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Indian Railways Scam: टीएमसी सांसद साकेत गोखले का आरोप- वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में घोटाला; रेलवे ने खंडन किया

Wed, 18 Sep 2024 05:07 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 18 Sep 2024 05:07 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की लागत में घोटाला हुआ। जिसे भारतीय रेलवे ने खारिज करते हुए उनके आरोपों को गलत बताया है।

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TMC MP Saket Gokhale alleges scam in cost of Vande Bharat sleeper trains
TMC सांसद साकेत गोखले का केंद्र पर आरोप - फोटो : X / @AshwiniVaishnaw / @SaketGokhale

विस्तार

टीएमसी के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने बुधवार को वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की लागत में घोटाले का आरोप लगाया है। हालांकि रेलवे ने उनके इस दावे को गलत सूचना बताकर खारिज कर दिया कि एक ट्रेन की लागत में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। बता दें कि दो दिन पहले सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में साकेत गोखले ने आरोप लगाया था कि एक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की लागत 290 करोड़ रुपये से बढ़कर 436 करोड़ रुपये हो गई है।
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आरोपों को रेल मंत्रालय ने बताया फर्जी खबर
रेल मंत्रालय ने इस आरोप को गलत सूचना और फर्जी खबर बताकर खारिज कर दिया और कहा कि उसने स्लीपर ट्रेनों में कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी है, जबकि अनुबंध में कुल कोचों की संख्या स्थिर रखी है। जबकि रेल मंत्रालय ने इस निर्णय को ट्रेन यात्रा की उच्च मांग के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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रेल मंत्री बताएं किसे हो रहा फायदा?- गोखले 
साकेत गोखले ने एक्स पर कई पोस्ट में रेलवे के रुख को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि अनुबंध प्रति ट्रेन के हिसाब से दिए गए थे, न कि प्रति कोच के हिसाब से। उन्होंने आगे कहा, ट्रेन की लागत में सिर्फ 'कोच बनाने' से कहीं अधिक शामिल है, एक ट्रेन की लागत सिर्फ सभी कोचों की लागत नहीं है। 58,000 करोड़ रुपये के अनुबंध को 200 से संशोधित कर सिर्फ 133 ट्रेनों का कर दिया गया। प्रति ट्रेन लागत 290 करोड़ रुपये से बढ़कर 435 करोड़ रुपये हो गई। इस मामले में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को बताना चाहिए कि इस घोटाले से किसे फायदा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि रेलवे ने 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए रेल विकास निगम लिमिटेड और रूसी फर्म मेट्रोवैगनमैश को अनुबंध दिया और 80 ट्रेनों के लिए टीटागढ़ वैगन और बीएचईएल को अनुबंध दिया। गोखले ने कहा कि अनुबंध के अनुसार, ट्रेनों की डिलीवरी पर 26,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था, उन्होंने कहा कि रखरखाव लागत के रूप में 32,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिससे विनिर्माण लागत प्रति ट्रेन 130 करोड़ रुपये और रखरखाव की लागत प्रति ट्रेन 160 करोड़ रुपये हो गई। 


अनुबंध में बदलाव किया गया- गोखले
सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह अनुबंध में बदलाव किया गया, कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी गई और ट्रेनों की संख्या 200 से घटाकर 133 कर दी गई। उन्होंने कहा कि अब प्रति ट्रेन विनिर्माण लागत 195 करोड़ रुपये है और नई रखरखाव लागत प्रति ट्रेन 240 करोड़ रुपये होगी। वहीं रेल मंत्रालय ने 16 सितंबर को गोखले के आरोप का जवाब देते हुए इसे झूठी खबर करार दिया। मंत्रालय ने कहा, हमने लंबी ट्रेनें बनाने के लिए कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी है, जिससे अनुबंध में कोचों की कुल संख्या स्थिर रहेगी।

आरोपों पर रेल मंत्रालय का बयान
रेल मंत्रालय के अनुसार पहले अनुबंध 16 कोच वाली 200 ट्रेनों के लिए था, जिससे कुल 3,200 कोच हो गए। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित संख्या 24 कोच वाली 133 ट्रेनों की है, जिससे कुल 3,192 कोच हो गए हैं। मंत्रालय ने बताया कि कुल अनुबंध मूल्य वास्तव में कम हो गया है, क्योंकि ट्रेन की लंबाई बढ़ाने से बचत होती है। हम रेलवे यात्रा की उच्च मांग को देखते हुए रिकॉर्ड संख्या में गैर-एसी कोच (12,000) बना रहे हैं।

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