शशिकला को झटका, अब दिल्ली में सुलझेगी तमिलनाडु की गुत्थी
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तमिलनाडु में सत्ता के लिए अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला और कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के बीच जारी सियासी जंग में गेंद अब राज्यपाल सी विद्यासागर राव के हाथ में हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राज्यपाल ने केंद्र को राजनीतिक हालात की रिपोर्ट भेज दी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राज्यपाल शशिकला के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने का इंतजार कर रहे हैं और वह इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों की राय ले रहे हैं। हालांकि देर रात राजभवन की ओर से इस बात का खंडन किया गया कि केंद्र को मामले में कोई रिपोर्ट भेजी गई है।
No report has been sent from Governor C Vidyasagar Rao to Ministry of Home Affairs: Raj Bhavan PRO pic.twitter.com/Q0nHaGzTCr
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI_news) February 10, 2017
राजभवन ने बयान जारी कर कहा कि राज्यपाल ने अभी गृह मंत्रालय को या राष्ट्रपति को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है। माना जा रहा है कि केंद्र से सुझाव मिलने के बाद ही राज्यपाल इस मामले में अगला कदम उठाएंगे और तमिलनाडु की उलझी राजनीतिक गुत्थी अब दिल्ली से ही सुलझेगी।
अब देखना यह है कि सरकार बनाने के लिए राज्यपाल सबसे पहले किसे आमंत्रित करते हैं। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पनीरसेल्वम इस्तीफा देने के बावजूद राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं इसलिए उन्हें सरकार बनाने और बहुमत साबित करने का मौका पहले मिल सकता है। इस बीच, शशिकला और प्रेसिडियम चेयरमैन ई मधुसूदनन द्वारा एक-दूसरे को बर्खास्त किए जाने से राज्य की सियासी जंग में नया मोड़ आ गया है। अब मुख्यमंत्री के लिए प्रदेश का इंतजार लंबा खिंचता दिख रहा है।
No report has been sent still from Governor C Vidyasagar Rao: Raj Bhavan PRO
— ANI (@ANI_news) February 10, 2017
सरकार बनाने के न्योता का इंतजार कर रही थीं शशिकला
राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा करने के एक दिन बाद शुक्रवार को शशिकला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्यपाल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और उन्हें सरकार बनाने का मौका देंगे।
इन सियासी उठापटक के बीच शशिकला ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश देते हुए पनीरसेल्वम खेमे में शामिल होने वाले प्रेसिडियम चेयरमैन ई मधुसूदनन को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया।
इसके बाद मधुसूदनन ने कहा कि शशिकला को उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने का कोई हक नहीं है, क्योंकि वे पार्टी की अस्थायी महासचिव के पद से उन्हें पहले ही बर्खास्त कर चुके हैं। उन्होंने दावा कि वे अब भी पार्टी प्रेसिडियम के चेयरमैन हैं। मधुसूदनन ने चुनाव आयोग से भी कहा है कि वह शशिकला को अन्नाद्रमुक महासचिव के रूप में मान्यता न दे। शशिकला का दावा किया है और उन्हें अपने समर्थक विधायकों की सूची सौंपी थी।
अन्नाद्रमुक के दावे के अनुसार शशिकला को 131 विधायकों का समर्थन हासिल है। शशिकला से बगावत से पहले छह फरवरी को पनीरसेल्वम ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। राज्यपाल ने उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने को कहा था।
हाईकोर्ट ने विधायकों को ‘बंधक’ बनाने पर तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब
शशिकला और पनीरसेल्वम के बीच सत्ता संघर्ष के बीच तथाकथित तौर पर विधायकों को ‘बंधक’ बनाए जाने के मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या यह बात सही है कि अन्नाद्रमुक के विधायकों को यहां के एक रिसॉर्ट में अवैध तरीके से रोककर रखा गया है और उनमें से 20 विधायक उपवास पर हैं।
जस्टिस सीटी सेल्वम और जस्टिस टी मतिवनन की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ताओं के वकील के. बालू के दावों का उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि बंधक बनाए जाने के विरोध में 20 विधायक उपवास कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि अगर यह सही है तो मामला बहुत ही गंभीर है। साथ ही पीठ ने कहा कि अदालत सिर्फ वकील के दावों पर विश्वास करके कार्रवाई नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि मामले में उचित यही होगा कि राज्य को जवाब देने का मौका दिया जाए। अपने इस आदेश के साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तिथि तय कर दी।