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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कसीनो और ऑनलाइन गेमिंग में जीत-हार का इंतजार नहीं, दांव लगाते ही कटेगा जीएसटी
Sun, 31 May 2026 05:43 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 31 May 2026 05:43 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग और कसीनो पर जीएसटी को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया है कि टैक्स खेल के नतीजे या कसीनो के अंतिम मुनाफे पर नहीं, बल्कि खिलाड़ी द्वारा दांव लगाते ही लागू हो जाएगा। कोर्ट ने कसीनो कंपनियों की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें टैक्स सिर्फ 'ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू' पर लगाने की मांग की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग, फैंटेसी स्पोर्ट्स और दांव लगाकर खेले जाने वाले अन्य वर्चुअल खेलों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि कसीनो और जुआ गतिविधियों में जीएसटी की गणना खिलाड़ियों के दांव लगाने के समय से होगी, न कि खेल खत्म होने के बाद कैसीनो के वास्तविक मुनाफे के आधार पर।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कसीनो कंपनियों की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जीएसटी केवल ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (जीजीआर) यानी खिलाड़ियों को जीत की राशि देने के बाद बची रकम पर ही लगाया जाना चाहिए। कसीनो का तर्क था कि यदि खिलाड़ियों को भुगतान की गई जीत की राशि दांव से अधिक हो जाए तो कर योग्य आय ही नहीं बचती।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीएसटी किसी कारोबारी के लाभ या हानि पर नहीं, बल्कि कर योग्य आपूर्ति (टैक्सेबल सप्लाई) होने पर लगाया जाता है। अदालत ने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति कसीनो में चिप्स या टोकन खरीदकर किसी खेल में दांव लगाता है, उसी समय जीएसटी लागू हो जाता है। इसके लिए खेल का नतीजा आने या खिलाड़ी के जीतने-हारने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कसीनो में इस्तेमाल होने वाले चिप्स और टोकन केवल दांव लगाने का माध्यम हैं। खिलाड़ी इनके बिना खेल में भाग नहीं ले सकता। इसलिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि चिप्स या टोकन के जरिये होने वाले लेनदेन में कोई कर योग्य दावा उत्पन्न नहीं होता।
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लाभ-हानि के आधार पर कर तय होने से पारदर्शिता घटेगी
पीठ ने कहा कि यदि जीएसटी की गणना केवल कैसीनो के अंतिम लाभ या हानि के आधार पर की जाए तो इससे कर देयता को कम दिखाने या छिपाने की संभावना पैदा हो सकती है। इसके विपरीत, खिलाड़ी की ओर से दांव लगाए जाने के आधार पर कर निर्धारित करने से कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी रहती है। अदालत ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी दांव हार जाता है, तो कसीनो उस रकम को अपनी कमाई मानता है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी बड़ी रकम जीत जाता है, तो कसीनो यह कहता है कि उसे नुकसान हुआ है, इसलिए उस राशि पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए।
खेल की प्रकृति खिलाड़ी के जीतने या हारने से नहीं बदलती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कसीनो में खेल की प्रकृति खिलाड़ी के जीतने या हारने से नहीं बदलती। जैसे ही कोई व्यक्ति खेल में हिस्सा लेकर दांव लगाता है, उसी समय जीएसटी लागू हो जाता है। बाद में खिलाड़ी जीते या हारे, या कसीनो कोई भुगतान करे, इससे जीएसटी की देनदारी खत्म नहीं होती। अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि ऑनलाइन गेमिंग, फैंटेसी स्पोर्ट्स, कसीनो और दांव आधारित अन्य खेलों में जीएसटी की देनदारी खिलाड़ी की ओर से दांव लगाए जाने के समय ही तय होगी और इसे कसीनो के अंतिम वित्तीय परिणाम से नहीं जोड़ा जा सकता।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कसीनो कंपनियों की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जीएसटी केवल ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (जीजीआर) यानी खिलाड़ियों को जीत की राशि देने के बाद बची रकम पर ही लगाया जाना चाहिए। कसीनो का तर्क था कि यदि खिलाड़ियों को भुगतान की गई जीत की राशि दांव से अधिक हो जाए तो कर योग्य आय ही नहीं बचती।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीएसटी किसी कारोबारी के लाभ या हानि पर नहीं, बल्कि कर योग्य आपूर्ति (टैक्सेबल सप्लाई) होने पर लगाया जाता है। अदालत ने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति कसीनो में चिप्स या टोकन खरीदकर किसी खेल में दांव लगाता है, उसी समय जीएसटी लागू हो जाता है। इसके लिए खेल का नतीजा आने या खिलाड़ी के जीतने-हारने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कसीनो में इस्तेमाल होने वाले चिप्स और टोकन केवल दांव लगाने का माध्यम हैं। खिलाड़ी इनके बिना खेल में भाग नहीं ले सकता। इसलिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि चिप्स या टोकन के जरिये होने वाले लेनदेन में कोई कर योग्य दावा उत्पन्न नहीं होता।
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लाभ-हानि के आधार पर कर तय होने से पारदर्शिता घटेगी
पीठ ने कहा कि यदि जीएसटी की गणना केवल कैसीनो के अंतिम लाभ या हानि के आधार पर की जाए तो इससे कर देयता को कम दिखाने या छिपाने की संभावना पैदा हो सकती है। इसके विपरीत, खिलाड़ी की ओर से दांव लगाए जाने के आधार पर कर निर्धारित करने से कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी रहती है। अदालत ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी दांव हार जाता है, तो कसीनो उस रकम को अपनी कमाई मानता है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी बड़ी रकम जीत जाता है, तो कसीनो यह कहता है कि उसे नुकसान हुआ है, इसलिए उस राशि पर कर नहीं लगाया जाना चाहिए।
खेल की प्रकृति खिलाड़ी के जीतने या हारने से नहीं बदलती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कसीनो में खेल की प्रकृति खिलाड़ी के जीतने या हारने से नहीं बदलती। जैसे ही कोई व्यक्ति खेल में हिस्सा लेकर दांव लगाता है, उसी समय जीएसटी लागू हो जाता है। बाद में खिलाड़ी जीते या हारे, या कसीनो कोई भुगतान करे, इससे जीएसटी की देनदारी खत्म नहीं होती। अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि ऑनलाइन गेमिंग, फैंटेसी स्पोर्ट्स, कसीनो और दांव आधारित अन्य खेलों में जीएसटी की देनदारी खिलाड़ी की ओर से दांव लगाए जाने के समय ही तय होगी और इसे कसीनो के अंतिम वित्तीय परिणाम से नहीं जोड़ा जा सकता।