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देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील ने कहा- अभी 36 की हूं, जज बनना है आखिरी सपना
एजेंसी, चेन्नई
Updated Mon, 02 Jul 2018 08:18 AM IST
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शर्मिला (फाइल फोटो)
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जिन ट्रांसजेंडरों को हम सामाजिक रूप से स्वीकार तक नहीं करते हैं, क्या उन्हें कभी जज बनते देख पाएंगे। दरअसल देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील सत्य श्री शर्मिला का सपना है कि वह एक जज बनें। शर्मिला तमिलनाडु के रामानथपुरम जिले की रहने वाली हैं।
शर्मिला ने कहा कि एक ट्रांसजेंडर होकर बार काउंसिल में वकील के रूप में नाम दर्ज कराकर मैंने जो मील का पत्थर छुआ है, उसे मैं पिछले एक दशक से हासिल करना चाहती थी। शर्मिला देश के 400 से अधिक उन कानून स्नातकों में से हैं, जिन्होंने शनिवार को तमिलनाडु और पुदुचेरी में वकील के रूप में अपना नाम पंजीकृत कराया। उन्होंने कहा, ‘मैं अब 36 साल की हूं। मैं कठिन परिश्रम करूंगी, छोटी-छोटी चीजों को सीखूंगी और एक दिन मैं जज बनूंगी।’
शर्मिला ने 2007 में सलेम के सेंट्रल लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने कहा कि वह चाहती तो 2008 में ही अपना पंजीकरण करा सकती थीं, मगर उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया ताकि उनका नाम एक ट्रांसजेंडर के रूप में दर्ज हो सके। वहीं शर्मिला के पंजीकरण कार्यक्रम में जस्टिस पीएन प्रकाश ने कहा कि यह उनकी इच्छा हैं कि वे अपने पूरे कार्यकाल में हाईकोर्ट में कोई एक ट्रांसजेंडर जज देख सकें।
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शर्मिला ने कहा कि एक ट्रांसजेंडर होकर बार काउंसिल में वकील के रूप में नाम दर्ज कराकर मैंने जो मील का पत्थर छुआ है, उसे मैं पिछले एक दशक से हासिल करना चाहती थी। शर्मिला देश के 400 से अधिक उन कानून स्नातकों में से हैं, जिन्होंने शनिवार को तमिलनाडु और पुदुचेरी में वकील के रूप में अपना नाम पंजीकृत कराया। उन्होंने कहा, ‘मैं अब 36 साल की हूं। मैं कठिन परिश्रम करूंगी, छोटी-छोटी चीजों को सीखूंगी और एक दिन मैं जज बनूंगी।’
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शर्मिला ने 2007 में सलेम के सेंट्रल लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने कहा कि वह चाहती तो 2008 में ही अपना पंजीकरण करा सकती थीं, मगर उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया ताकि उनका नाम एक ट्रांसजेंडर के रूप में दर्ज हो सके। वहीं शर्मिला के पंजीकरण कार्यक्रम में जस्टिस पीएन प्रकाश ने कहा कि यह उनकी इच्छा हैं कि वे अपने पूरे कार्यकाल में हाईकोर्ट में कोई एक ट्रांसजेंडर जज देख सकें।
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