साइकिल किसकी इसपर अभी भी सस्पेंस बरकरार
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साइकिल किसकी, अखिलेश यादव की या मुलायम सिंह की, इस पर सस्पेंस अभी बरकरार है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दो दौर में करीब 5 घंटे तक दोनों धड़ों की दलीलें सुनी, पर नाम और निशान का फैसला सुरक्षित रख लिया। आयोग अब दोनों खेमों की दलीलों पर कानूनविदों से राय लेगा और 17 जनवरी से पहले फैसला सुना देगा।
विधि विशेषज्ञों की राय अगर एक न हुई तो समाजवादी पार्टी का नाम और निशान दोनों फ्रीज हो जाएगा। नाम और निशान का फैसला इस पर निर्भर करेगा कि अखिलेश धड़े के रामगोपाल यादव की ओर से बुलाया गया राष्ट्रीय अधिवेशन वैध था या अवैध। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में इसी मुद्दे पर जमकर तकरार हुई।
इस मामले में अखिलेश धड़े की ओर से जहां सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने पक्ष रखा, वहीं मुलायम खेमे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन और परासरन ने दलीलें पेश की। परासरन ने नेताजी को सपा को सबसे वरिष्ठ नेता बताया। उन्होंने कहा कि उस अधिवेशन में भी जिसे अवैध ठहराया गया है, में नेताजी को मार्गदर्शक बना कर अखिलेश खेमे ने भी यही संदेश दिया है।
अधिवेशन का भविष्य तय करेगा नाम और निशान किसका
अधिवेशन का भविष्य तय करेगा नाम और निशान किसका
नाम और निशान की जंग पर रामगोपाल की ओर से बुलाए गया अधिवेशन ही दोनों धड़ों का भविष्य तय करेगा। अगर आयोग इस अधिवेशन को वैध करार देता है तो नाम और निशान पर अखिलेश धड़े का कब्जा होगा। इसके उलट अवैध घोषित होने पर मुलायम न सिर्फ फिर से सपा के अध्यक्ष माने जाएंगे, बल्कि नाम और निशान पर भी उनका हक हो जाएगा। इसीलिए अधिवेशन के दौरान सबसे अधिक माथापच्ची और तकरार अधिवेशन पर ही हुई।
कानूनी विमर्श भी इसी सवाल पर
चुनाव आयोग मुख्य रूप से राष्ट्रीय अधिवेशन की वैधता और अवैधता पर दी गई दलीलों पर ही विधि विशेषज्ञों की राय लेगा। अगर विधि विशेषज्ञों की राय बंटी तो नाम और निशान का फ्रीज होना तय है।
17 जनवरी से पहले हर हाल में आएगा निर्णय
यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 17 जनवरी को अधिसूचना जारी होनी है। ऐसे में आयोग हर हाल में इससे पहले अपना फैसला सुना देगा। आयोग के सूत्रों का कहना है कि फैसला विधि विशेषज्ञों की राय आने में लगे समय से तय होगा। अगर राय जल्दी आ गई तो एक-दो दिन में भी फैसला संभव है।
मुलायम और अखिलेश खेेमे की दलील
मुलायम खेमे की दलील
बर्खास्त रामगोपाल की ओर से बुलाया गया अधिवेशन अवैध।
मुलायम सपा के संस्थापक अध्यक्ष, इसलिए साइकिल पर हक उनका।
अधिवेशन बुलाने के लिए पार्टी के संविधान का किया गया उल्लंघन।
संविधान के मुताबिक एक महीना पहले नोटिस जरूरी।
अखिलेश खेमे की दलील
अधिवेशन से पहले ही खत्म हो गई थी रामगोपाल की बर्खास्तगी।
अधिवेशन के लिए जरूरी 40 फीसदी से अधिक 55 फीसदी सदस्यों की लिखित सहमति।
90 फीसदी विधायक-सांसद अखिलेश के साथ।
पार्टी ने अखिलेश को चुना अध्यक्ष, इसलिए उनका हर फैसला जायज।
संविधान में आपात अधिवेशन बुलाने का भी प्रावधान
सब ठीक कर दूंगा : मुलायम
मुलायम सिंह यादव शुक्रवार को जब अंतिम सुनवाई के लिए आयोग पहुचे तो एक बार फिर यह कहकर चौंका दिया कि वे सबकुछ ठीक-ठाक कर देंगे। हालांकि सुनवाई के दौरान दोनों धड़े कई बार आमने-सामने आए।