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Drone War: दुश्मन की चालाकियों को तोड़ती आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की लड़ाई, दुनिया में बढ़ी ड्रोन की मांग

Wed, 03 Aug 2022 08:45 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 03 Aug 2022 08:45 PM IST
सार

एक जटिल और गोपनीय ऑपरेशन को अंजाम देकर ड्रोन के सहारे दो हेलफायर मिसाइल को इस्तेमाल करके अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के बाद चुनौती बने जवाहिरी को हमेसा के लिए सुला दिया।

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The battle of artificial intelligence, it increases the price and demand of drones in the world
ड्रोन - फोटो : social media

विस्तार

ईरान में सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के बाद दूसरे नंबर के ताकतवर जनरल कासिम सुलेमानी 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट से दो कारों के काफिले में जा रहे थे। उनके साथ कताइब हिजबुल्लाह के नेता अबू महंदी अल मुहांदिस थे और अमेरिकी ड्रोन ने निशाना बना दिया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जनरल सुलेमानी के मारे जाने की घोषणा की और दुनिया स्तब्ध रह गई। अमेरिका ने दूसरी बार चौंकाया। उसने अल कायदा के आतंकी आयमन अल-जवाहिरी को काबुल में अपने अत्याधुनिक ड्रोन से मार गिराया। अमेरिका ने इससे पहले भी ड्रोन की मार्केट को पंख लगाए हैं। आज से एक दशक पहले पाकिस्तान की सीमा में तालिबानी आतंकियों को ठिकाने लगाने के लिए उसने ड्रोन से उन्हें निशाना बनाया था।

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दुनिया के लिए अपने आप में अजूबा है अल-जवाहिरी का खात्मा
पूरी दुनिया में सीआईए सीक्रेट ऑपरेशन के लिए अपना लोहा मनवा रही है। सीआईए, इस्राइल की मोसाद और रूस की केजीबी के अपने निराले तरीके हैं। अल जवाहिरी को मारे जाने के ऑपरेशन का सीक्रेट और गहराई तक की खबरें कुछ दिन बाद सामने आएंगी। लेकिन एक जटिल और गोपनीय ऑपरेशन को अंजाम देकर ड्रोन के सहारे दो हेलफायर मिसाइल को इस्तेमाल करके अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के बाद चुनौती बने जवाहिरी को हमेसा के लिए सुला दिया। ड्रोन से छोड़ी जाने वाली यह हेलफायर मिसाइल भी अपने आप में नायाब है। भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बलविंदर सिंह संधू कहते हैं कि इसमें से आवाज नहीं निकलती। छुरे जैसी ब्लेड निकलती है और सटीक निशाना लगाकर दुश्मन का खात्मा कर देती है। यानी आस-पास भी लोगों को भनक नहीं लगती और ड्रोन लक्ष्य भेदकर वापस लौट जाता है। ऐसे ऑपरेशन में मशीन, तकनीक और तकनीक के पीछे बैठकर कमान दे रहे दिमाग का शानदार कौशल काम करता है।
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दुनिया में सैन्य आधुनिकीकरण का पैमाना बदल रही है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस
अब हर देश को अपनी सैन्य क्षमता को मारक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बताते हैं भारत ने भी इसको लेकर गंभीरता से प्रयास शुरू कर दिया है। पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी इसके लिए तुर्की समेत कई देशों से संपर्क साधा है। बताते हैं आर्मीनिया, अजरबैजान के युद्ध और रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी लड़ाई ने इसका पैमाना बदलकर रख दिया है। भारतीय सेना के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध पद्धति पर काम करने वाले वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि अमेरिका, इस्राइल, ईरान, तुर्की समेत कुछ देशों के ड्रोन तकनीक की मांग काफी बढ़ गई है। सैन्य क्षमता में इजाफा के लिए तुर्की के ड्रोन बेरक्तार का इस्तेमाल विश्व के14 देश कर रहे हैं। वायुसेना के पूर्व अधिकारी एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अब छोटे लेकिन घातक हथियारों की मांग बढ़ी है। एनबी सिंह हाल में ग्रीस और रूस से लौटे हैं। बताते हैं कि दुनिया में भारी भरकम हथियारों से होने वाली लड़ाई का तरीका बदल रहा है। एनबी सिंह कहते हैं कि 10-12 साल पहले ही इस तरह के कयास थे कि आने वाले समय में बड़े युद्ध कम होंगे। अब युद्ध जैविक, रसायनिक जैसे घातक हथियारों वाले या फिर छद्म युद्ध अथवा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के सहारे छोटी मशीनों से लड़े जाने वाले युद्ध की संभावना अधिक रहेगी। जहां बड़े पैमाने पर सैनिकों की नहीं बल्कि मशीन के पीछे कमांड देने वाले इंटेलीजेंट दिमाग की जरूरत होगी।
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यूक्रेन और रूस के युद्ध ने बदल दिए युद्ध के पुराने मानदंड
रूस की भारी भरकम सेना और अत्याधुनिक युद्धक टैंकों के घातक काफिले ने जब यूक्रेन की सीमा में प्रवेश किया था तो रूस के सैन्य कमांडरों समेत विश्व के तमाम सैन्य विशेषज्ञों के अनुमान कुछ और थे। सभी को लग रहा था कि जल्द यूक्रेन घुटने टेक देगा। लेकिन जब यूक्रेन की सेना ने तुर्की के बरक्तार टी-2बी ड्रोन के सहारे लेजर गाइडेड बम से सटीक निशाना लगाकर रूस के काला सागर में खड़े  नौसैनिक बेड़े को उड़ा दिया तो क्रेमलिन(रूस) की आंखों के सामने कुछ पल के लिए अंधेरा छा गया। एयर वाइस मार्शल एन बी सिंह के मुताबिक, दरअसल तब रूस के सैन्य कमांडरों को इसका कोई अनुमान ही नहीं था। यूक्रेन ने एक के बाद एक रूस के कई अत्याधुनिक टैंक को तुर्की से खरीदे गए ड्रोन से निशाना बनाया। टैंकों के काफिले में चल रहे टारगेट को चुनकर उन्हें ध्वस्त कर दिया।

