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क्या इस चेहरे पर बीजेपी खेल सकती है नया दांव, बदल सकते हैं समीकरण
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 26 Jul 2016 03:17 PM IST
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यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह द्वारा मायावती को अपशब्द कहने, इसके बाद बीएसपी के प्रदर्शन में आपत्तिजनक नारे लगाने और फिर दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह के स्टैंड ने यूपी की पॉलिटिक्स में नया मोड़ दे दिया है। 2017 में होने वाले यूपी चुनाव के लिए जहां पिछले कुछ महीने से कई समीकरण बन रहे थे, वहीं बीजेपी को एक नया कार्ड खेलने का मौका मिल गया है।
कांग्रेस औरचुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने यूपी में ब्राह्मण और मुस्लिम कार्ड खेलते हुए शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री उम्मीदवार और गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। वहीं, बीजेपी ने अपने कैबिनेट में शाहजहांपुर से सांसद कृष्णा राज, चंदौली से सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को शामिल करके महिला, ब्राह्मण और पटेल मतदाताओं को साधने का प्रयास किया। मायावती जहां स्वामी प्रसाद मौर्य और आरके चौधरी के बीएसपी छोड़ने से बैकफुट पर थीं, वहीं अखिलेश खुद को प्रोग्रेसिव साबित करने में लगे थे।
इन सब के बीच 20 अगस्त को यूपी के मऊ में दयाशंकर सिंह ने मायावती पर अभद्र टिप्पणी कर दी। उन्होंने मायावती की तुलना वेश्या से कर दी। यहीं से हर दिन यूपी की राजनीति में बदलाव अाते गए । मायावती ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए दलित और महिला का कार्ड खेला। अगले दिन बीएसपी ने दयाशंकर सिंह की गिरफ्तारी के लिए प्रदर्शन किया। लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन में नसीमुद्दीन सिद्दिकी की मौजूदगी में बीएसपी कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर सिंह की पत्नी, बेटी और मां के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए। इसके बाद दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति ने जिस तरह फ्रंट फुट पर आकर स्टैंड लिया उसने दयाशंकर को 6 साल के लिए निलंबित करने वाली भ्ााजपा को संजीवनी दे दी।
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कांग्रेस औरचुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने यूपी में ब्राह्मण और मुस्लिम कार्ड खेलते हुए शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री उम्मीदवार और गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। वहीं, बीजेपी ने अपने कैबिनेट में शाहजहांपुर से सांसद कृष्णा राज, चंदौली से सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को शामिल करके महिला, ब्राह्मण और पटेल मतदाताओं को साधने का प्रयास किया। मायावती जहां स्वामी प्रसाद मौर्य और आरके चौधरी के बीएसपी छोड़ने से बैकफुट पर थीं, वहीं अखिलेश खुद को प्रोग्रेसिव साबित करने में लगे थे।
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इन सब के बीच 20 अगस्त को यूपी के मऊ में दयाशंकर सिंह ने मायावती पर अभद्र टिप्पणी कर दी। उन्होंने मायावती की तुलना वेश्या से कर दी। यहीं से हर दिन यूपी की राजनीति में बदलाव अाते गए । मायावती ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए दलित और महिला का कार्ड खेला। अगले दिन बीएसपी ने दयाशंकर सिंह की गिरफ्तारी के लिए प्रदर्शन किया। लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन में नसीमुद्दीन सिद्दिकी की मौजूदगी में बीएसपी कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर सिंह की पत्नी, बेटी और मां के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए। इसके बाद दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति ने जिस तरह फ्रंट फुट पर आकर स्टैंड लिया उसने दयाशंकर को 6 साल के लिए निलंबित करने वाली भ्ााजपा को संजीवनी दे दी।
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स्वाति को सोशल साइट्स पर मिल रहा जबरदस्त सपोर्ट
