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धुल रहा लिंगानुपात में हरियाणा और पंजाब का कलंक

Sun, 05 Mar 2017 08:43 PM IST
आशीष वर्मा/ अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/ अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 05 Mar 2017 08:43 PM IST
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The sex ratio in Haryana-Punjab

लिंगानुपात के मामले में बदनाम हरियाणा व पंजाब का कलंक धुलने लगा है। दोनों ही राज्यों में लिंगानुपात में काफी सुधार देखने को मिला है। हाल में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के मुताबिक, पंजाब ने दस सालों में लिंगानुपात में 126 प्वाइंट की बढ़ोतरी की है, जबकि हरियाणा ने 74 प्वाइंट की।

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साल 2005में पंजाब में एक हजार लड़कों के मुकाबले 734 लड़कियों का जन्म होता था, जबकि 2015  में 860  लड़कियों का। हरियाणा में भी कुछ ऐसी स्थिति थी। साल 2005 में हजार लड़कों के मुकाबले 762 लड़कियों का जन्म होता था, जो अब 836 तक पहुंच गया है।
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चंडीगढ़ पूरे उत्तर भारत में अव्वल 

लिंग अनुपात में चंडीगढ़ पूरे उत्तर भारत में पहले स्थान और देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16)  के मुताबिक, पिछले पांच सालों में एक हजार लड़कों के मुकाबले कुल 989  लड़कियों ने जन्म लिया है। जनगणना 2011 के मुताबिक (0-6 आयु वर्ग) चंडीगढ़ का लिंग अनुपात एक हजार लड़कों के मुकाबले 867 दर्ज किया था। चंडीगढ़ से आगे दादरा नगर हवेली है, जिसका लिंग अनुपात 1013  है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है इस इलाके का लिंग अनुपात पहले से ही काफी बेहतर रहा है।

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दिल्ली-उत्तराखंड में आई गिरावट 

The sex ratio in Haryana-Punjab
इन दोनों राज्यों की तस्वीर थोड़ी उलट आई है। दोनों जगह लिंगानुपात में गिरावट देखने को मिली है। साल 2005 में दिल्ली का लिंगानुपात 840  था, जो  2015 में 23 प्वाइंट गिरकर 897  पहुंच गया है। उत्तराखंड में भी 24  प्वाइंट की गिरावट देखी गई है। हालांकि हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू कश्मीर में बढ़ोतरी दिखी है। हिमाचल में 913 से 936 पहुंच गया है, जबकि जम्‍मू-कश्मीर में लिंगानुपात 902  से 922  पहुंच गया है। 
 
सुधार की और गुंजाइश 
विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों राज्यों में सुधार की और गुंजाइश है। सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि वो सभी मोर्चे पर काम करें। लोगों के बीच जागरूकता और फैलाई जाए। पीसीपीएनडीटी एक्ट को स ती से लागू किया जाए। एनजीओ को साथ में जोड़ा जाए। उनके साथ मिलकर छोटे-छोटे इलाकों में बांटकर काम किया जाए। इससे रिजल्ट और बेहतर निकल सकते हैं। चंडीगढ़ में जो कामकाज किया जा रहा है, उसे एक मॉडल के तौर पर अपनाया जा सकता है।
 
 
'प्रशासन की रणनीति और अधिकारियों व कर्मचारियों की मेहनत रंग लाई है। हमारा लक्ष्य चंडीगढ़ को और आगे ले जाने का है और इसके लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।'
 
- डॉ. राकेश कश्यप, डीएचएस चंडीगढ़
 
कहां कितना लिंगानुपात बढ़ा

               
                 2005-06            2015-16

हरियाणा       760                   836
पंजाब           734                   860
दिल्ली           840                   817
उत्तराखंड        912                  888
जम्‍मू-कश्मीर  902                  922
हिमाचल         913                  936
चंडीगढ़         --                       981




 
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