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एक नोबेल विजेता के मोहब्बत और संघर्ष की दास्तां

Tue, 11 Jul 2017 12:15 PM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Tue, 11 Jul 2017 12:15 PM IST
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The Love and Conflict Tales of a Nobel Laureate
लियो शियाओबो और लियो शिआ - फोटो : GETTY IMAGES
चीन के नोबेल पुरस्कार विजेता लियो शियाओबो ने अपने देश में राजनीतिक बदलाव की मांग के लिए कई साल जेल में गुज़ार दिए। लियो शियाओबो उस समय न्यूयॉर्क में थे। जब उन्होंने पहली बार तियानानमेन स्क्वेयर से लोकतंत्र की मांग वाले किसी विरोध प्रदर्शन के बारे में सुना। इसके बाद शियाओबो ने इस प्रदर्शन में खुलकर भाग लिया। कहानी एक गुरु-शिष्य के प्यार की।
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तियानानमेन में हुए प्रदर्शन के शांत होने के कुछ दिन बाद चीनी सरकार ने शियाओबो को एक गुप्त बंदीगृह में बंद कर दिया। वे वहां 20 महीनों तक कैद रहे और जब बाहर निकले तो वे अपना घर-नौकरी सब कुछ गवां चुके थे। शियाओबो की इस अंधियारी दुनिया में एक रोशनी की किरण के रूप में आई लियो शिआ नाम की एक युवा कवयित्री. शियाओबो ने अपने एक मित्र से कहा, "मुझे दुनिया की सारी सुंदरता उस एक महिला में मिल गई है"। उन्हें लियो शिआ से बेपनाह मोहब्बत हो गई थी।
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लियो शिआ एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता एक बैंक में उच्चाधिकारी थे। शियाओबो के चीनी सरकार के साथ तमाम राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शिआ के माता-पिता ने उनके प्रेम का समर्थन किया। शियाओबो ने शिआ के घर में रहना शुरू कर दिया था। लेकिन सुरक्षा एजेंट हमेशा शियाओबो पर अपनी नज़र रखते। एक बार शियाओबो के मित्र टिएनची ने उनसे पूछा कि वे अपना परिवार क्यों नहीं बढ़ाते। तब शियाओबो ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे अपने पिता को पुलिस हिरासत में देखें।
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The Love and Conflict Tales of a Nobel Laureate
लियो शियाओबो - फोटो : GETTY IMAGES
लियो शियाओबो और लियो शिआ दोनों ही चीन और चीन के बाहर मशहूर हैं। लियो शिआ के साथ उनकी शादी तो हुई। लेकिन उसके बाद आधे से ज़्यादा वक्त वो जेल में ही रहे और अब कैंसर ने उनकी ज़िंदगी के दिनों को कम कर दिया है। इस जोड़े को एक दूसरे से शादी करने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। चीनी सरकार की ओर से उन्हें शादी की इजाज़त देने के बाद भी उनकी मुश्किलें ख़त्म नहीं हुईं।
उनकी शादी के दौरान का एक वाकया है।

जिस कैमरे से उनकी शादी की तस्वीरें खींची जानी थी, वह कैमरा ही काम नहीं कर रहा था. बिना किसी तस्वीर के उन्हें चीनी मैरेज प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता। इस मुश्किल का हल निकालने के लिए लियो शियाओबो और उनकी होने वाली पत्नी लियो शिआ ने अपनी अलग-अलग तस्वीरों को एक साथ मिलाया और आख़िरकार वे आधिकारिक तौर पर पति-पत्नी बने।

वह 1996 का वक्त था। शादी करना इस जोड़े की एक छोटी-सी कामयाबी थी. इस शादी की मदद से लियो शिआ उत्तर-पूर्वी चीन के लेबर कैंप में बंद अपने पति से मुलाकात कर सकती थीं जिसके लिए उन्हें हर महीने बीजिंग से 1600 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। लेबर कैंप का कैफ़ेटेरिया उनकी शादी का भोज स्थल था। इस प्रेम कहानी में चीनी सरकार हर वक्त एक तीसरा पक्ष बनकर मौजूद रही. चीनी सरकार ने कभी ना बिछड़ने वाले इस जोड़े को अलग रखने की तमाम कोशिशें कीं. मिलने के बाद एक दिन भी शांति से नहीं गुज़रा।

शियाओबो को जब सरकार ने 11 साल के लिए जेल में डालने का फैसला लिया तब शिआ ने सुबकते हुए कहा, "मेरी ज़िंदगी में शियाओबो से मिलने के बाद एक दिन भी शांति से नहीं गुज़रा', वे अपने प्रेम में मौजूद दर्द को बयान कर रही थीं"।

The Love and Conflict Tales of a Nobel Laureate
लियो शियाओबो और लियो शिआ - फोटो : GETTY IMAGES
साल 2010 में शियाओबो को नोबेल शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया. उसके कुछ वक्त बाद ही शिआ को हाउस अरेस्ट कर दिया गया. शियाओबो और शिआ को कड़े सरकारी पहरे में एक-दूसरे से मिलने दिया जाता. उनकी बातों पर नज़र रखी जाती।

शियाओबो को अपनी पत्नी शिया के साथ रहने की इजाज़त तब मिली जब शियाओबो लीवर कैंसर से पीड़ित हो गए. उन्हें पैरोल पर उत्तरी चीन के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. शिआ ने चीन से बाहर अपना इलाज करवाने का प्रयास भी किया। शियाओबो के मित्र टिएंची कहते हैं, "मुझे चिंता होती है कि शियाओबो के ना रहने पर शिआ कैसे ज़िंदा रहेंगी, वह शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत कमज़ोर हो चुकी हैं, जबकि शियाओबो के पास अब ज़्यादा वक्त नहीं बचा है"।

यह बोलते हुए टिएंची रोने लगते हैं। शिआ बताती हैं, "1996 से 1999 के दौरान मैंने शियोओबो के नाम 300 से ज़्यादा पत्र लिखे। वहीं शियाओबो ने क़रीब 20 से 30 लाख शब्द मुझे लिखे, लेकिन हमारे घर पर हुई तमाम तलाशियों में ये सभी पत्र ग़ायब हो गए. यही हमारी ज़िंदगी है"।
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