{"_id":"5b926d24867a557ea65a470e","slug":"telangana-10-facts-over-kcr-bjp-and-congress","type":"story","status":"publish","title_hn":"भड़के केसीआर के कांग्रेस-भाजपा पर 10 बड़े हमले, चुनाव आयोग दे सकता है मुसीबत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भड़के केसीआर के कांग्रेस-भाजपा पर 10 बड़े हमले, चुनाव आयोग दे सकता है मुसीबत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Updated Fri, 07 Sep 2018 06:05 PM IST
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तेलंगाना विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव गुरुवार को कैबिनेट द्वारा पारित हो गया। तेलंगाना सरकार भंग होने के बाद राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर अब सबकी नजर चुनाव आयोग की तरफ है।
राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि टीआरएस सरकार का कार्यकाल मई 2019 तक का था, लेकिन राव इस साल के अंत में चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही तेलंगाना का भी चुनाव कराना चाह रहे थे, इसीलिए उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की है।
लेकिन हम आपको बता रहे हैं तेलंगाना विधानसभा भंग होने से पहले और भंग होने के बाद राज्य की सत्ता में अबतक क्या-क्या घटनाक्रम रहा।
1. मैं तेलंगाना की जनता के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। राज्य के बेहतर विकास के लिए मैं मुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल बीच में ही खत्म कर रहा हूं।
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2. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश का 'सबसे बड़ा मसखरा' करार दिया है। कहा कि 'राहुल को कांग्रेस की सल्तनत विरासत में मिली है। वह दिल्ली के कांग्रेस साम्राज्य के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। इसलिए मैं लोगों से अपील करता हूं कि हम दिल्ली में कांग्रेस के गुलाम नहीं बने। तेलंगाना का हर फैसला तेलंगाना में होना चाहिए न कि दल्ली में।'
3. भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी 100 प्रतिशत धर्म निरपेक्ष हैं। इसलिए भाजपा के साथ जाने का सवाल नहीं उठता।'
4. यह सच है कि हमारे केंद्र की एनडीए सरकार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। जो कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच औपचारिक संबंध से ज्यादा कुछ नहीं है।
5. भाजपा के साथ चुनाव लड़ने की खबर उस वक्त सुर्खियों में आई जब चंद्रशेखर राव ने अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात पर उन्होंने कहा था कि तेलंगाना का मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने पीएम से मुलाकात की।
6. तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल जून 2019 तक था। लेकिन मुख्यमंत्री राव चाहते हैं कि इस साल के अंत में 4 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही इस राज्य के चुनाव करा लिए जाएं। साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में एक साथ विधानसभा चुनाव होने हैं।
7. भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने बृहस्पतिवार को कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीआरएस के बीच सीधा मुकाबला होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ही टीआरएस के लिए मुख्य चुनौती होगी, क्योंकि जनता कांग्रेस को अस्वीकार कर चुकी है। भाजपा एकमात्र पार्टी है जिसके बाद शासन करने के लिए सकारात्मक एजेंडा है। तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबला होता है तो निश्चिततौर पर भाजपा को इसका लाभ मिलेगा।
8. भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी का राज्य में में ऐतिहासिक रूप से बेहतर जन आधार रहा है। 1998 में भाजपा ने 24 प्रतिशत वोट जीते थे। हमारी राज्य इकाई किसी भी समय चुनाव में उतरने के लिए तैयार है।
9. तेलंगाना में कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है लेकिन टीआरएस ने पिछले चार वर्षों में राज्य में अपनी बेहतरीन पकड़ बनाई है।
10. चुनाव आयोग को अब निर्णय लेना है कि इस साल के अंत में 4 राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही तेलंगाना चुनाव की भी घोषणा करनी है या नहीं।
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राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि टीआरएस सरकार का कार्यकाल मई 2019 तक का था, लेकिन राव इस साल के अंत में चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही तेलंगाना का भी चुनाव कराना चाह रहे थे, इसीलिए उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की है।
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लेकिन हम आपको बता रहे हैं तेलंगाना विधानसभा भंग होने से पहले और भंग होने के बाद राज्य की सत्ता में अबतक क्या-क्या घटनाक्रम रहा।
1. मैं तेलंगाना की जनता के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। राज्य के बेहतर विकास के लिए मैं मुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल बीच में ही खत्म कर रहा हूं।
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2. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश का 'सबसे बड़ा मसखरा' करार दिया है। कहा कि 'राहुल को कांग्रेस की सल्तनत विरासत में मिली है। वह दिल्ली के कांग्रेस साम्राज्य के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। इसलिए मैं लोगों से अपील करता हूं कि हम दिल्ली में कांग्रेस के गुलाम नहीं बने। तेलंगाना का हर फैसला तेलंगाना में होना चाहिए न कि दल्ली में।'
3. भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी 100 प्रतिशत धर्म निरपेक्ष हैं। इसलिए भाजपा के साथ जाने का सवाल नहीं उठता।'
4. यह सच है कि हमारे केंद्र की एनडीए सरकार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। जो कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच औपचारिक संबंध से ज्यादा कुछ नहीं है।
5. भाजपा के साथ चुनाव लड़ने की खबर उस वक्त सुर्खियों में आई जब चंद्रशेखर राव ने अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात पर उन्होंने कहा था कि तेलंगाना का मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने पीएम से मुलाकात की।
6. तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल जून 2019 तक था। लेकिन मुख्यमंत्री राव चाहते हैं कि इस साल के अंत में 4 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही इस राज्य के चुनाव करा लिए जाएं। साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में एक साथ विधानसभा चुनाव होने हैं।
7. भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने बृहस्पतिवार को कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीआरएस के बीच सीधा मुकाबला होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ही टीआरएस के लिए मुख्य चुनौती होगी, क्योंकि जनता कांग्रेस को अस्वीकार कर चुकी है। भाजपा एकमात्र पार्टी है जिसके बाद शासन करने के लिए सकारात्मक एजेंडा है। तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबला होता है तो निश्चिततौर पर भाजपा को इसका लाभ मिलेगा।
8. भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी का राज्य में में ऐतिहासिक रूप से बेहतर जन आधार रहा है। 1998 में भाजपा ने 24 प्रतिशत वोट जीते थे। हमारी राज्य इकाई किसी भी समय चुनाव में उतरने के लिए तैयार है।
9. तेलंगाना में कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है लेकिन टीआरएस ने पिछले चार वर्षों में राज्य में अपनी बेहतरीन पकड़ बनाई है।
10. चुनाव आयोग को अब निर्णय लेना है कि इस साल के अंत में 4 राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही तेलंगाना चुनाव की भी घोषणा करनी है या नहीं।