फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   The central government assured that when the delimitation process will be completed, then elections will be held in jammu kashmir

जम्मू-कश्मीर परिसीमन: पहाड़, पंडित, मुस्लिम और पश्चिमी पाकिस्तानी, ये सब 'जम्मू' में हैं, लेकिन सीटों में 'कश्मीर' आगे

Sat, 10 Jul 2021 05:06 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 10 Jul 2021 05:06 PM IST
सार

जम्मू संभाग के दस जिले 28600 वर्ग किलोमीटर के दायरे में हैं, जबकि कश्मीर संभाग के दस जिले 16350 वर्ग किलोमीटर में आते हैं। जम्मू में 37 विधानसभा सीटें हैं, जबकि यहां एक सीट का औसतन क्षेत्र 773 वर्ग किलोमीटर रहता है। दूसरी तरफ कश्मीर में 46 विस सीटें हैं...

विज्ञापन
The central government assured that when the delimitation process will be completed, then elections will be held in jammu kashmir
परिसीमन आयोग जम्मू और कश्मीर - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि पहले परिसीमन का काम पूरा होगा और उसके बाद चुनाव होंगे। दोबारा से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का भरोसा भी प्रधानमंत्री की ओर से मिला है। राजनीतिक दलों के साथ परिसीमन आयोग की पहली बैठक हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने सुझाव दिया कि इन दोनों संभागों में 45-45 सीटें बांट दी जाएं। डोगरा सदर सभा ने जम्मू को 49 विधानसभा सीटें देने की मांग की। एनसीपी और कांग्रेस पार्टी ने भी जम्मू को उसका वाजिब हिस्सा देने की बात कही है।

विज्ञापन


जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, पहाड़, पंडित, मुस्लिम और पश्चिमी पाकिस्तान से आकर बसे लोग, ये सब तो 'जम्मू' में हैं, लेकिन विधानसभा सीटों की संख्या में 'कश्मीर' आगे है। जम्मू संभाग के दस जिले 28600 वर्ग किलोमीटर के दायरे में हैं, जबकि कश्मीर संभाग के दस जिले 16350 वर्ग किलोमीटर में आते हैं। जम्मू में 37 विधानसभा सीटें हैं, जबकि यहां एक सीट का औसतन क्षेत्र 773 वर्ग किलोमीटर रहता है। दूसरी तरफ कश्मीर में 46 विस सीटें हैं। एक विधानसभा सीट 355 वर्ग किलोमीटर दायरे में सिमटी है। जम्मू में एक विधानसभा सीट पर 143300 जनसंख्या है तो वहीं कश्मीर में यह आंकड़ा 116400 रहता है।

विज्ञापन

परिसीमन आयोग की बैठक में पीडीपी ने भाग नहीं लिया। सज्जाद लोन की पीपल्स पार्टी को छोड़कर बाकी राजनीतिक दलों का कहना था कि परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना पर नहीं होनी चाहिए। यह नई जनगणना के आधार पर हो। डोगरा सदर सभा ने तो जम्मू संभाग के लिए 49 विधानसभा सीटों की मांग रख दी। शुरू से ही जम्मू संभाग के साथ भेदभाव हुआ है। आजादी के बाद 1947 में जब विलय की प्रक्रिया पूरी हुई तो कश्मीर में 43 सीटें और जम्मू के लिए 30 सीटें आवंटित कर दी गईं। वही मामला आज तक चल रहा है।

कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, आप किसी भी एंगल से देखें, जम्मू संभाग ही परिसीमन के हिसाब से हावी पड़ता है। यह अलग बात है कि बहुत से तथ्यों को दरकिनार कर कश्मीर संभाग को अधिक सीटें दे दी गईं। परिसीमन आयोग को यह देखना चाहिए कि जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था, तो बहुत से मुस्लिम परिवार जम्मू में आकर बस गए। उसी दौर में कश्मीरी पंडित भी जम्मू संभाग में चले आए। पश्चिमी पाकिस्तान से आए लोग, जिन्हें अभी तक विधानसभा चुनाव में वोट का अधिकार नहीं था, वे भी जम्मू संभाग में ही रह रहे हैं। जम्मू में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या भी अब अच्छी खासी हो गई है।