यूक्रेन-रूस के युद्ध पर नजर रख रहे सेना मुख्यालय के एक अन्य सूत्र का कहना है कि अब लड़ाई परंपरागत दायरे से निकलकर तकनीक और मशीन के तालमेल पर टिक गई है। यूक्रेन जहां दुनिया के देशों से छोटे हथियार और तरह-तरह के ड्रोन की मांग कर रहा है और क्राउड फंडिंग पर जोर दे रहा है, वहीं रूस भी ड्रोन के सहारे मिसाइलों से गाइडेड हमले कर रहा है। रूस के ड्रोन यूक्रेन के क्षेत्र में अपना टारगेट ढूंढते हैं। इसकी सूचना मिलिट्री ऑपरेशन बेस को दी जाती है और कुछ ही मिनटों में टारगेट को ध्वस्त कर दिया जाता है। इसके अलावा रूस की सेना इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों के सहारे टारगेट को निशाना बनाने वाली स्टुपोर राइफल का प्रयोग कर रही है। ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी का कहना है कि इससे रूस की सेना ड्रोन को निशाना बना रही है। क्योंकि इस राइफल से उठने वाली तरंगे ड्रोन की जीपीएस प्रणाली काम नहीं कर पाती और उन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।


चीन को भी ड्रोन तकनीक में महारत हासिल, भारत समेत दुनिया के कई देशों को इंतज़ार 
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के पास उम्दा ड्रोन तकनीक है। छोटे से लेकर बड़े और निगरानी से मारक ड्रोन पर चीन के रक्षा तकनीशियनों ने काम किया है। ड्रोन की तकनीक में इस्राइल और अमेरिका ने काफी नई तकनीक विकसित की है। इसके अलावा ईरान के शाहिद ड्रोन की मांग है। रूस अभी यूक्रेन में ओमरान यूएवी का प्रयोग कर रहा है। यह छोटे आकार का शानदार निगरानी ड्रोन है और इससे रूस के सैन्य कमांडर अपनी मिसाइल फायर प्रणाली को जोड़कर हमला करने का नायाब उदाहरण दे रहे हैं। बताते हैं कि सैन्य आधुनिकीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने तेजी से पांव पसार लिए हैं। अब लेजर गाइडेड बम, रूस की एस-400 और अमेरिका की पैट्रियट प्रतिरक्षी प्रणाली से आगे  सोचा जा रहा है। बताते हैं आने वाले समय में सैनिक का स्थान रोबोट ले सकते हैं और फाइटर के स्थान पर ड्रोन के जरिए युद्ध को जीतने की कोशिश होगी।


 

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