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नोटबंदी के तीन साल : सियासी दुनिया में अभी भी जिंदा है यह मुद्दा

Fri, 08 Nov 2019 07:30 AM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Fri, 08 Nov 2019 07:30 AM IST
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Three Years to Note ban: Demonetization topic still hot in political parties
नोटबंदी पर सियासत (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

8 नवंबर, 2016, इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट पुराने नोट बंद करने की घोषणा की थी। इसके तुरंत बाद ही मानो पूरे देश में भूकंप सा आ गया। एटीएम के बाहर लंबी लाइनें, जमकर शॉपिंग और ढेर सारी प्रतिक्रियाएं। हमें बहुत कुछ देखने को मिला। सियासी बयानबाजी भी खूब हुई। सत्ता पक्ष ने जहां फैसले को देशहित में बताया, तो वहीं विपक्ष ने जमकर आलोचना भी की।

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अब तीन साल बाद आम लोगों के जेहन में उसकी यादें थोड़ी धुंधली सी होती जा रही हैं। मगर हमारे नेता इस मुद्दे को लगातार हवा देकर इसे सियासी मुद्दा बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि विधानसभा चुनावों में भी भाजपा के खिलाफ प्रचार में नोटबंदी का खूब सहारा लिया गया।

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प्रियंका ने पीएम को दी चुनौती :

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को यूपी की कमान सौंपी गई। प्रचार के दौरान उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच खूब बयानबाजी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को चुनौती दी कि अंतिम दो दौर के चुनाव वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर लड़ें। इस पर पलटवार करते हुए प्रियंका ने पीएम मोदी को नोटबंदी और जीएसटी पर चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली।

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महाराष्ट्र चुनावों में राहुल ने चला कार्ड

कांग्रेस ने महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों में भी नोटबंदी का जिक्र किया। मौका मिलने पर उसने भाजपा पर हमला बोला। अक्तूबर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के यवतमाल में हुई चुनावी रैली में एनडीए सरकार पर गलत आर्थिक नीतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी के पीछे नोटबंदी और जीएसटी जैसे गलत फैसले हैं। राहुल ने दावा किया कि उनके गुजरात दौरे के दौरान कारोबारियों ने बताया कि नोटबंदी और जीएसटी ने उनकी कमर तोड़ दी।

पीएल पुनिया ने भी साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया ने कहा कि मोदी ने नोटबंदी के बाद 50 दिन मांगे थे। अब तो उनके पाले में ही गेंद है तो वह खुद बताएं कि वह क्या सोचते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों पर टैक्स का बोझ डाल रही है और उद्योगपतियों को राहत दे रही है।

अखिलेश ने की तैयारी

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में नोटबंदी के दौरान पैदा हुए खचांजी नाम के बच्चे का जन्मदिन भी राजनीतिक हो गया है। सपा अध्यक्ष शुक्रवार को इस बच्चे का जन्मदिन अपने आफिस में मनाएंगे। साथ ही वह मोदी सरकार पर कटाक्ष करने की कोशिश करेंगे। 

मनमोहन ने आर्थिक सुस्ती के लिए ठहराया जिम्मेदार

जानेमाने अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुताबिक देश में मौजूदा आर्थिक सुस्ती के लिए नोटबंदी को ही जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के लिए भाजपा जिम्मेदार है। भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने के पीछे प्रमुख कारण नोटबंदी ही है। 

शरद पवार ने भी की आलोचना 

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी भाजपा की आर्थिक नीतियों को दोषी माना। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी ने अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। इसी वजह से देश की जीडीपी में गिरावट आई। 

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