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तमिलनाडु में 'दही' पर सियासत: CM स्टालिन के विरोध पर FSSAI ने गाइडलाइन संशोधित की, जानें पूरा मामला

Thu, 30 Mar 2023 03:13 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Thu, 30 Mar 2023 03:13 PM IST
सार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने दही के पैकेटों पर ‘दही’ लिखकर हिंदी को कथित तौर पर थोपे जाने का आरोप लगाया। स्टालिन ने बुधवार को कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को देश के दक्षिणी हिस्सों से 'निर्वासित' किया जाएगा।

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Tamil Nadu says no to Hindi word ‘Dahi’ on Aavin curd packets
तमिलनाडु में दही पर सियासत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु में 'दही' शब्द पर चल रही सियासत के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपनी गाइडलाइन में संशोधन कर दिया है। अब दही शब्द के बजाय अंग्रेजी में कर्ड लिख सकते हैं। इसके साथ ही ब्रैकेट में स्थानीय भाषा मोसरू, तायिर, जम्मात दौद, पेरूगु या फिर दही में से किसी एक का जिक्र कर सकते हैं। 
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FSSAI ने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) को एक आदेश जारी किया था। जिसके अनुसार, दही के पैकेट पर प्रमुखता से ‘दही’ मुद्रित करने का निर्देश दिया था। जिसका तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विरोध किया था। 
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स्टालिन ने दही के पैकेटों पर ‘दही’ लिखकर हिंदी को कथित तौर पर थोपे जाने का आरोप लगाया था। स्टालिन ने कहा था कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को देश के दक्षिणी हिस्सों से 'निर्वासित' किया जाएगा।
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स्टालिन ने क्या कहा? 
स्टालिन ने अपने आधिकारिक टि्वटर हैंडल पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को लेकर प्रकाशित एक खबर साझा की जिसमें जिसमें कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) को पैकेट पर दही को प्रमुखता से ‘दही’ मुद्रित करने का निर्देश दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FSSAI ने केएमएफ को दही के लिए कन्नड़ भाषा में प्रयोग होने वाला शब्द ‘मोसरू’ को कोष्ठक में उपयोग करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा तमिलनाडु कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन को एफएसएसएआई द्वारा बताया गया है कि दही के लिए तमिल भाषा के शब्द ‘तायिर’ को कोष्ठक में इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्टालिन ने कहा, 'हिंदी थोपने की बेशर्म जिद दही के एक पैकेट पर भी हिंदी में लेबल लगाने के लिए निर्देशित करने की हद तक आ गई है। हमारे अपने राज्यों में तमिल और कन्नड़ को हटा दिया गया है। हमारी मातृभाषाओं की इस तरह की अवहेलना यह सुनिश्चित करेगी कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को दक्षिण भारत से हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया जाए।'

डीएमके नेता बोले- सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए 
FSSAI की गाइडलाइन पर डीएमके नेता टीके एलंगोवन का भी बयान आया। उन्होंने कहा, 'हर राज्य को अपनी भाषा में लिखने दीजिए। FSSAI क्यों दखल दे रहा है? सरकार का दायित्व है कि वह संविधान की रक्षा करे। इन सभी अनुसूचित भाषाओं के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। इस देश में कोई भी भाषा राष्ट्रभाषा नहीं बन सकती और उन्हें यह बात जाननी चाहिए।'


विरोध के बाद FSSAI ने बदली गाइडलाइन
 
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