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अधर में लटका तीन लाख कर्मचारियों का भविष्य

Mon, 09 Jan 2017 02:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कोलकाता
ब्यूरो/अमर उजाला, कोलकाता Updated Mon, 09 Jan 2017 02:39 AM IST
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The future of three lakh employees at risk

औद्योगिक व वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) के भंग होने से राज्य में विभिन्न बीमार इकाइयों के तीन लाख से भी ज्यादा कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इसकी जगह नए कानून के बारे में कोई जानकारी होने की वजह से अब इन कर्मचारियों को समय पर बकाया वेतन-भत्ता मिलने पर संदेह है। फिलहाल राज्य में बीआईएफआर और इसके अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष 414 मामले लंबित हैं।

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सूत्रों के मुताबिक इन लंबित मामलों में 318 निजी इकाइयां और 25 केंद्र सरकार के उपक्रम हैं। इनमें से निजी क्षेत्र की 69 कंपनियों के लिए पुनर्वास योजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। अगली कड़ी में 150 कंपनियों को बीआईएफआर की प्राथमिकता सूची में रखा गया था। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि दिल्ली दफ्तर 265 मामलों की निगरानी कर रहा है। फिलहाल 117 मामलों में शीघ्र फैसले की पैरवी की जा रही है।

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वेतन-भत्तों के तौर पर कर्मचारियों का 350 करोड़ से भी ज्यादा बकाया

The future of three lakh employees at risk
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सरकारी उपक्रम बर्न स्टैंडर्ड की कर्मचारी यूनियन के पूर्व महासचिव अनुतोष बनर्जी कर्मचारियों के बकाए को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि बकाए का निपटान बीआईएफआर करता था, लेकिन अब यह कहना मुश्किल है कि नए कानून के तहत क्या होगा। बर्न स्टैंडर्ड में वेतन-भत्तों के तौर पर कर्मचारियों का 350 करोड़ से भी ज्यादा बकाया है। 

उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत निपटान की प्रक्रिया तेज करने और अगर पुनरुद्धार संभव नहीं हुआ तो कंपनी को बंद करने का प्रावधान है। वैसी हालत में बेरोजगार मजदूरों का क्या होगा, इस बारे में प्रावधान साफ नहीं हैं। तृणमूल कांग्रेस से संबद्ध आईएनटीटीयूसी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बनर्जी ने भी यह मुद्दा उठाया है।

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