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किसानों के लिए खुशखबरी, इस बार झूम के बरसेगा मानसून
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Jun 2016 04:12 AM IST
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भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कमजोर मानसून की आशंका को खारिज करते हुए कहा है कि 96 फीसदी संभावना यह है कि इस साल बारिश सामान्य या उससे अधिक होगी। पूर्वोत्तर को छोड़कर पूरे देश में जमकर बारिश होगी। केवल पूर्वोत्तर में सामान्य से कम मानसूनी बारिश होने की संभावना है। ऐसे में सूखा की स्थिति से जूझ रहे 10 राज्यों के किसानों के लिए यह अच्छी खबर है।
दीर्घ अवधि का दूसरा अनुमान जारी करते हुए आईएमडी के महानिदेशक लक्ष्मण राठौर ने कहा कि अनाज उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य हरियाणा और पंजाब सहित उत्तर पश्चिम भारत में इस साल 108 फीसदी बारिश होगी, जबकि मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में 113 फीसदी बारिश होगी।
पूर्वोत्तर इलाके में 94 फीसदी बारिश होगी, जो सामान्य से मामूली कम है। उन्होंने बताया कि जुलाई और अगस्त में 107 और 104 फीसदी बारिश होगी। पहले और दूसरे दीर्घकालिक अनुमान में ज्यादा अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में इस बार अल्प बारिश की संभावना शून्य फीसदी यानी बिल्कुल नहीं है।
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उन्होंने कहा कि केरल में हो रही बारिश मानसून पूर्व की बारिश है और अगले चार से पांच दिन में राज्य में दक्षिण पश्चिम मानसून आ जाएगा। एक बार केरल में मानसून पहुंच जाने के बाद यह तेजी से पूर्वी और मध्य भारत की ओर बढ़ेगा।
दीर्घकालिक अनुमान में 90 फीसदी से कम बारिश को कम बारिश, जबकि 90 से 96 फीसदी के बीच बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। अगर बारिश 96 से 104 फीसदी के बीच हो तो मानसून की स्थिति सामान्य मानी जाती है।
इसके अलावा 104 से 110 फीसदी के बीच बारिश को सामान्य से अधिक और 110 फीसदी से अधिक को अत्यधिक बारिश की श्रेणी में रखा जाता है।
गौरतलब है कि आज भी देश की खेती मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर है। केवल 40 खेतों की सिंचाई कृत्रिम तरीके से करने के व्यवस्था है। बीते साल मानसून की खराब स्थिति के कारण 10 राज्यों ने सूखा घोषित कर दिया था।
केरल में मानसून के दस्तक पर मतभेद
मौसम की भविष्यवाणी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट का कहना है कि ऐसा लगता है कि केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है। हालांकि एजेंसी के इस अनुमान पर आईएमडी प्रमुख राठौर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि केरल में बारिश को मानसून पूर्व की बारिश कही जा सकती है। अगले चार-पांच दिनों में मानसून के दस्तक देने की स्थित पूरी तरह से अनुकूल है।
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दीर्घ अवधि का दूसरा अनुमान जारी करते हुए आईएमडी के महानिदेशक लक्ष्मण राठौर ने कहा कि अनाज उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य हरियाणा और पंजाब सहित उत्तर पश्चिम भारत में इस साल 108 फीसदी बारिश होगी, जबकि मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में 113 फीसदी बारिश होगी।
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पूर्वोत्तर इलाके में 94 फीसदी बारिश होगी, जो सामान्य से मामूली कम है। उन्होंने बताया कि जुलाई और अगस्त में 107 और 104 फीसदी बारिश होगी। पहले और दूसरे दीर्घकालिक अनुमान में ज्यादा अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में इस बार अल्प बारिश की संभावना शून्य फीसदी यानी बिल्कुल नहीं है।
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उन्होंने कहा कि केरल में हो रही बारिश मानसून पूर्व की बारिश है और अगले चार से पांच दिन में राज्य में दक्षिण पश्चिम मानसून आ जाएगा। एक बार केरल में मानसून पहुंच जाने के बाद यह तेजी से पूर्वी और मध्य भारत की ओर बढ़ेगा।
दीर्घकालिक अनुमान में 90 फीसदी से कम बारिश को कम बारिश, जबकि 90 से 96 फीसदी के बीच बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। अगर बारिश 96 से 104 फीसदी के बीच हो तो मानसून की स्थिति सामान्य मानी जाती है।
इसके अलावा 104 से 110 फीसदी के बीच बारिश को सामान्य से अधिक और 110 फीसदी से अधिक को अत्यधिक बारिश की श्रेणी में रखा जाता है।
गौरतलब है कि आज भी देश की खेती मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर है। केवल 40 खेतों की सिंचाई कृत्रिम तरीके से करने के व्यवस्था है। बीते साल मानसून की खराब स्थिति के कारण 10 राज्यों ने सूखा घोषित कर दिया था।
केरल में मानसून के दस्तक पर मतभेद
मौसम की भविष्यवाणी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट का कहना है कि ऐसा लगता है कि केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है। हालांकि एजेंसी के इस अनुमान पर आईएमडी प्रमुख राठौर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि केरल में बारिश को मानसून पूर्व की बारिश कही जा सकती है। अगले चार-पांच दिनों में मानसून के दस्तक देने की स्थित पूरी तरह से अनुकूल है।