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यह राहुल बनाम अमित शाह नहीं सत्ता समर का क्वार्टर फाइनल है जनाब
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:29 AM IST
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कांग्रेस पार्टी के नेताओं के चेहरे खिलने लगे हैं। पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी से लेकर मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला के चेहरे पर यह चमक साफ तौर पर देखी जा सकती है।
पार्टी के प्रवक्ता आलोक शर्मा की आवाज में काफी दमखम लौट आया है। 24, अकबर रोड में आए इस बदलाव का कारण राहुल गांधी की गुजरात जनसभा में जनता का उमड़ना है।
वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा दलबल के साथ कांग्रेस के गढ़ अमेठी में उसे चुनौती देने पहुंच गई है।
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कांग्रेस के नेता अमेठी में हर घटनाक्रम पर कान लगाए हैं। पार्टी के एक महासचिव से भाजपा अध्यक्ष की अमेठी यात्रा पर पूछे जाने पर सूत्रों का कहना है कि यह सवाल राहुल और अमित शाह का नहीं है।
इस समय सत्ता के समर का क्वार्टर फाइनल चल रहा है। इशारा साफ तौर पर गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में बदली राजनीतिक स्थितियां हैं। बड़ी दृढ़ता के साथ पूछने पर पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि हिमाचल का नतीजा चाहे जो आए लेकिन गुजरात में इस बार सूरत बदलनी चाहिए।
माना जा रहा है कि इसी रणनीति को केन्द्र में रखकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार तीन दिनों के प्रचार के लिए वहां डट गए हैं। इसके बरअक्स भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में मोर्चा खोल दिया है।
क्या है अमेठी के मायने
अमेठी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है। राहुल गांधी इस महीने के अंत तक कांग्रेस अध्यक्ष बन सकते हैं। वह लगातार इसका संकेत भी दे रहे हैं।
स्मृति ईरानी ने 2014 में वहां से लोकसभा चुनाव लड़ा था। ईरानी ने दमदारी से चुनाव लड़ा था और चुनाव को करीब तीन लाख मतों से जीतने वाले राहुल गांधी को पिछले चुनाव में करीब एक लाख मतों के अंतर से जीत मिली थी।
इस तरह से भाजपा राजनीतिक विरोधी पार्टी के अध्यक्ष को उसके गढ़ में चुनौती दे रही है। आमतौर पर पार्टियां शीर्ष नेताओं के चुनाव क्षेत्र को बख्श देती हैं। लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है। भाजपा विरोधी पार्टी के अध्यक्ष को उसके चुनाव क्षेत्र में उसे हराने की चुनौती दे रही है।
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पार्टी के प्रवक्ता आलोक शर्मा की आवाज में काफी दमखम लौट आया है। 24, अकबर रोड में आए इस बदलाव का कारण राहुल गांधी की गुजरात जनसभा में जनता का उमड़ना है।
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वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा दलबल के साथ कांग्रेस के गढ़ अमेठी में उसे चुनौती देने पहुंच गई है।
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कांग्रेस के नेता अमेठी में हर घटनाक्रम पर कान लगाए हैं। पार्टी के एक महासचिव से भाजपा अध्यक्ष की अमेठी यात्रा पर पूछे जाने पर सूत्रों का कहना है कि यह सवाल राहुल और अमित शाह का नहीं है।
इस समय सत्ता के समर का क्वार्टर फाइनल चल रहा है। इशारा साफ तौर पर गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में बदली राजनीतिक स्थितियां हैं। बड़ी दृढ़ता के साथ पूछने पर पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि हिमाचल का नतीजा चाहे जो आए लेकिन गुजरात में इस बार सूरत बदलनी चाहिए।
माना जा रहा है कि इसी रणनीति को केन्द्र में रखकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार तीन दिनों के प्रचार के लिए वहां डट गए हैं। इसके बरअक्स भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में मोर्चा खोल दिया है।
क्या है अमेठी के मायने
अमेठी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है। राहुल गांधी इस महीने के अंत तक कांग्रेस अध्यक्ष बन सकते हैं। वह लगातार इसका संकेत भी दे रहे हैं।
स्मृति ईरानी ने 2014 में वहां से लोकसभा चुनाव लड़ा था। ईरानी ने दमदारी से चुनाव लड़ा था और चुनाव को करीब तीन लाख मतों से जीतने वाले राहुल गांधी को पिछले चुनाव में करीब एक लाख मतों के अंतर से जीत मिली थी।
इस तरह से भाजपा राजनीतिक विरोधी पार्टी के अध्यक्ष को उसके गढ़ में चुनौती दे रही है। आमतौर पर पार्टियां शीर्ष नेताओं के चुनाव क्षेत्र को बख्श देती हैं। लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है। भाजपा विरोधी पार्टी के अध्यक्ष को उसके चुनाव क्षेत्र में उसे हराने की चुनौती दे रही है।
गुजरात बना नाक का सवाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात से हैं। भाजपा अध्यक्ष भी गुजरात से हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष 2014 के आम चुनाव से देश में गुजरात मॉडल की तर्ज पर विकास की बात कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष उन्हें और उनके दावे को खारिज करने के लिए पूरे दमखम से गुजरात में डट गए हैं।
ऐसे में गुजरात विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय अमितभाई शाह को लेकर लग रहे आरोप ने पार्टी के माथे पर बल ला दिया है।
पाटीदार समाज की नाराजगी, पार्टी के भीतर का अंदरूनी घमासान भी भाजपा का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के चुनाव के पहले यह सत्ता समर का क्वार्टर फाइनल बन गया है।
गुजरात के साथ हिमाचल विधानसभा चुनाव भी होना है। लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेताओं का मानना है कि गुजरात अहम है।
कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार चाहे राज्य के आगामी चुनाव में भाजपा को सफलता मिले या कांग्रेस को लेकिन इसका असर आगे की राजनीति पर पड़ेगा। इससे मनोबल कई गुना बढ़ जाएगा।
ऐसे में गुजरात विधानसभा का चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय अमितभाई शाह को लेकर लग रहे आरोप ने पार्टी के माथे पर बल ला दिया है।
पाटीदार समाज की नाराजगी, पार्टी के भीतर का अंदरूनी घमासान भी भाजपा का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के चुनाव के पहले यह सत्ता समर का क्वार्टर फाइनल बन गया है।
गुजरात के साथ हिमाचल विधानसभा चुनाव भी होना है। लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेताओं का मानना है कि गुजरात अहम है।
कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार चाहे राज्य के आगामी चुनाव में भाजपा को सफलता मिले या कांग्रेस को लेकिन इसका असर आगे की राजनीति पर पड़ेगा। इससे मनोबल कई गुना बढ़ जाएगा।