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पीएम ने टैगोर को गुजरात से जोड़ा तो भड़की टीएमसी, कहा- वे विश्वगुरु, किसी एक राज्य तक नहीं हैं सीमित
Thu, 24 Dec 2020 03:55 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 24 Dec 2020 03:55 PM IST
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टीएमसी नेता ब्रात्य बसु
- फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में रवींद्र नाथ टैगोर का संबंध गुजरात के साथ बताया, तो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी भड़क गई। टीएमसी के नेता ब्रात्य बसु ने कहा कि सभी जानते हैं कि टैगोर विश्वकवि हैं तो पीएम मोदी उन्हें एक विशेष प्रदेश से क्यों बांधने की कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर के बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर की नौकरी गुजरात में लगी थी। तब रवींद्र नाथ टैगोर उनसे मिलने अहमदाबाद में आते थे, वहां पर ही उन्होंने अपनी दो कविताओं को लिखा था।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- गुरुदेव ने हमें स्वदेशी समाज का संकल्प दिया
प्रधानमंत्री ने कहा, गुरुदेव ने हमें स्वदेशी समाज का संकल्प दिया था। वो हमारे गांवों, कृषि को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। वो वाणिज्य, व्यापार, कला, साहित्य को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। उन्होंने कहा, भारत की आत्मा, भारत की आत्मनिर्भरता और भारत का आत्मसम्मान एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए तो बंगाल की पीढ़ियों ने खुद को खपा दिया था।
गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार
पीएम मोदी ने कहा, विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है।
यह भी पढ़ें : विश्व भारती का शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कुछ कहा
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बता दें कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर के बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर की नौकरी गुजरात में लगी थी। तब रवींद्र नाथ टैगोर उनसे मिलने अहमदाबाद में आते थे, वहां पर ही उन्होंने अपनी दो कविताओं को लिखा था।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- गुरुदेव ने हमें स्वदेशी समाज का संकल्प दिया
प्रधानमंत्री ने कहा, गुरुदेव ने हमें स्वदेशी समाज का संकल्प दिया था। वो हमारे गांवों, कृषि को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। वो वाणिज्य, व्यापार, कला, साहित्य को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। उन्होंने कहा, भारत की आत्मा, भारत की आत्मनिर्भरता और भारत का आत्मसम्मान एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए तो बंगाल की पीढ़ियों ने खुद को खपा दिया था।
गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार
पीएम मोदी ने कहा, विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है।
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