स्वाति सिंह के भावुक बयान और सोशल साइट्स पर उन्हें मिले समर्थन से बीजेपी ने पलड़ा बदलते हुए महिला-बेटी सम्मान और सुरक्षा के लिए पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया। स्वाति सिंह बलिया से आगे बढ़ते हुए रविवार को राज्यपाल राम नाईक से मिली और इस मामले में एक ज्ञापन दिया। इस विवाद के बाद उन्होंने जैसे बसपा को आडे़ हाथों लिया, मायावती और नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की और मीडिया के सामने जिस तरह से अपना पक्ष रखा, उससे साफ है कि बीजेपी को यूपी में एक नया नेता मिल गया है।
स्वाति सिंह के आगे आने से बीजेपी को फायदा मिलता दिख रहा है। स्वाति स्वर्ण जाति से आती हैं। इससे महिलाओं का समर्थन मिलने के साथ और सवर्ण वोटर्स उनके पक्ष में जा सकते हैं। सोशल साइट्स पर उनको लगातार समर्थन मिल रहा है और #swati singh, #IStandWithSwatiSingh और #Mayawati ट्रेंड कर रहे हैं। ट्विटर पर कई स्वाति को परेशान करने वाले बयान को ग़लत बता रहे हैं तो कई कह रहे हैं कि उसके लिए मायावती को माफी मांगनी चाहिए। इससे उत्साहित बीजेपी के नेता भी उन्हें आगे करने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। यहां तक कि इलाहाबाद में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो स्वाति सिंह को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। इससे साफ है कि बीजेपी इस मौके को भुनाने का पूरा प्रयास कर रही है।
स्वाति सिंह के आगे आने से बीजेपी को फायदा मिलता दिख रहा है। स्वाति स्वर्ण जाति से आती हैं। इससे महिलाओं का समर्थन मिलने के साथ और सवर्ण वोटर्स उनके पक्ष में जा सकते हैं। सोशल साइट्स पर उनको लगातार समर्थन मिल रहा है और #swati singh, #IStandWithSwatiSingh और #Mayawati ट्रेंड कर रहे हैं। ट्विटर पर कई स्वाति को परेशान करने वाले बयान को ग़लत बता रहे हैं तो कई कह रहे हैं कि उसके लिए मायावती को माफी मांगनी चाहिए। इससे उत्साहित बीजेपी के नेता भी उन्हें आगे करने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। यहां तक कि इलाहाबाद में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो स्वाति सिंह को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। इससे साफ है कि बीजेपी इस मौके को भुनाने का पूरा प्रयास कर रही है।
मायावती ने बदला अपना रुख
बीजेपी की रणनीति को देखते हुए मायावती ने तुरंत ही अपना रुख बदल दिया। उन्होंने बयान दिया कि स्वाति सिंह ने अपनी बेटी को लेकर जो शिकायत करवाई दयाशंकर के खिलाफ भी एक शिकायत दर्ज करवाती तो बेहतर होता। क्योंकि उसने मायावती के खिलाफ बोला। ऐसा करने पर इन दोनों महिलाओं को देश की महिलाएं अपने सिर पर बैठाती। इनकी दोगली मानसिकता साफ झलकती है। उन्होंने नसीमुद्दीन सिद्दिकी का भी बचाव किया और कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
मायावती ने अखिलेश पर सीधा हमला करते हुए कहा, वैसे तो वह मुझे बुआ कहते हैं, लेकिन जब मुझ पर अभद्र टिप्पणी की गई तो उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दयाशंकर को गिरफ्तार करने का आदेश तक नहीं दिया। इस पूरे मामले में बीजेपी और सपा की साठ-गांठ खुलकर सामने आ गई।
बीजेपी और बीएसपी की इस लड़ाई में कांग्रेस और सपा का रूख अभी साफ नहीं हुआ है। सपा ने बीएसपी समर्थकों की इस भाषा की निंदा ही नहीं की, बल्कि स्वाति सिंह को सुरक्षा देने की भी बात की। वहीं कांग्रेस ने इस मामले में बीजेपी का विरोध किया था लेकिन दोनों ही पार्टियों ने अपना रूख अभी साफ नहीं हुआ है।
मायावती ने अखिलेश पर सीधा हमला करते हुए कहा, वैसे तो वह मुझे बुआ कहते हैं, लेकिन जब मुझ पर अभद्र टिप्पणी की गई तो उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दयाशंकर को गिरफ्तार करने का आदेश तक नहीं दिया। इस पूरे मामले में बीजेपी और सपा की साठ-गांठ खुलकर सामने आ गई।
बीजेपी और बीएसपी की इस लड़ाई में कांग्रेस और सपा का रूख अभी साफ नहीं हुआ है। सपा ने बीएसपी समर्थकों की इस भाषा की निंदा ही नहीं की, बल्कि स्वाति सिंह को सुरक्षा देने की भी बात की। वहीं कांग्रेस ने इस मामले में बीजेपी का विरोध किया था लेकिन दोनों ही पार्टियों ने अपना रूख अभी साफ नहीं हुआ है।