच्च पद यानी कैबिनेट सचिव तक शेषन का सफर पहुंचा। इसके बाद बने वे मुख्य चुनाव आयुक्त, जो देश के शीर्ष पांच सांविधानिक पदों में गिना जाता है।

विज्ञापन


विज्ञापन

जब प्रजातंत्र को ही कर दिया ‘लॉकआउट’

देश में 90 के दशक तक चुनाव आयोग महज केंद्र सरकार के इशारों पर नाचने वाले एक आम सरकारी विभाग सरीखा था, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद टीएन शेषन के 2 अगस्त, 1993 को दिए 17 पेज लंबे एक आदेश ने चुनाव आयोग को पंजा मारने वाला शेर बना दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन


शेषन ने आदेश में लिखा कि सरकार की तरफ से चुनाव आयोग की सांविधानिक शक्तियों को मान्यता नहीं देने तक देश में कोई चुनाव आयोजित नहीं किया जाएगा। पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इसे प्रजातंत्र का ‘लॉकआउट’ करार दिया। लेकिन शेषन अड़े रहे। नतीजतन पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव बीच में ही थम गया।

प्रणब मुखर्जी उस समय केंद्रीय मंत्री थे और इस सीट पर चयन से उनका मंत्री पद बरकरार रहने का फैसला होना था। चुनाव नहीं होने से मुखर्जी को अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने इससे नाराज होकर शेषन को पागल कुत्ता तक कह दिया था।

सरकारी अधिकारियों को सिखाई आयोग के काम की गंभीरता

शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले चुनावों में पर्यवेक्षक आदि सरीखी जिम्मेदारियों को विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी बोझ सरीखा मानते थे और इन पर जाने से कतराते थे। लेकिन शेषन ने स्थिति ही बदल दी। आयोग की तरफ से त्रिपुरा में चुनाव पर्यवेक्षक बनाए जाने के बावजूद शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव के. धर्मराजन अगरतला नहीं जाकर मंत्रालय के काम से थाईलैंड चले गए।

मंत्रालय के काम से जाने के बावजूद शेषन ने उनकी गोपनीय रिपोर्ट में प्रतिकूल प्रविष्टि कर अन्य सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि आयोग का काम भी उतना ही अहम है, जितना उनके विभाग या मंत्रालय का काम।

ड्राइवरों ने हड़ताल की तो 80 किमी बस चलाकर खुद पहुंचाए यात्री

आईएएस की परीक्षा टॉप करने के बाद शेषन मद्रास (अब चेन्नई) के परिवहन निदेशक बने। नियमों का पालन उचित तरीके से हो, इसकी धुन उन्होेंने अपनी इस नियुक्ति में ही दिखा दी। पूरा दिन मद्रास की सड़कों पर 3 हजार सरकारी बसों के बेड़े का खुद निरीक्षण करते घूमते रहना। एक दिन ड्राइवरों ने हड़ताल कर दी।

शेषन खुद मैदान में उतरे और एक बस में डिपो से सवारियां भरकर 80 किलोमीटर दूर उनकी मंजिल तक पहुंचाया। हड़ताली ड्राइवरों को भी उनके इस जज्बे की तारीफ करनी पड़ी।

हालांकि उनकी इस ड्राइविंग के पीछे एक किस्सा यह भी है कि पूरा दिन सड़कों पर निरीक्षण करने के दौरान एक ड्राइवर ने उन्हें यह कह दिया था कि आप न इंजन के बारे में जानते हैं और न ही बस चलाना, तो हमारी परेशानी भी नहीं समझ पाएंगे। शेषन ने इस बात को चैलेंज माना और रोजाना वर्कशॉप में जाकर बस ड्राइविंग सीखने के साथ ही उसे ठीक करना भी सीख लिया।

