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वायरस से वायरस को मात देकर हमें कोरोना महामारी से बचाएंगे ये टीके
Sat, 09 Jan 2021 07:49 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 09 Jan 2021 07:49 AM IST
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कोवैक्सीन
- फोटो : पीटीआई
कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए अच्छी बात यह है कि उसके पास वैक्सीन के कई विकल्प हैं। फाइजर, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका, भारत-बायोटेक की वैक्सीन का प्रयोग शुरू हो चुका है। मॉडर्ना, नोवामैक्स और रूस की वैक्सीन स्पुतनिक वी समेत अन्य से उम्मीदें हैं जिनका इस्तेमाल आने वाले समय में जल्द शुरू हो सकता है।
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खास बात यह है कि यह टीके कोरोना वायरस के कमजोर या उसके सूक्ष्म कणों से तैयार हुई हैं जो उसके अंत का कारण बनेगी। तो आइए अमर उजाला रिसर्च टीम के साथ जानते हैं कि कौन सी वैक्सीन किस तरह काम करेगी और कैसे वायरस को मात देने के लिए हमारे शरीर को तैयार करेगी।
कोवीशील्ड और स्पुतनिक वी:
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनेका की कोवीशील्ड और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक की एक तकनीक पर ही काम करेगी। इन्हें तैयार करने में कोरोना के कमजोर अंशों का प्रयोग हुआ है जिससे संक्रमण का खतरा नहीं है। इन दोनों वैक्सीन में मौजूद वायरल कारण शरीर में अपना विस्तार नहीं करेंगे।
यह सिर्फ शरीर को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तैयार कर देंगे। भविष्य में शरीर जब भी वायरस के संबंध में आएगा तो यह काम शुरू कर देंगे। वैक्सीन में एडीनोवायरस का प्रयोग हुआ है जो चिंपैंजी में कॉमन कोल्ड का कारण होता है।
निष्क्रिय वायरस से बना टीका कोवैक्सीन :
कोवैक्सीन देश की पहली स्वदेशी वैक्सीन है जिसे हैदराबाद की कंपनी भारत-बायोटेक ने आईसीएमआर के सहयोग से बनाया है। इसे बनाने में निष्क्रिय वायरस का प्रयोग हुआ है जिससे संक्रमण का बिल्कुल भी खतरा नहीं है।
इस वैक्सीन की एक और विशेष बात यह है कि यह कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी लगाई जा सकती है। पोलियो, खसरा की कुछ वैक्सीन भी इसी तर्ज पर बनी है।इस वैक्सीन से इम्यूनिटी तो कमजोर होगी लेकिन इस तरह के मॉलिक्यूल तैयार हो जाएंगे जिससे शरीर वायरस से भविष्य में आसानी से लड़ सकेगा।
स्पाइक प्रोटीन बनाने का देगी निर्देश
मॉडर्ना मैसाचुसेट्स की फार्मा कंपनी मॉडर्ना ने अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की मदद से इसे तैयार किया है। इसका नाम है एमआरएनए-1273 है। यह फाइजर की वैक्सीन की तरह है जो शरीर को वायरस की तरह स्पाइक प्रोटीन बनाने का निर्देश देगी जिससे वायरस को मात दी जाएगी।
इंजेक्शन लगते ही कोशिकाओं में एमआरएनए रिलीज हो जाएगा और स्पाइक प्रोटीन बनना शुरू हो जाएगा। वैक्सीन के एमआरएनए को कोशिकाएं निष्क्रय कर देंगी। जिससे वायरस कोशिकाओं पर नहीं चिपकेगा।
बंदरों की किडनी में वायरस का स्टॉक
कोरोनावैक:
चीन की दवा कंपनी सायनोवेट ने कोरोना वायरस टीका बनाया है। यह वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडीज बनाने का काम करेगा। चीन के वैज्ञानिकों ने चीन, ब्रिटेन, इटली से वायरस का सैंपल लेने के बाद इसे तैयार किया है।
इसके बाद बंदरों की किडनी में बड़ी मात्रा में कोरोना वायरस तैयार किया। इसके बाद इसमें बीटा प्रोपियोलैक्टोन नाम का केमिकल मिलाया जो कोरोना के जींस को जकड़कर निष्क्रिय कर देता है। निष्क्रिय वायरस अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाता पर उसके प्रोटीन, स्पाइक शरीर में रहते हैं।
टीका लगवाने से पहले अच्छे से जान लें कौन सा टीका कैसे करेगा काम
शरीर को प्रशिक्षित करेगा टीका नोवावैक्स:
अमेरिकी कंपनी नोवामैक्स ने इसे तैयार किया है जो प्रोटीन यूनिट प्लेटफार्म पर आधारित है। इसमें वायरस के टुकड़ों का प्रयोग हुआ है। यह एडजुवेंट की तरह काम करेगी, जो शरीर को वायरस से बचाव के लिए प्रशिक्षित करेगी न कि प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करेगी।
हेपेटाइटिस-बी का टीका भी इस तकनीक पर आधारित है। टीके को बनाने के लिए कीट कोशिकाओं से वायरस के स्पाइक प्रोटीन को निकाला गया है।
एडीनोवायरस आधारित वैक्सीन
एडी26.सीओवी2.एस :
कोरोना वायरस के अंत के लिए जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन का वैज्ञानिक नाम एडी26.सीओवी2.एस है। यह वैक्सीन भी जेनेटिक्स को निर्देश देगी लेकिन फायदे और मॉडर्ना से पूरी तरह अलग है। इसे तैयार करने के लिए कोरोना वायरस के जीन को एडीनोवायरस 26 में मिलाया है।
वैज्ञानिकों ने एडीनोवायरस में बदलाव किया है जो इंजेक्शन के जरिए न्यूक्लियस में जाएगा। लेकिन एडीनोवायरस इससे पहले निकल जाएगा। न्यूक्लियस कोशिकाओं के डीएनए का चैंबर होता है। यहीं से वैक्सीन का काम शुरू करेगी।