जम्मू-कश्मीर की अधिकांश राजनीतिक पार्टियां भी ये बात जानती हैं कि जम्मू के साथ भेदभाव हो रहा है। उनमें से कुछ पार्टियां बोल देती है तो बाकी मौन साध लेती हैं। संसाधनों, दूरी, मुश्किलों और जनसंख्या के हिसाब से देखेंगे तो जम्मू संभाग ही कश्मीर पर भारी पड़ता है। कैप्टन अनिल गौर के मुताबिक, कश्मीर में तीन लोकसभा सीटें हैं, जबकि जम्मू में दो हैं। कश्मीर में एक लोकसभा सीट का दायरा 5450 वर्ग किलोमीटर का है। अगर जनसंख्या की बात करें तो वह 1783060 है। वहीं जम्मू में एक लोकसभा सीट 14300 वर्ग किलोमीटर के दायरे में आती है, जबकि जनसंख्या 2675400 है। मौजूदा स्थिति में दस जिले जम्मू संभाग और दस जिले कश्मीर संभाग में आते हैं। जम्मू का एक जिला 2860 वर्ग किलोमीटर में पड़ता है, तो वहीं कश्मीर का एक जिला 1635 वर्ग किलोमीटर में आता है।

जम्मू संभाग में उधमपुर, डोडा, पुंछ, राजौरी व किश्तवाड़ आदि पहाड़ी इलाके हैं। कश्मीर में ज्यादातर जिले मैदानी भाग में आ जाते हैं। बारामुला ही पहाड़ियों वाला जिला है। श्रीनगर 300 वर्ग किलोमीटर में सिमटा हुआ है, जबकि जम्मू 3000 वर्ग किलोमीटर में जा पहुंचा है। पहाड़ी इलाके में अगर कोई सड़क बनती है तो उसका खर्च मैदानी इलाके से दस गुना अधिक होता है। अब ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार फंड बराबर देती है। ऐसे में जम्मू संभाग, विकास के मामले में पिछड़ जाता है। डोडा, पुंछ, राजौरी व किश्तवाड़ अभी विकास में मामले बहुत पीछे हैं। किश्तवाड़ 7800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

विज्ञापन

2011 की जनगणना के मुताबिक, जम्मू संभाग में 37 सीटें हैं और कश्मीर में 46 हैं। परिसीमन के बाद सात सीटें बढ़ सकती हैं। अनिल गौर कहते हैं, परिसीमन आयोग को हर परिस्थिति पर गौर करने के बाद विधानसभा सीटों की संख्या घटानी-बढ़ानी चाहिए। जम्मू में क्षेत्रफल बहुत ज्यादा है, दूरदराज तक फंड नहीं पहुंच पाता। विकास में मामले में कुछ इलाके तो पूरी तरह पिछड़ गए हैं। अनिल गौर का दावा है कि साल 2011 की जनगणना के दौरान गलत आंकड़े पेश किए थे। करीब दस लाख वोटों को कश्मीर में दिखा दिया गया। इसी वजह से कई राजनीतिक दलों ने परिसीमन आयोग के समक्ष कहा है कि वह 2011 की जनगणना के अनुसार परिसीमन प्रक्रिया शुरू न करे। यह परिसीमन निष्पक्ष नहीं होगा।

आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई ने कहा, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है। इसकी निष्पक्षता को लेकर किसी को भ्रम में नहीं रहना चाहिए। परिसीमन आयोग पीओजेके के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में रिक्त रखी गई 24 सीटों पर कोई विचार नहीं कर रहा है। यह उसके क्षेत्राधिकार का विषय नहीं है। परिसीमन को लेकर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मार्च 2022 तक दे देगा। चूंकि यह परिसीमन, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत हो रहा है, इसलिए 2011 की जनसंख्या को ही आधार मानकर अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed