फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   There will be major changes in constitutional framework then will elections be held simultaneously

संवैधानिक ढांचे में करना होगा बड़ा बदलाव, तभी हो सकेंगे पूरे देश में एक साथ चुनाव

Fri, 31 Aug 2018 06:11 AM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Updated Fri, 31 Aug 2018 06:11 AM IST
विज्ञापन
There will be major changes in constitutional framework then will elections be held simultaneously

पूरे देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के मामले को लेकर गठित लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। कमीशन ने माना है कि मौजूदा संवैधानिक ढांचे में पूरे देश में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं है और इसके लिए मौजूदा ढांचे में बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि आयोग ने माना है कि अगर पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू होती है तो इससे देश की जनता के धन की भारी बचत होगी। सरकारें हमेशा चुनाव की उलझनों से मुक्त होकर जनता के विकास के कार्य कर सकेंगी। 

विज्ञापन


रिटायर्ड जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अध्यक्षता में गठित लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पहले दौर में पूरे देश की सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना बिल्कुल भी संभव नहीं है। आयोग ने इसके लिए दो फेज में चुनाव कराने की संस्तुति की है। पहले दौर में 2019 के आम चुनाव के साथ बारह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव कराने की सलाह दी गई है। इनमें पांच राज्य आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और तेलंगाना पहले ही अपना कार्यकाल लोकसभा के लगभग साथ-साथ खत्म करेंगे, इसलिए इनका चुनाव आम चुनाव के साथ कराए जाने में कोई परेशानी नहीं है।
विज्ञापन


इसके अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के राज्यों के चुनाव भी 2019 के आम चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं। लेकिन इन राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराने के लिए राजनीतिक सहमति की जरुरत होगी क्योंकि इन राज्यों का चुनाव सामान्य तरीके से लोकसभा के लगभग एक साल के बाद होने चाहिए। ऐसे में कौन सरकारें अपने कार्यकाल को कम करने पर सहमत होती हैं, यह अपने आप में बड़ा सवाल होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


असली परेशानी अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली में हो सकती है जहां केंद्र और केजरीवाल सरकार के साथ तनाव बना हुआ है। लेकिन बाकी तीन जगहों हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में भाजपा की ही सरकारें हैं, इसलिए इन राज्यों की विधानसभाओं को भंग कर चुनाव कराने में कोई परेशानी नहीं होने वाली है।

वहीं छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के चुनाव जनवरी 2019 में होने हैं। मिजोरम का चुनाव इसी साल के अंत तक हो जाना चाहिए। लॉ कमीशन के मुताबिक अगर इन राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल में कुछ महीनों की वृद्धि कर दी जाती है तो इनका चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराने में कोई अड़चन नहीं होने वाली है। हालांकि इसके लिए संविधान की धारा 172 में संशोधन करना पड़ेगा। 

अगर इन राज्यों का चुनाव लोकसभा के साथ होना तय भी हो जाता है तो भी देश के बाकी 16 राज्यों के चुनाव को लॉ कमीशन ने इस बार लोकसभा के साथ कराने को सही नहीं माना है। क्योंकि ऐसा करने से कई विधानसभाओं को सिर्फ एक से दो साल की समयावधि में ही भंग करना पड़ेगा जो किसी भी तरह उचित नहीं माना जा सकता।


लॉ कमीशन ने संस्तुति की है कि इससे बचने के लिए पहले दौर में साल 2019 के आम चुनाव के साथ तेरह राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके बाद बाकी 16 राज्यों के चुनाव पहली बार साल 2021 में कराया जा सकता है। इसके बाद 2024 के आम चुनाव के समय, जब 2019 में गठित विधानसभाएं अपना लगभग आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी होंगी, उनका चुनाव भी 2024 में आम चुनाव के साथ करवाया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed