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आईएस के निशाने पर पीएम मोदी, 15 अगस्त को बुलेट प्रूफ केबिन से दे सकते हैं भाषण

Fri, 29 Jul 2016 02:12 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 29 Jul 2016 02:12 PM IST
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 This 15th August threat to PM’s life higher
- फोटो : file photo

इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान को सबसे ज्यादा खतरा है, ऐसा सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर पर होने वाले पीएम के भाषण के लिए एहतियातन बुलेट प्रूफ केबिन बनाने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से कहा गया है कि इसबार पहले के मुकाबले पीएम की जान का खतरा ज्यादा है, इसलिए इसबार हर हाल में बुलेट प्रूफ केबिन पर गंभीरता से विचिर करना चाहिए। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इस बार पीएम की जान के खतरे के पीछे वजह कश्मीर के हालात या सीमा पर तनाव नहीं, बल्कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों की वजह से भी है। जैसा का आतंकी संगठन 'लोन वुल्फ' (अकेल शख्स द्वारा हमला) हमले की नीति पर चल रहा है, वह पीएम को भी इसका निशाना बना सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी चेताया कि आतंकी ड्रोन हमले की भी कोशिश कर सकते हैं, इसलिए पीएम को भाषण बुलेट प्रूफ केबिन से ही देना चाहिए।
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बता दें कि बीते साल स्वतंत्रतता दिवस के मौके पर भी पीएम को बुलेट प्रूफ केबिन से भाषण देना था, लेकिन एन मौके पर पीएम मोदी ने उसे हटवा दिया और खुली हवा में रहकर देश की जनता को संबोधित किया।
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सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो इस बार हालात कुछ और हैं, इसलिए इस बुलेट प्रूफ केबिन की अनदेखी नहीं की जा सकती, पीएम को इसका पालन करना ही चाहिए।

इस बार पीएम को सुरक्षा एजेंसियों की बात माननी ही होगी

 This 15th August threat to PM’s life higher

सूत्रों की मानें तो बुलेट प्रूफ केबिन से पीएम का भाषण देना इंदिरा गांधी की हत्या के बाद से परंपरा के तौर पर रहा है, लेकिन 2014 में पीएम मोदी ने इस परंपरा तोड़ा, लेकिन अब सुरक्षा के लिहाज से उन्हें भी इस परंपरा का पालन करना चाहिए।

सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो आईएस ही नहीं, अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैस-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-जेहादी जैसे आतंकी संगठनों के निशाने पर ही पीएम नरेंद्र मोदी हैं।

पिछले साल जब पीएम ने बिना किसी बुलेट प्रूफ केबिन के जनता को संबोधित करने का फैसला किया तो उनकी सुरक्षा में काफी मश्क्कत करनी पड़ी थी। लाल किले के एक किलोमीटर के दायरे में स्पेशल कमांडोज का घेरा बनाया गया था और ड्रोन से निगरानी की गई थी। सूत्रों की मानें तो पीएम की सुरक्षा में एसपीजी, आईबी पैरामिलिट्री और दिल्ली पुलिस के 5000 जवान केवल लाल किले पर तैनात किए गए थे।

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