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पुखरायां रेल हादसे में आतंकी-नक्सली गठजोड़ का शक

Sat, 21 Jan 2017 04:57 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कानपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 21 Jan 2017 04:57 AM IST
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terror maoist nexus behind the train derailment in Pukhrayan
- फोटो : social media

पुखरायां रेल हादसे में आतंकी साजिश का खुलासा होने के बाद अब आतंकी-नक्सली गठजोड़ का भी शक गहरा रहा है। ट्रेन हादसे की साजिश में शामिल नेपाल में मारे गए अपराधी दीपक राम के नाम से यह गठजोड़ सामने आ रहा है क्योंकि कानपुर में 8 फरवरी 2010 को जो आठ नक्सली पकड़े गए थे उनमें से एक का नाम भी दीपक राम था। वो दीपक राम जमानत पर छूट चुका है और अब कहां है, पुलिस को नहीं मालूम। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि कहीं नेपाल में मारा गया दीपक राम और नक्सली दीपक राम एक ही व्यक्ति तो नहीं हैं। अगर एक हैं तो इसका मतलब आतंकी-नक्सली गठजोड़ हो चुका है।

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नौबस्ता क्षेत्र में नक्सली कृपाशंकर, बंशीधर उर्फ चिंतक, दीपक राम, राजेंद्र दास, शिवराज सिंह, नवीन उर्फ अशोक, बच्चा प्रसाद और बलराज को पकड़ा गया था। इनके पास से भारी मात्रा में नक्सली साहित्य, नक्शे और अन्य तमाम आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद हुई थीं। दीपकराम ने अपना पता समस्तीपुर बिहार बताया था। वह जमानत पर रिहा हो चुका है। अब पुलिस उसके बारे में छानबीन कर रही है।
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से जुड़े लोगों लोगों से पूछताछ की, लेकिन हत्यारों का क्लू नहीं मिला है। बिहार के मोतिहारी में आईएसआई से जुड़े मोती पासवान के पकड़े जाने के बाद पुलिस इस मामले को उससे जोड़ कर देख रही है। पुलिस वारदात में शामिल स्थानीय बदमाशों के साथ ही बिहार के लिंक भी तलाशने में जुट गई है। पुलिस राजू के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने में लगी है।

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कहां गया बांग्लादेशी कमरुउद्दीन

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31 दिसंबर की आथी रात के बाद मंधना में ट्रेन पलटाने की साजिश का खुलासा होने के बाद से संदिग्ध बांग्लादेशी कमरुउद्दीन गायब है। वह 10 जनवरी को मंधना में बांग्लादेशियों की बस्ती में ठिकाना खोजने आया था। सीबीआई और एटीएस की टीम को कमरुउद्दीन के बारे में पता चला तो उसकी काफी खोजबीन हुई, लेकिन कुछ पता नहीं चला। कमरुउद्दीन के गुम होने के बाद बस्ती में रहने वाले बांग्लादेश के 10 लोगों के पासपोर्ट और आईकार्ड पुलिस ने जमा करा लिए हैं।

मंधना में 31 दिसंबर की रात रेल पटरी काटने और पैंड्रॉल क्लिप निकाले जाने की घटना हुई थी। रेल अफसरों ने इसे ट्रेन पलटाने की साजिश माना था। छानबीन के दौरान जांच एजेंसियों को मंधना के दीपू ने बताया था कि 10 जनवरी को बांग्लादेश की राजधानी ढाका का कमरुउद्दीन उनके पास किराए पर जगह मांगने आया था।

बांग्लादेशी नागरिक होने की वजह से उन्होंने कमरुउद्दीन को जगह देने से मना कर दिया था। इसके बाद वह कहां गया, पता नहीं है। मंधना मामले की जांच में जुटे एक पुलिस अफसर का कहना है कि कमरुउद्दीन की काफी खोजनबीन की गई, लेकिन सुराग नहीं मिला है। उसका पता लगाया जा रहा है। 

 

एटीएस की एक टीम मोतिहारी में डटी

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आईएसआई से जुड़े मोती पासवान से पूछताछ कर एटीएस कानपुर और सीओ कल्याणपुर संजीव दीक्षित टीम के संग शुक्रवार सुबह शहर लौट आए। आईजी एटीएस असीम अरुण की एक टीम अभी मोतिहारी में डटी है। यह टीम मोती पासवान से चल रही पूछताछ पर नजर रख रही है। साथ ही उससे खुद भी पूछताछ कर रही है। स्थानीय पुलिस और एटीएस अफसरों का कहना है कि मोती पासवान से मिले क्लू के आधार पर शहर और आसपास के जिलों के कुछ लोगों के बारे में तहकीकात की जा रही है।


राजू खान की हत्या से लिंक की तलाश
चकेरी केकोयला नगर निवासी मोतिहारी निवासी स्क्रैप कारोबारी राजू खान की हत्या और लूट के मामले में 12 दिन बाद भी पुलिस के साथ खाली हैं। पुलिस ने शक के आधार पर तमाम कबाड़ियों और राजू से जुड़े लोगों लोगों से पूछताछ की, लेकिन हत्यारों का क्लू नहीं मिला है। बिहार के मोतिहारी में आईएसआई से जुड़े मोती पासवान के पकड़े जाने के बाद पुलिस इस मामले को उससे जोड़ कर देख रही है। पुलिस वारदात में शामिल स्थानीय बदमाशों के साथ ही बिहार के लिंक भी तलाशने में जुट गई है। पुलिस राजू के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने में लगी है।

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