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तमिलनाडु: अम्मा पर नहीं उतरा जनता का गुस्सा, बढ़ गया वोट पर्सेंटेज

Thu, 19 May 2016 09:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 May 2016 09:21 PM IST
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Tamil Nadu Chief Minister J Jayalalithaa'S promise to states people during assembly elections 2016
- फोटो : PTI

एग्जिट पोल्स ने बताया कि तमिलनाडु में जयललिता के अगुवाई वाली अन्नाद्रमुक नहीं जीतेगी। जनता का गुस्सा वोट में बदल गया और अम्मा की पार्टी का वोट पर्सेंटेज बीते विधानसभा चुनाव से बढ़ गया। पोल्स में उन्हें किसी ने 95 सीटें मिलने की संभावना जताई तो किसी ने 97 सीटे दीं लेकिन जनता ने सभी एग्जिट पोल्स और आशंकाओं को धता बताते हुए जयललिता के सिर मुख्यमंत्री का ताज फिर से सजा दिया। हालांकि तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में यह बात देखने योग्य रही कि जनता अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता द्वारा किए गए वादों की वजह से पार्टी की ओर आकर्षित हुई। इतना ही नहीं जनता ने अन्नाद्रमुक को इसलिए भी वोट किया क्योंकि संभवतः वे द्रमुक के वंशवाद से मुक्ति पाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने 92 साल के करुणानिधि की जगह जयललिता को राज्य का मुखिया चुना। इस बात का जिक्र खुद जयललिता ने भी चुनाव जीतने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में किया। उन्होंने कहा कि ‘तमिलनाडु की जनता ने हमारे विरोधियों की वंशवाद की राजनीति को खारिज कर दिया है। मेरे खिलाफ डीएमके का झूठा प्रचार नाकाम रहा। तमिलनाडु को नंबर एक राज्य बनाऊंगी। जनता का भरोसा मुझपर कायम रहा, आप सबको धन्यवाद।'

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हालांकि इन सब के बीच अम्मा के सत्ता में आने की सबसे बड़ी वजह रही है उनकी ओर से किए गए वादे। अम्मा ने चुनाव जीतने के बाद कहा भी कि वो जनता से किया हुआ हर वादा निभाएंगी।आईए आपको बताते हैं कि अम्मा ने जनता से क्या क्या वादा किया था और उन्हें किन वादों को पूरा करना है। अन्नाद्रमुक की ओर से विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जारी किए गए घोषणापत्र में सभी राशन कार्ड धारकों को मुफ्त मोबाइल, 100 यूनिट बिजली और सार्वजनिक जगहों पर वाई-फाई देने का ऐलान किया था। घोषणापत्र के मुताबिक महिलाओं को स्कूटी या मोपेड खरीदने के लिए सरकार 50 फीसदी सब्सिडी देने का भी वादा किया है। इसके साथ ही अम्मा ने इस बात की घोषणा भी की थी कि सरकार की ओर से उन लोगों का शैबेरोजगार रह जाने वाले लोगों के एजुकेशन लोन भी चुकाएगी।  अम्मा ने वादा किया था कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो वोकेशन ट्रेनिंग समेत कई ऐसे कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे हर घर के एक सदस्य को रोजगार की गारंटी मिल सके। उन्होंने 100 यूनिट बिजली मुफ्त देने की बात भी कही थी और कहा था कि इससे  राज्य के 78 लाख उपभोक्ताओं को फायदा होगा। उन्हें बिजली बिल नहीं देना होगा। अन्नाद्रमुक की ओर से इस बात की घोषणा की गई थी कि कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप बांटने की स्कीम जारी रहेगी साथ ही साथ उन्हें मुफ्त इंटरनेट कनेक्शन देने की बात भी कही गई थी।
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अम्मा यानी जयललिता इन वादों में से कितना वादा पूरा करेंगी यह तो वक्त तय करेगा लेकिन इन वादों से पहले भी सरकार की ओर से कई ऐसी योजनाएं चलाई गईं जिसने लोगों का समर्थन अन्नाद्रमुक से कहीं हटने नहीं दिया। बता दें कि इसी साल फरवरी में अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता ने राज्य में गरीबों और वंचित लोगों के लिए अम्मा पेयजल योजना की शुरुआत की थी। जयललिता का कहना था कि इस योजना का उद्देश्य गरीबों और दबे कुचले लोगों को मुफ्त में मिनरल वाटर उपलब्ध कराना है। बताया गया था कि  राज्य सरकार ने पिछले 56 महीनों में 7324 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न समेकित पेयजल योजनाएं क्रियान्वित की हैं। इससे पहले सरकार की ओर से कम कीमत वाली कैंटीन और पेयजल के बाद अब तमिलनाडु की जयललिता सरकार अब 'अम्मा' नमक बेचने की शुरुआत भी की गई थी। यही नहीं तमिलनाडु सरकार की ओर से अम्मा सीमेंट की शुरुआत की गई थी जिसके अतंर्गत लोगों को सस्ते दाम पर सीमेंट उपलब्ध कराया जा रहा है।
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इन चुनावों में से सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक बात यह रही कि भ्रष्टाचार का मुद्दा कहीं आस पास नहीं दिखा। वहीं इस बात का अंदाजा भी लगाया जा रहा था कि बीते दिनों राज्य में आई बाढ़ के दौरान सरकार की ओर से लोगों की मदद करने से ज्यादा उसका प्रचार करने और उसके इंतजाम में हुई गड़बड़ियों के चलते जयललिता के खिलाफ लोग एकजुट हो जाएंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बता दें कि 2011 में हुए विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक का कुल वैध मतों में हिस्सा 38.40 प्रतिशत था वहीं इस विधानसभा चुनाव में समाचार लिखे जाने तक अन्नाद्रमुक का कुल वैध मतों में हिस्सा 41.1 प्रतिशत था।

(सभी फोटो PTI से साभार)

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