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कलाम से मिलने 2700 किमी चलाई थी साईकिल, कहा 'मेरी जगह, उन्हें जिंदा रहना चाहिए था'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 27 Jul 2016 05:43 PM IST
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एस नागूर मेरान
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70 साल के एस नागूर मेरान दिन में कपड़े सिलते हैं और रात में चौकीदारी करते हैं। मेरान जहां कपड़े सिलते हैं वहां पेड़ पर इन्होंने एक तस्वीर लगा रखी है। इस तस्वीर में मेरान, दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के साथ बैठे हुए है।
तस्वीर की तरफ इशारा करते हुए मेरान उस वाकये को याद करते हैं कि कैसे उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति से मिलने के लिए तामिलनाडु के तंकासी से राष्ट्रपति भवन तक करीब 2700 किलोमीटर की यात्रा की थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट में मेरान बताते है, 'मुझे चेन्नई, हैदराबाद, नागपुर, भोपाल, और आगरा होते हुए दिल्ली पहुंचने में 35 दिन लगे। हैरानी की बात यह थी इस दौरान एकबार भी मेरे साईकिल का पहिया पंक्चर नहीं हुआ। ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा अल्लाह भी मुझे अब्दुल कलाम से मिलाना चाह रहा था।'
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तस्वीर की तरफ इशारा करते हुए मेरान उस वाकये को याद करते हैं कि कैसे उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति से मिलने के लिए तामिलनाडु के तंकासी से राष्ट्रपति भवन तक करीब 2700 किलोमीटर की यात्रा की थी।
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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट में मेरान बताते है, 'मुझे चेन्नई, हैदराबाद, नागपुर, भोपाल, और आगरा होते हुए दिल्ली पहुंचने में 35 दिन लगे। हैरानी की बात यह थी इस दौरान एकबार भी मेरे साईकिल का पहिया पंक्चर नहीं हुआ। ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा अल्लाह भी मुझे अब्दुल कलाम से मिलाना चाह रहा था।'
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अब्दुल कलाम ने शाल लेने से मना कर दिया
अब्दुल कलाम
- फोटो : Getty Images
मेरान ने आगे बताया, 'जब मैं दिल्ली पहुंचा तो मुझे तुरंत कलाम साहब से मिलने नहीं दिया गया। फिर मैंने कलाम साहब को पत्र लिख अपनी यात्रा और मिलने के मकसद के बारे में बताया। संयोगवश कलाम साहब ने उस पत्र को पढ़ा और मुझे मिलने को बुलाया।'
मेरान ने अब्दुल कलाम से करीब 35 मिनट तक मुलाकात की और साथ में रात्रिभोज भी किया। मेरान ने बताया, 'मैंने कलाम साहब को भेंट में देने के लिए अपने साथ एक शाल ले गया था, लेकिन कलाम साहब ने इसे लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि आप इस शाल को ठंड में ठिठुरते किसे जरुरंतमंद को दे दिजिएगा।'
पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें रोज स्कूली बच्चों से बातचीत को अपने आदत में शुमार करने को कहा। एपीजे अब्दुल कलाम की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए मेरान कहते है, ' आज मेरी जगह, उन्हें जिंदा रहना चाहिए था'
मेरान ने अब्दुल कलाम से करीब 35 मिनट तक मुलाकात की और साथ में रात्रिभोज भी किया। मेरान ने बताया, 'मैंने कलाम साहब को भेंट में देने के लिए अपने साथ एक शाल ले गया था, लेकिन कलाम साहब ने इसे लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि आप इस शाल को ठंड में ठिठुरते किसे जरुरंतमंद को दे दिजिएगा।'
पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें रोज स्कूली बच्चों से बातचीत को अपने आदत में शुमार करने को कहा। एपीजे अब्दुल कलाम की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए मेरान कहते है, ' आज मेरी जगह, उन्हें जिंदा रहना चाहिए था'