रेड्डी के मुख्यमंत्री पद पर पड़ गए थे भारी

टीएन शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद बहुत समय तक कांग्रेसी कहा जाता रहा। इससे नाराज शेषन ने कांग्रेस को ही दो बार आयोग की ताकत खूब दिखाई। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस ने विजय भास्कर रेड्डी को मुख्यमंत्री बना दिया। उन्हें छह महीने के अंदर उपचुनाव जीतकर विधानसभा की सदस्यता लेनी थी, लेकिन शेषन ने अकेले आंध्र प्रदेश के लिए उपचुनाव कराने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

इसके बाद 1993 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस की जिद के बावजूद शेषन ने फरवरी महीने में नहीं होने दिए थे। उन्होंने राज्य के दबंग कांग्रेसी नेता व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देब के साथ चुनाव प्रचार में घूमने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होने तक चुनाव स्थगित रहने की बात कही। खींचतान के बाद सरकार ने पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की। इसके बाद ही अप्रैल में चुनाव कराए गए।

ठुकरा दिया था नरसिंहराव का राजदूत बनाने का ऑफर

शेषन को चुनाव आयोग से दूर करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने उन्हें अमेरिका में भारतीय राजदूत बनने का ऑफर दिया। शेषन ने इससे इनकार कर दिया। बाद में एक अखबार से बातचीत के दौरान शेषन ने कहा था कि मुझे उपहार में सिर्फ गणेश की मूर्तियां भाती हैं, क्योंकि मैं खुद भी गणेश जैसा ही दिखता हूं।

पहले आईपीएस और फिर बने आईएएस

शेषन के बड़े भाई टीएन लक्ष्मीनारायण देश की आजादी के बाद आईएएस के पहले बैच के टॉपर थे, लेकिन खुद शेषन को नौकरशाही पसंद नहीं थी। वह बनना चाहते थे वैज्ञानिक। इसके लिए बीएसएसी फिजिक्स करने के बाद एक कॉलेज में शिक्षक भी बने।

लेकिन खुद शेषन ने ही एक जगह लिखा कि घर चलाने लायक भी वेतन नहीं था तो सोचा कुछ और किया जाए। कोई दूसरा काम जानता नहीं था, इसलिए सिविल सेवा परीक्षा की ही तैयारी शुरू कर दी। 1953 में टीएन शेषन ने पहली बार सिविल सेवा परीक्षा पास की और आईपीएस बने।

लेकिन उन्हें खाकी वर्दी नहीं भायी। नतीजतन अगले साल फिर सिविल सेवा परीक्षा में बैठे और महज 21 साल की उम्र में आईएएस के लिए पूरे देश में शीर्ष पर चुने गए।

‘मैं ठगों के खानदान से हूं’

शेषन के पिता वकील थे, लेकिन परिवार में वे छह भाई-बहनों के बीच सबसे छोटे थे। बड़ा परिवार होने के चलते पैसे की किल्लत रहती थी। बचपन के बारे में शेषन ने लिखा है, केरल के ब्राह्मण कुल के मेरे परिवार में लोग या तो नौकरशाह बनते थे या संगीताकार, रसोइया या फिर ठगी में इस कुल ने नाम कमाया था यानी मैं ठगों के खानदान से हूं।

शेषन ने बताए संविधान के महापर्व के नियम कायदे

नब्बे के दशक में केंद्र में कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार बनी तो सिर्फ चार महीने ही चल पाई। समझा जाता है कि इस दौरान राजीव गांधी के दबाव में ही चंद्रशेखर ने तत्कालीन कैबिनेट सचिव टी. एन. शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया था।

लेकिन शेषन ने पद संभालते ही साबित कर दिया कि वह किसी पार्टी की तरफदारी नहीं करने वाले हैं। उनके बुलंद इरादों और सख्ती का एक वाक्य मार्च 1991 में अखबारों में छप चुका था, भूल जाइए कि संसद में गलत तौर-तरीकों का इस्तेमाल करके आप पहुंच जाएंगे, किसी का ऐसा करने की इजाजत नहीं होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed