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Sabrimala Temple: सबरीमाला में सोना चोरी पर बड़ा एक्शन, टीडीबी ने वरिष्ठ अधिकारी को किया निलंबित
Tue, 07 Oct 2025 05:23 PM IST
लव. गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव. गौर
Updated Tue, 07 Oct 2025 05:23 PM IST
सार
सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी मामले में बड़ा एक्शन लिया है। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने एक वरिष्ठ अधिकारी को निलंबित कर दिया है। जांच लंबित रहने तक अधिकारी को निलंबित किया गया है।
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सबरीमाला में सोना चोरी मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी को किया निलंबित
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल में स्थित प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर में सोने की कथित चोरी को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है। सबरीमाला अय्यप्पन मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने मंगलवार को मंदिर की 'द्वारपालक' मूर्तियों पर स्वर्ण-पल्लवन (सोने की परत) में कथित अनियमितताओं को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी को निलंबित कर दिया है।
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने जारी किया बयान
टीडीबी ने एक बयान में कहा कि वर्तमान में उप देवस्वोम आयुक्त (हरिपद) के रूप में कार्यरत बी मुरारी बाबू को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है। बयान में आगे कहा गया है कि पहाड़ी मंदिर में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत रहते हुए बी मुरारी बाबू ने 17 जुलाई, 2019 को सबरीमाला कार्यकारी अधिकारी को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करके एक "गंभीर चूक" की, जिसमें मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर पाई गई स्वर्ण-पल्लवन वाली द्वारपालक मूर्तियों को गलत तरीके से ताम्र-पल्लवन वाली बताया गया था।
इससे पहले अलप्पुझा में पत्रकारों से बात करते हुए मुरारी बाबू ने आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि टीडीबी ने अभी तक उनसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा है। उन्होंने दावा किया, "उस समय मैंने मंदिर के तंत्री की राय लेने के बाद प्रक्रियाओं के अनुसार एक प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। उस रिपोर्ट में मैंने लिखा था कि यह एक ताम्रपत्र था... मैंने ऐसा क्यों लिखा? क्योंकि यह एक ताम्रपत्र था। उसमें ताम्रपत्र पूरी तरह से साफ था। इसलिए इसे चढ़ाने का निर्देश दिया गया था।"
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जांच के लिए एसआईटी का गठन
इससे पहले सोमवार को केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला में संरक्षक देवता की मूर्तियों पर लगे स्वर्ण-आवरण वाले ताम्रपत्रों के कम वजन से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का निर्देश दिया। बता दें कि इस साल उच्च न्यायालय को सूचित किए बिना आवरणों को फिर से स्वर्ण-आवरण के लिए भेजने के निर्णय पर अदालती कार्यवाही के दौरान वजन में कमी का मामला सामने आया।
यह पता चला कि जब 2019 में भगवान अयप्पा मंदिर से आवरणों को स्वर्ण-आवरण के लिए आखिरी बार हटाया गया था, तो उनका वजन लगभग 4.5 किलोग्राम कम हो गया था, एक ऐसा तथ्य जिसकी सूचना देवस्वओम अधिकारियों ने नहीं दी थी। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. टी. शंकरन की देखरेख में सबरीमाला मंदिर में सोने सहित सभी मूल्यवान वस्तुओं की एक व्यापक सूची बनाने का आदेश दिया था।
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त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने जारी किया बयान
टीडीबी ने एक बयान में कहा कि वर्तमान में उप देवस्वोम आयुक्त (हरिपद) के रूप में कार्यरत बी मुरारी बाबू को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है। बयान में आगे कहा गया है कि पहाड़ी मंदिर में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत रहते हुए बी मुरारी बाबू ने 17 जुलाई, 2019 को सबरीमाला कार्यकारी अधिकारी को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करके एक "गंभीर चूक" की, जिसमें मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर पाई गई स्वर्ण-पल्लवन वाली द्वारपालक मूर्तियों को गलत तरीके से ताम्र-पल्लवन वाली बताया गया था।
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इससे पहले अलप्पुझा में पत्रकारों से बात करते हुए मुरारी बाबू ने आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि टीडीबी ने अभी तक उनसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा है। उन्होंने दावा किया, "उस समय मैंने मंदिर के तंत्री की राय लेने के बाद प्रक्रियाओं के अनुसार एक प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। उस रिपोर्ट में मैंने लिखा था कि यह एक ताम्रपत्र था... मैंने ऐसा क्यों लिखा? क्योंकि यह एक ताम्रपत्र था। उसमें ताम्रपत्र पूरी तरह से साफ था। इसलिए इसे चढ़ाने का निर्देश दिया गया था।"
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जांच के लिए एसआईटी का गठन
इससे पहले सोमवार को केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला में संरक्षक देवता की मूर्तियों पर लगे स्वर्ण-आवरण वाले ताम्रपत्रों के कम वजन से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का निर्देश दिया। बता दें कि इस साल उच्च न्यायालय को सूचित किए बिना आवरणों को फिर से स्वर्ण-आवरण के लिए भेजने के निर्णय पर अदालती कार्यवाही के दौरान वजन में कमी का मामला सामने आया।
यह पता चला कि जब 2019 में भगवान अयप्पा मंदिर से आवरणों को स्वर्ण-आवरण के लिए आखिरी बार हटाया गया था, तो उनका वजन लगभग 4.5 किलोग्राम कम हो गया था, एक ऐसा तथ्य जिसकी सूचना देवस्वओम अधिकारियों ने नहीं दी थी। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. टी. शंकरन की देखरेख में सबरीमाला मंदिर में सोने सहित सभी मूल्यवान वस्तुओं की एक व्यापक सूची बनाने का आदेश दिया था।